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शामलात भूमि मामले में कैबिनेट की सब कमेटी बनाने की मांग
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चंडीगढ़। भाजपा नेता व मुख्यमंत्री के पूर्व मीडिया सलाहकार राजीव जैन ने पत्र लिखकर मुख्यमंत्री मनोहर लाल से मांग की कि सुप्रीम कोर्ट द्वारा शामलात भूमि को पंचायतों एवं स्थानीय निकायों की मलकीयत घोषित करने के निर्णय को लागू करने के लिए केबिनेट की सब कमेटी बनाई जाए। जैन ने मांग की कि पूर्व में शामलात भूमि की रजिस्ट्री करवाने वाले या ऐसी भूमि पर घर बनाकर रह रहे नागरिकों को ध्यान में रखते हुए उनके हितों का नुकसान न होना सुनिश्चित किया जाए। उन्होंने सुझाव दिया कि शामलात जमीनों की रजिस्ट्री करवा चुके या फिर मकान बनाकर रह रहे नागरिकों से निर्धारित शुल्क लेकर जमीन उनको देने की नीति बनाई जा सकती है।
राजीव जैन ने अपने पत्र में लिखा कि सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले से ऐसे हजारों नागरिक चिंतित हैं, जिन्होंने वर्षों पहले शामलात जमीन की रजिस्ट्री अपने नाम नियमानुसार करवा ली थी या फिर शामलात की जमीनों पर मकान बनाकर अपनी जीवनभर की पूंजी लगा दी। शामलात जमीन के हिस्सेदार तो जमीन बेच कर चले गए, अब रजिस्ट्री के लिए खर्च की गई राशि का क्या होगा। इन सब मुद्दों को लेकर राहत देने वाली नीति बनानी जरूरी है। भाजपा नेता ने कहा कि सरकार सुप्रीम कोर्ट के फैसले को अक्षरश: लागू करती हैं तो पूरे प्रदेश में विवाद खड़े हो जाएंगे। इसलिए सरकार को प्रभावित लोगों से बात करके सर्वमान्य हल निकालना चाहिए।
गौरतलब है कि वर्ष 1999 में तत्कालीन हरियाणा सरकार ने अधिसूचना जारी करके पंजाब कॉमन विलेज एक्ट में संशोधन करते हुए शामलात की जमीन अपने नाम कर ली थी चाहे व शहर में हो या गांव में। सरकार के इस निर्णय के खिलाफ प्रभावित व्यक्तियों ने हाईकोर्ट की शरण ली और हाईकोर्ट ने वर्ष 2016 में सरकार के फैसले को गलत ठहरा दिया। इसके बाद सरकार ने सुप्रीम कोर्ट का रुख किया और हाल ही में सुप्रीम कोर्ट ने हाईकोर्ट के फैसले को गलत ठहराते हुए सरकार के 1999 में किए गए अध्यादेश को सही माना।
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राजीव जैन ने अपने पत्र में लिखा कि सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले से ऐसे हजारों नागरिक चिंतित हैं, जिन्होंने वर्षों पहले शामलात जमीन की रजिस्ट्री अपने नाम नियमानुसार करवा ली थी या फिर शामलात की जमीनों पर मकान बनाकर अपनी जीवनभर की पूंजी लगा दी। शामलात जमीन के हिस्सेदार तो जमीन बेच कर चले गए, अब रजिस्ट्री के लिए खर्च की गई राशि का क्या होगा। इन सब मुद्दों को लेकर राहत देने वाली नीति बनानी जरूरी है। भाजपा नेता ने कहा कि सरकार सुप्रीम कोर्ट के फैसले को अक्षरश: लागू करती हैं तो पूरे प्रदेश में विवाद खड़े हो जाएंगे। इसलिए सरकार को प्रभावित लोगों से बात करके सर्वमान्य हल निकालना चाहिए।
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गौरतलब है कि वर्ष 1999 में तत्कालीन हरियाणा सरकार ने अधिसूचना जारी करके पंजाब कॉमन विलेज एक्ट में संशोधन करते हुए शामलात की जमीन अपने नाम कर ली थी चाहे व शहर में हो या गांव में। सरकार के इस निर्णय के खिलाफ प्रभावित व्यक्तियों ने हाईकोर्ट की शरण ली और हाईकोर्ट ने वर्ष 2016 में सरकार के फैसले को गलत ठहरा दिया। इसके बाद सरकार ने सुप्रीम कोर्ट का रुख किया और हाल ही में सुप्रीम कोर्ट ने हाईकोर्ट के फैसले को गलत ठहराते हुए सरकार के 1999 में किए गए अध्यादेश को सही माना।
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