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फरमान : माता मनसा देवी में जींस व छोटे कपड़े पहनकर आने पर पाबंदी, मंदिर बोर्ड की सचिव शारदा प्रजापति ने दी जानकारी, श्रद्धालुओं की शिकायत के बाद लिया फैसला
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पंचकूला। माता मनसा देवी मंदिर में अब छोटे कपड़े व जींस पहनकर आने पर पाबंदी लगा दी गई है। मंदिर बोर्ड की सचिव शारदा प्रजापति ने बताया कि श्रद्धालुओं की शिकायत मिलने पर यह फैसला लिया गया है। उधर, श्री माता मनसा देवी पूजा स्थल बोर्ड के प्रशासक एवं डीसी विनय प्रताप सिंह का कहना है कि इस तरह का कोई फैसला बोर्ड ने नहीं लिया है।
सचिव शारदा प्रजापति का कहना है कि धर्म की मर्यादा एवं संस्कृति का पालन करवाने के लिए यह फैसला लिया गया है। बच्चों को संस्कारित करने के लिए अब छोटे कपड़े और जींस पहनकर मंदिर में प्रवेश नहीं करने दिया जाएगा। जो लोग यह सोचते हैं कि कपड़ों से कोई फर्क नहीं पड़ता, शायद उनको फर्क ना पड़ता हो, लेकिन मंदिर में जो दूसरे लोग आते हैं उन्हें छोटे कपड़े देखकर काफी आपत्ति होती है। सचिव शारदा प्रजापति ने बताया कि कई लोग शिकायत लेकर आए कि मंदिर में मर्यादाओं का पालन होना चाहिए। गुरुद्वारों में तो सिर भी ढककर जाना होता है, लेकिन मंदिर में छोटे कपड़े पहनकर आने की इजाजत देना गलत है। उन्होंने युवाओं से अपील की है कि वह छोटे कपड़े पहनकर न आएं।
माता मनसा देवी मंदिर को श्राइन बोर्ड चला रहा है। सभी नियम और कानून बोर्ड निर्धारित करता है। बोर्ड सचिव की यह निजी राय हो सकती है। बोर्ड ने कोई कानून नहीं बनाया है और ना ही इस तरह का कोई फैसला लिया है। - विनय प्रताप सिंह, डीसी एवं प्रशासक श्री माता मनसा देवी पूजा स्थल बोर्ड
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यह कहना है लोगों का
महिलाओं को धर्म के नाम पर ना बांटा जाए। धर्म में महिलाओं का स्थान बहुत उच्च् है। उसे जगत जननी का दर्जा मिला हुआ। इस तरह का फैसला बिल्कुल गलत है। आज के समय में हर कोई बुद्धिमान है। उसे ज्ञात है कि क्या पहनना और खाना चाहिए। - सीमा चौधरी, महिला जिला प्रधान इनलो
इस तरह का फैसला उचित नहीं है। ये मौलिक अधिकारों का हनन है। हम स्वतंत्र देश के नागरिक हैं। बोर्ड सचिव को अपना फैसला तत्काल वापस लेना चाहिए। - सुनील वशिष्ठ, प्रधान आरडब्ल्यूए सेक्टर-15
यह फैसला तुगलकी फरमान है। आज के दौर में हम किसी को बाध्य नहीं कर सकते हैं कि उसे क्या पहनना चाहिए और क्या नहीं। यह फैसला लोगों को आहत करने वाला है। - योगेंद्र क्वात्रा, वरिष्ठ उपप्रधान सेक्टर-20
माता मनसा देवी बोर्ड की सचिव द्वारा जो निर्णय लिया गया है उससे मैं काफी हद तक सहमत हूं। मुझे लगता है कि निर्णय सोच समझकर ही लिया गया होगा। हर धार्मिक स्थल की मर्यादा है। इसलिए श्रद्धालुओं को भी ध्यान रखना चाहिए। - राजेश कुमार, निवासी एमडीसी सेक्टर-6
मुझको लगता है कि धार्मिक आस्था से जुड़े मामलों में ज्यादा दखलंदाजी नहीं होनी चाहिए। इसलिए जो बोर्ड का फैसला है वो ठीक ही होगा।
अनुराग शर्मा निवासी सेक्टर 26
ऐतिहासिक मंदिर में देशभर से आते हैं श्रद्धालु
माता मनसा देवी के सिद्ध शक्तिपीठ पर बने मंदिर का निर्माण मनीमाजरा के राजा गोपाल सिंह ने अपनी मनोकामना पूरी होने पर आज से लगभग पौने दो सौ साल पहले अपनी देखरेख में सन् 1815 में पूर्ण करवाया था। मुख्य मंदिर में माता की मूर्ति स्थापित है। मूर्ति के आगे तीन पिंडियां हैं, जिन्हें मां का स्वरूप ही माना जाता है। ये तीनों पिंडियां महालक्ष्मी, मनसा देवी और सरस्वती देवी के नाम से जानी जाती हैं। मंदिर की परिक्रमा पर गणेश, हनुमान, द्वारपाल, वैष्णवी देवी, भैरव की मूर्तियां और शिवलिंग स्थापित हैं। हरियाणा सरकार ने माता मनसा देवी मंदिर परिसर को 9 सितंबर 1991 को माता मनसा देवी पूजा स्थल बोर्ड का गठन करके अपने हाथों में लिया।
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सचिव शारदा प्रजापति का कहना है कि धर्म की मर्यादा एवं संस्कृति का पालन करवाने के लिए यह फैसला लिया गया है। बच्चों को संस्कारित करने के लिए अब छोटे कपड़े और जींस पहनकर मंदिर में प्रवेश नहीं करने दिया जाएगा। जो लोग यह सोचते हैं कि कपड़ों से कोई फर्क नहीं पड़ता, शायद उनको फर्क ना पड़ता हो, लेकिन मंदिर में जो दूसरे लोग आते हैं उन्हें छोटे कपड़े देखकर काफी आपत्ति होती है। सचिव शारदा प्रजापति ने बताया कि कई लोग शिकायत लेकर आए कि मंदिर में मर्यादाओं का पालन होना चाहिए। गुरुद्वारों में तो सिर भी ढककर जाना होता है, लेकिन मंदिर में छोटे कपड़े पहनकर आने की इजाजत देना गलत है। उन्होंने युवाओं से अपील की है कि वह छोटे कपड़े पहनकर न आएं।
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माता मनसा देवी मंदिर को श्राइन बोर्ड चला रहा है। सभी नियम और कानून बोर्ड निर्धारित करता है। बोर्ड सचिव की यह निजी राय हो सकती है। बोर्ड ने कोई कानून नहीं बनाया है और ना ही इस तरह का कोई फैसला लिया है। - विनय प्रताप सिंह, डीसी एवं प्रशासक श्री माता मनसा देवी पूजा स्थल बोर्ड
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यह कहना है लोगों का
महिलाओं को धर्म के नाम पर ना बांटा जाए। धर्म में महिलाओं का स्थान बहुत उच्च् है। उसे जगत जननी का दर्जा मिला हुआ। इस तरह का फैसला बिल्कुल गलत है। आज के समय में हर कोई बुद्धिमान है। उसे ज्ञात है कि क्या पहनना और खाना चाहिए। - सीमा चौधरी, महिला जिला प्रधान इनलो
इस तरह का फैसला उचित नहीं है। ये मौलिक अधिकारों का हनन है। हम स्वतंत्र देश के नागरिक हैं। बोर्ड सचिव को अपना फैसला तत्काल वापस लेना चाहिए। - सुनील वशिष्ठ, प्रधान आरडब्ल्यूए सेक्टर-15
यह फैसला तुगलकी फरमान है। आज के दौर में हम किसी को बाध्य नहीं कर सकते हैं कि उसे क्या पहनना चाहिए और क्या नहीं। यह फैसला लोगों को आहत करने वाला है। - योगेंद्र क्वात्रा, वरिष्ठ उपप्रधान सेक्टर-20
माता मनसा देवी बोर्ड की सचिव द्वारा जो निर्णय लिया गया है उससे मैं काफी हद तक सहमत हूं। मुझे लगता है कि निर्णय सोच समझकर ही लिया गया होगा। हर धार्मिक स्थल की मर्यादा है। इसलिए श्रद्धालुओं को भी ध्यान रखना चाहिए। - राजेश कुमार, निवासी एमडीसी सेक्टर-6
मुझको लगता है कि धार्मिक आस्था से जुड़े मामलों में ज्यादा दखलंदाजी नहीं होनी चाहिए। इसलिए जो बोर्ड का फैसला है वो ठीक ही होगा।
अनुराग शर्मा निवासी सेक्टर 26
ऐतिहासिक मंदिर में देशभर से आते हैं श्रद्धालु
माता मनसा देवी के सिद्ध शक्तिपीठ पर बने मंदिर का निर्माण मनीमाजरा के राजा गोपाल सिंह ने अपनी मनोकामना पूरी होने पर आज से लगभग पौने दो सौ साल पहले अपनी देखरेख में सन् 1815 में पूर्ण करवाया था। मुख्य मंदिर में माता की मूर्ति स्थापित है। मूर्ति के आगे तीन पिंडियां हैं, जिन्हें मां का स्वरूप ही माना जाता है। ये तीनों पिंडियां महालक्ष्मी, मनसा देवी और सरस्वती देवी के नाम से जानी जाती हैं। मंदिर की परिक्रमा पर गणेश, हनुमान, द्वारपाल, वैष्णवी देवी, भैरव की मूर्तियां और शिवलिंग स्थापित हैं। हरियाणा सरकार ने माता मनसा देवी मंदिर परिसर को 9 सितंबर 1991 को माता मनसा देवी पूजा स्थल बोर्ड का गठन करके अपने हाथों में लिया।