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नुक्कड़ नाटकः दूर से दिखी हरियाली, धरती पर पहुंचा तो दिखा बंजर
ब्यूरो, अमर उजाला/पंचकूला
Updated Tue, 12 Jul 2016 01:18 AM IST
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नुक्कड़ नाटक पेश करते छात्र
- फोटो : अमर उजाला
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जीरकपुर स्थित दीक्षांत इंटरनेशनल स्कूल के स्टूडेंट्स ने सेक्टर-7 की मार्केट में विश्व जनसंख्या दिवस के मौके पर नुक्कड़ नाटक पेश कर लोगों को जागरूक किया। यह नाटक ‘आबादी घटाओ, धरती बचाओ’ विषय पर आधारित था। इस नाटक को थिएटर क्लब के विद्यार्थियों ने पेश किया। पंद्रह मिनट के इस नुक्कड़ नाटक को स्कूल टीचर बरनाली ने लिखा और निर्देशित भी किया।
इस नाटक की कहानी एक एलियन सिजर पर आधारित थी, जो मानव जीवन को करीब से जानने और धरती पर जीवन देखने के लिए पड़ोसी गैलेक्सी से धरती पर आता है। जब वह धरती के लिए अपनी यात्रा शुरू करता है तो अपने टेलीस्कोप से देखता है कि धरती हरी-भरी और सुंदर दिखाई देती है। लेकिन जैसे-जैसे समय बीतता है और वह धरती के नजदीक पहुंचता है तो धरती का रंग बदलकर बंजर सा दिखाई देने लगता है।
उसको धरती पर पहुंचने में 500 वर्ष लग जाते हैं। जब धरती पर उसका जहाज उतरता है तो उसको सभी जगह कंक्रीट के जंगल और लोगों के सिर नजर आते हैं। धरती पर कदम रखने के बाद वह स्थानीय लोगों से मुलाकात करता है और जानता है कि किस तरह से धरती की हरियाली और सुंदरता ज्यादा आबादी के कारण खत्म हो गई।
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स्कूल के युवा कलाकार अर्चित ने कहा कि हमने नाटक के माध्यम से बताया है कि किस तरह से बढ़ती हुई जनसंख्या, पर्यावरण और धरती की हरियाली के लिए खतरा है। नाटक में भूमिका निभाने वाली अनुष्का ने कहा कि नुक्कड़ नाटक के माध्यम से यह संदेश देने का प्रयास किया कि यदि जनसंख्या को समय रहते नियंत्रित नहीं किया गया तो लोग पानी और खाने जैसी आम आवश्यकताओं के लिए एक दूसरे को खत्म करना शुरू कर देंगे।
स्कूल के चेयरमैन मितुल दीक्षित ने कहा कि इस गतिविधि की मुख्य वजह जनसंख्या नियंत्रण का संदेश देना था। उन्होंने कहा कि हम सामाजिक समस्याओं पर आधारित ऐसे ही नाटकों का आयोजन करते रहते हैं।
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इस नाटक की कहानी एक एलियन सिजर पर आधारित थी, जो मानव जीवन को करीब से जानने और धरती पर जीवन देखने के लिए पड़ोसी गैलेक्सी से धरती पर आता है। जब वह धरती के लिए अपनी यात्रा शुरू करता है तो अपने टेलीस्कोप से देखता है कि धरती हरी-भरी और सुंदर दिखाई देती है। लेकिन जैसे-जैसे समय बीतता है और वह धरती के नजदीक पहुंचता है तो धरती का रंग बदलकर बंजर सा दिखाई देने लगता है।
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उसको धरती पर पहुंचने में 500 वर्ष लग जाते हैं। जब धरती पर उसका जहाज उतरता है तो उसको सभी जगह कंक्रीट के जंगल और लोगों के सिर नजर आते हैं। धरती पर कदम रखने के बाद वह स्थानीय लोगों से मुलाकात करता है और जानता है कि किस तरह से धरती की हरियाली और सुंदरता ज्यादा आबादी के कारण खत्म हो गई।
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स्कूल के युवा कलाकार अर्चित ने कहा कि हमने नाटक के माध्यम से बताया है कि किस तरह से बढ़ती हुई जनसंख्या, पर्यावरण और धरती की हरियाली के लिए खतरा है। नाटक में भूमिका निभाने वाली अनुष्का ने कहा कि नुक्कड़ नाटक के माध्यम से यह संदेश देने का प्रयास किया कि यदि जनसंख्या को समय रहते नियंत्रित नहीं किया गया तो लोग पानी और खाने जैसी आम आवश्यकताओं के लिए एक दूसरे को खत्म करना शुरू कर देंगे।
स्कूल के चेयरमैन मितुल दीक्षित ने कहा कि इस गतिविधि की मुख्य वजह जनसंख्या नियंत्रण का संदेश देना था। उन्होंने कहा कि हम सामाजिक समस्याओं पर आधारित ऐसे ही नाटकों का आयोजन करते रहते हैं।