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Panchkula News: सात लोगों की आत्महत्या पर बोले धीरेंद्र शास्त्री, कहा- वह हनुमंत कथा सुनने नहीं आए थे
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श्री श्री 108 तपोनिष्ठ अग्निहोत्री संपूर्णानंद ब्रह्मचारी की बागेश्वर धाम के पीठाधीश पंडित धीर
पुलिस की जांच का दिया हवाला, कथा के दाैरान श्रद्धालुओं ने श्रीराम और हनुमान जी के जयकारे लगाए
संवाद न्यूज एजेंसी
पंचकूला। सेक्टर-5 शालीमार ग्राउंड में चल रही हनुमंत कथा के चौथे दिन बागेश्वर धाम के पीठाधीश्वर धीरेंद्र शास्त्री शाम 6:30 कथा के स्टेज पहुंचे। उन्हें देखते ही पंडाल में बैठे श्रद्धालुओं ने श्रीराम और हनुमान जी के जयकारे लगाए। कथा की शुरुआत से पहले धीरेंद्र शास्त्री ने कहा कि कथा के पहले दिन 7 लोगों की दर्दनाक मौत हो गई। इस घटना को कथा स्थल से भी जोड़ा गया। कहा गया कि पंचकूला सेक्टर-5 में कथा स्थल से मृतक परिवार कथा सुनकर गया था। जबकि उनकी मौत शाम 7:30 से 10 बजे के बीच हुई है। मामला उनके संज्ञान में आया तो पंचकूला पुलिस से पूछा। उन्होंने जांच के बाद जानकारी दी कि आत्महत्या करने वाला परिवार कथा सुनने पहुंचा ही नहीं था। इसके बाद धीरेंद्र शास्त्री ने सातों लोगों की आत्मिक शांति के लिए सभी श्रद्धालुओं के साथ प्रार्थना की।
धीरेंद्र शास्त्री के भजन पर झूमे श्रद्धालु
कथा की शुरुआत से पहले धीरेंद्र शास्त्री के भजन, लौटरियां बालाजी की नगरिया भजन गाना शुरू किया। इस पर श्रद्धालु जमकर झूमने लगे। उन्होंने कहा कि एक ही जगह पर आज संतों के दर्शन लोगों को हो गए। एक समय पर एक साथ इतने संतों के दर्शन होना कठिन होता है। जब भगवान व्यस्त होते हैं तो वह महात्माओं को भेज देते हैं। हनुमान जी संत महात्माओं की रक्षा करते हैं। धीरेंद्र शास्त्री ने कहा कि आप भागवत पढ़ोगे तो उसमें नारद जी अपने पूर्व जन्म की कथा व्यास जी को सुनाते हुए कहते हैं कि हम पहले दासी पुत्र थे। संत की कृपा हुई तो भगवत की कृपा हो गई और भगवान की राम की कृपा हुई तो दासी पुत्र से हम ब्रह्मपुत्र नारद बन गए। इसी प्रकार रावण के भाई विभीषण पर भगवान राम की कृपा हुई तो वह राजा बन गया।
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संवाद न्यूज एजेंसी
पंचकूला। सेक्टर-5 शालीमार ग्राउंड में चल रही हनुमंत कथा के चौथे दिन बागेश्वर धाम के पीठाधीश्वर धीरेंद्र शास्त्री शाम 6:30 कथा के स्टेज पहुंचे। उन्हें देखते ही पंडाल में बैठे श्रद्धालुओं ने श्रीराम और हनुमान जी के जयकारे लगाए। कथा की शुरुआत से पहले धीरेंद्र शास्त्री ने कहा कि कथा के पहले दिन 7 लोगों की दर्दनाक मौत हो गई। इस घटना को कथा स्थल से भी जोड़ा गया। कहा गया कि पंचकूला सेक्टर-5 में कथा स्थल से मृतक परिवार कथा सुनकर गया था। जबकि उनकी मौत शाम 7:30 से 10 बजे के बीच हुई है। मामला उनके संज्ञान में आया तो पंचकूला पुलिस से पूछा। उन्होंने जांच के बाद जानकारी दी कि आत्महत्या करने वाला परिवार कथा सुनने पहुंचा ही नहीं था। इसके बाद धीरेंद्र शास्त्री ने सातों लोगों की आत्मिक शांति के लिए सभी श्रद्धालुओं के साथ प्रार्थना की।
धीरेंद्र शास्त्री के भजन पर झूमे श्रद्धालु
कथा की शुरुआत से पहले धीरेंद्र शास्त्री के भजन, लौटरियां बालाजी की नगरिया भजन गाना शुरू किया। इस पर श्रद्धालु जमकर झूमने लगे। उन्होंने कहा कि एक ही जगह पर आज संतों के दर्शन लोगों को हो गए। एक समय पर एक साथ इतने संतों के दर्शन होना कठिन होता है। जब भगवान व्यस्त होते हैं तो वह महात्माओं को भेज देते हैं। हनुमान जी संत महात्माओं की रक्षा करते हैं। धीरेंद्र शास्त्री ने कहा कि आप भागवत पढ़ोगे तो उसमें नारद जी अपने पूर्व जन्म की कथा व्यास जी को सुनाते हुए कहते हैं कि हम पहले दासी पुत्र थे। संत की कृपा हुई तो भगवत की कृपा हो गई और भगवान की राम की कृपा हुई तो दासी पुत्र से हम ब्रह्मपुत्र नारद बन गए। इसी प्रकार रावण के भाई विभीषण पर भगवान राम की कृपा हुई तो वह राजा बन गया।
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