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शिअद में सब ठीक नहीं: फतेहगढ़ साहिब में फिर उठी सुखबीर सिंह बादल के इस्तीफे की मांग

Mon, 01 Aug 2022 01:25 AM IST
पंजाब ब्‍यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, श्री फतेहगढ़ साहिब (पंजाब)
संवाद न्यूज एजेंसी, श्री फतेहगढ़ साहिब (पंजाब) Published by: पंजाब ब्‍यूरो Updated Mon, 01 Aug 2022 01:25 AM IST
सार

कार्यकर्ताओं ने पार्टी में परिवारवाद का पूर्ण प्रभुत्व, पारदर्शिता के साथ उम्मीदवारों का चयन न करना, डेरा सिरसा प्रमुख को माफी देने जैसे फैसलों को हार के लिए जिम्मेदार बताया था। अकाली नेताओं ने कहा कि अकाली दल को पुनर्जीवित करने के लिए स्वच्छ छवि वाले ईमानदार अकाली नेता को राज्य स्तर की कार्यसमिति का चयन कर लोकतांत्रिक प्रक्रिया से पार्टी की बागडोर दी जाए।

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Demand for resignation of Sukhbir Badal arose again in Fatehgarh Sahib
सुखबीर सिंह बादल। - फोटो : फाइल

विस्तार

शिरोमणि अकाली दल के प्रधान सुखबीर सिंह बादल के पार्टी अध्यक्ष पद पर बने रहने के फैसले के खिलाफ फतेहगढ़ साहिब के टकसाली अकाली कार्यकर्ता लामबंद हो गए हैं।

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रविवार को गुरुद्वारा श्री फतेहगढ़ साहिब में पुराने अकाली नेताओं ने एक बैठक कर सुखबीर बादल के इस्तीफे की मांग की है। पत्रकार वार्ता के दौरान अकाली नेता एवं नगर परिषद के पूर्व अध्यक्ष शेर सिंह, शिरोमणि समिति के पूर्व सदस्य जस्सा सिंह अहलूवालिया और जिला बलजीत सिंह भूटा, पूर्व अध्यक्ष परिषद ने कहा कि अकाली दल को उनके बुजुर्ग सिख समुदाय और पंजाब के हितों के लिए मोर्चा बनाकर अस्तित्व में लाए थे लेकिन प्रकाश सिंह बादल ने पार्टी के सांप्रदायिक सिद्धांतों से किनारा कर लिया और आंखें मूंदते हुए अपने बेटे सुखबीर बादल को पार्टी का अध्यक्ष नियुक्त कर दिया।
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उनके नेतृत्व में अकाली दल 2019 के संसदीय चुनाव में हारा। इसके बाद 2022 के विधानसभा चुनाव में आप ने राज्यव्यापी जीत हासिल की। इकबाल सिंह झुंदा के नेतृत्व में हार की समीक्षा के लिए पंजाब में एक समिति बनी थी, जिसने सूबे में जाकर अकाली कार्यकर्ताओं के सुझाव लिए थे।
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कार्यकर्ताओं ने पार्टी में परिवारवाद का पूर्ण प्रभुत्व, पारदर्शिता के साथ उम्मीदवारों का चयन न करना, डेरा सिरसा प्रमुख को माफी देने जैसे फैसलों को हार के लिए जिम्मेदार बताया था।


अकाली नेताओं ने कहा कि अकाली दल को पुनर्जीवित करने के लिए स्वच्छ छवि वाले ईमानदार अकाली नेता को राज्य स्तर की कार्यसमिति का चयन कर लोकतांत्रिक प्रक्रिया से पार्टी की बागडोर दी जाए।

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