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डेंगू का डंक: स्वास्थ्य मंत्री के आदेश बेअसर, नहीं डालीं मछलियां
ब्यूरो, अमर उजाला/पंचकूला
Updated Fri, 29 Jul 2016 01:32 AM IST
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पंचकूला का फाउंटेन
- फोटो : अमर उजाला
मत्स्य विभाग की लापरवाही पंचकूला के लोगों के लिए जानलेवा साबित हो सकती है। स्वास्थ्य मंत्री अनिल विज की ओर से निर्देश के बाद भी विभाग द्वारा इसका पालन नहीं किया गया है। बीते साल पंचकूला में 193 डेंगू के मामले आए थे। चंडीगढ़ में इस साल अब तक दो मामले सामने आ चुके हैं। इससे कहा जा सकता है कि डेंगू के सीजन की शुरुआत हो चुकी है।
इसी को ध्यान में रखते हुए स्वास्थ्य मंत्री और जिला प्रशासन ने डेंगू से बचाव के लिए पार्कों के पौंड में गंबुजिया मछली डालने के आदेश दिए थे, लेकिन मत्स्य विभाग अब तक मछलियां नहीं डाल सका है। वास्तव में यह गंबुजिया मछली डेंगू और मलेरिया के लारवा को खाती हैं।
जिले के ग्रामीण और शहरी इलाकों के पार्कों के पौंड में विशेष प्रकार की गंबुजिया मछली डालने के आदेश दिए गए थे पर अब तक नहीं डाली जा सकी हैं। गंबुजिया मछली एक जगह एकत्रित पानी में डाली जाती हैं। बीते पांच वर्षों के डेंगू के आंकड़ों पर गौर करें तो 2015 में सबसे ज्यादा मामले सामने आए थे। अमर उजाला की लाइव रिपोर्ट में विभाग की लापरवाही का खुलासा हुआ है।
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स्वास्थ्य मंत्री और डीसी ने दिए थे आदेश
स्वास्थ्य मंत्री अनिल विज ने अप्रैल में मच्छर जनित रोगों की रोकथाम के लिए आयोजित मीटिंग में मत्स्य विभाग के अधिकारियों को जिले के ऐसे पौंड जहां साफ पानी एकत्रित होता है, उसमें गंबुजिया मछली डालने के निर्देश दिए थे। उनके आदेश का अब तक विभाग ने पालन नहीं किया। इसके बाद पंचकूला की डीसी डॉ. गरिमा मित्तल ने मई में विभाग को कहा था, लेकिन उसके बाद भी जिले के करीब 90 प्रतिशत पौंड में गंबुजिया मछली नहीं डाली गईं हैं।
इन जगहों पर डाली जानी थी मछलियां
पंचकूला इंडस्ट्रियल एरिया फेस-1 स्थित हुडा नर्सरी
पंचकूला का सेंट जेवियर्स स्कूल
सेक्टर-5 का कैक्टस गार्डन
निर्झर वाटिका, नाडा साहिब
शहर और ग्रामीण इलाकों के पौंड
क्या है गंबुजिया मछली
एक रिसर्च में खुलासा हुआ है कि गंबुजिया मछली उन मच्छरों को खाना पसंद करती हैं, जिनके द्वारा जापानी बुखार, मलेरिया व फाइलेरिया की बीमारी फैलती है। मच्छरों के लारवा को यह खा जाती है। इसके लिए पिंजौर और पंचकूला में हैचरी बनाई गई है। एक दिन में यह मछली मच्छरों के 100 से 300 लारवा खाती है। मछली तीन से छह माह के बीच 900 से 1200 अंडे देती है। इसकी लाइफ पांच वर्ष होती है। यह मछली किसी भी माहौल में जीवित रह सकती है। शून्य डिग्री के तापमान पर भी यह जीवित रहती है।
बीते चार साल के डेंगू के आंकड़े
वर्ष डेंगू के केस
2015 195
2014 1
2013 56
2012 120
कोट्स
मत्स्य विभाग को जिले के अर्बन और रूरल एरिया के पार्कों में बने पौंड में गंबुजिया मछली डालने के निर्देश दिए गए थे। अगर मछलियां नहीं डाली गई हैं तो शुक्रवार को जिला फिसरी ऑफिसर को निर्देश दिया जाएगा कि वे तत्काल मछलियां डलवाएं।
-डॉ. गरिमा मित्तल, उपायुक्त पंचकूला।
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इसी को ध्यान में रखते हुए स्वास्थ्य मंत्री और जिला प्रशासन ने डेंगू से बचाव के लिए पार्कों के पौंड में गंबुजिया मछली डालने के आदेश दिए थे, लेकिन मत्स्य विभाग अब तक मछलियां नहीं डाल सका है। वास्तव में यह गंबुजिया मछली डेंगू और मलेरिया के लारवा को खाती हैं।
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जिले के ग्रामीण और शहरी इलाकों के पार्कों के पौंड में विशेष प्रकार की गंबुजिया मछली डालने के आदेश दिए गए थे पर अब तक नहीं डाली जा सकी हैं। गंबुजिया मछली एक जगह एकत्रित पानी में डाली जाती हैं। बीते पांच वर्षों के डेंगू के आंकड़ों पर गौर करें तो 2015 में सबसे ज्यादा मामले सामने आए थे। अमर उजाला की लाइव रिपोर्ट में विभाग की लापरवाही का खुलासा हुआ है।
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स्वास्थ्य मंत्री और डीसी ने दिए थे आदेश
स्वास्थ्य मंत्री अनिल विज ने अप्रैल में मच्छर जनित रोगों की रोकथाम के लिए आयोजित मीटिंग में मत्स्य विभाग के अधिकारियों को जिले के ऐसे पौंड जहां साफ पानी एकत्रित होता है, उसमें गंबुजिया मछली डालने के निर्देश दिए थे। उनके आदेश का अब तक विभाग ने पालन नहीं किया। इसके बाद पंचकूला की डीसी डॉ. गरिमा मित्तल ने मई में विभाग को कहा था, लेकिन उसके बाद भी जिले के करीब 90 प्रतिशत पौंड में गंबुजिया मछली नहीं डाली गईं हैं।
इन जगहों पर डाली जानी थी मछलियां
पंचकूला इंडस्ट्रियल एरिया फेस-1 स्थित हुडा नर्सरी
पंचकूला का सेंट जेवियर्स स्कूल
सेक्टर-5 का कैक्टस गार्डन
निर्झर वाटिका, नाडा साहिब
शहर और ग्रामीण इलाकों के पौंड
क्या है गंबुजिया मछली
एक रिसर्च में खुलासा हुआ है कि गंबुजिया मछली उन मच्छरों को खाना पसंद करती हैं, जिनके द्वारा जापानी बुखार, मलेरिया व फाइलेरिया की बीमारी फैलती है। मच्छरों के लारवा को यह खा जाती है। इसके लिए पिंजौर और पंचकूला में हैचरी बनाई गई है। एक दिन में यह मछली मच्छरों के 100 से 300 लारवा खाती है। मछली तीन से छह माह के बीच 900 से 1200 अंडे देती है। इसकी लाइफ पांच वर्ष होती है। यह मछली किसी भी माहौल में जीवित रह सकती है। शून्य डिग्री के तापमान पर भी यह जीवित रहती है।
बीते चार साल के डेंगू के आंकड़े
वर्ष डेंगू के केस
2015 195
2014 1
2013 56
2012 120
कोट्स
मत्स्य विभाग को जिले के अर्बन और रूरल एरिया के पार्कों में बने पौंड में गंबुजिया मछली डालने के निर्देश दिए गए थे। अगर मछलियां नहीं डाली गई हैं तो शुक्रवार को जिला फिसरी ऑफिसर को निर्देश दिया जाएगा कि वे तत्काल मछलियां डलवाएं।
-डॉ. गरिमा मित्तल, उपायुक्त पंचकूला।