फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Chandigarh ›   Panchkula News ›   अपहरण मामले में आरोपी बरी

अपहरण मामले में आरोपी बरी

Fri, 14 Sep 2018 01:40 AM IST
Updated Fri, 14 Sep 2018 01:40 AM IST
विज्ञापन
अपहरण मामले में आरोपी बरी
करोड़ों के वैट घोटाले में दो और कमीशनखोर गिरफ्तार, सर्वर जब्त
विज्ञापन

सबहेड
संदेह के दायरे में आए एक दर्जन से अधिक लोगों से पूछताछ, कई और की हो सकती है गिरफ्तारी

किस कर्मचारी की ईआईडी और पासवर्ड से हुई फर्जी एंट्री, जांच जारी

अमर उजाला ब्यूरो
चंडीगढ़। करोड़ों रुपये के वैट घोटाले में इंडो स्विफ्ट कंपनी के पूर्व अकाउंटेंट विपिन मिश्रा ने गिरफ्तारी के बाद कई खुलासे किए हैं, जिसके बाद विजिलेंस टीम ने विभिन्न कंपनियों और एक्साइज विभाग के कर्मचारियों के बीच सेटिंग करवाने वाले दो और कमीशनखोरों को वीरवार को गिरफ्तार कर लिया। इनमें खरड़ निवासी रामतीर्थ और अंकित शामिल हैं। दोनों वही एजेंट हैं, जिन्होंने करीब सौ करोड़ रुपये से अधिक के इस घोटाले में करीब तीन साल से अधिक समय तक बिचौलिये की भूमिका निभाई। दोनों आरोपी सालों से एक्साइज विभाग के कई कर्मचारियों से जुड़े रहे और अब उन पर विजिलेंस, यूटी पुलिस नजर गड़ा चुकी है। एक्साइज विभाग के कर्मचारी भी खुद को पाक-साफ बनाए रखने के लिए इन्हीं दोनों आरोपियों को बतौर मीडिल मैन के तौर पर इस्तेमाल करते रहे। विजिलेंस जांच में सामने आया कि आरोपी अंकित और रामतीर्थ हर डील को सेटल करवाने की मोटी रकम लेते थे। कंपनियों के वैट का करोड़ों रुपये का जुर्माना छुड़वाने के लिए डील सेटल करवाने के एवज में जो पैसा आरोपियों को दिया गया, वह उन्हें हार्ड कैश के रूप में मिला या फिर उनके बैंक खातों में जमा कराया गया, इस बाबत पूछताछ जारी है। विजिलेंस टीम आरोपियों के बैंक खातों का रिकॉर्ड भी खंगालेगी। वीरवार को एक्साइज विभाग के कई कर्मचारी और अधिकारियों को विजिलेंस की जांच टीम ने पूछताछ के लिए सेक्टर-9 विजिलेंस ऑफिस बुलाया। संदेह के दायरे में आए कर्मचारियों से अलग-अलग पुलिसकर्मियों ने अलग-अलग बैठा कर पूछताछ की। आगामी दिनों में भी विजिलेंस टीम की जांच और पूछताछ पूरी सरगर्मी से जारी रहेगी।

सर्वर में कैद करोड़ों का घोटाला, जांच को भेजा सीएफएसएल
विजिलेंस टीम ने एक्साइज विभाग के सर्वर को भी जब्त किया है। सर्वर को जांच के लिए सीएफएसएल-36 भेज दिया है। ताकि प्रमाणिक तौर पर पता लग सके कि विभिन्न कंपनियों के वैट का करोड़ों रुपये का जुर्माना महज पांच हजार व इससे भी कम में कैसे सेटल किया गया। साथ ही फर्जी एंट्री के लिए कंप्यूटर सिस्टम को किन कर्मचारियों के इंप्लाई आईडी और पासवर्ड से खोला गया। बीते करीब तीन साल से भी अधिक समय तक जारी रहे इस घोटाले की जांच विजिलेंस टीम शुरूआती चरण से करने में जुटी है ताकि समय-समय पर काबिज रहे किन-किन डीलिंग हेड कर्मचारियों के समय पर सरकार को करोड़ों रुपये का चूना लगाया गया, इसका पता लग सके। तत्कालीन समय जिम्मेदार रहे अधिकारियों से भी विजिलेंस टीम पूछताछ करेगी ताकि पता लग सके कि अधिकारियों ने आरोपी कंपनियों से जुड़ी फाइल कैसे पास कर दी।
विज्ञापन

जल्द ही फंसेंगे एक्साइज विभाग के कई बाबू और बिचौलिए
विजिलेंस जांच को पैना करते हुए रोजाना सुबह से देर रात तक एक्साइज विभाग के रिकॉर्ड को खंगालने में जुटी रही ताकि मिलीभगत से की गई गड़बड़ को जड़ तक उजागर किया जा सके। सूत्रों के मुताबिक आगामी दिनों में कई अन्य बिचौलिए और एक्साइज विभाग के कई बाबू भी विजिलेंस टीम की गिरफ्त में फंसेंगे। विजिलेंस टीम ने वीरवार को कंपनी इंडो स्विफ्ट के पूर्व अकाउंटेंट गिरफ्तार आरोपी विपिन मिश्रा और अन्य दोनों कमीशनखोरों आरोपी रामतीर्थ और अंकित से पहले अलग-अलग पूछताछ की। फिर तीनों आरोपियों को आमने-सामने बैठाकर पूछताछ की गई। इस दौरान आरोपियों के परिजन और अन्य करीबी लोग भी उनसे मिलने के लिए सेक्टर-9 विजिलेंस ऑफिस पहुंचे। लेकिन अधिकारियों ने उन्हें भी अधिक समय नहीं दिया।
विज्ञापन
विज्ञापन


सीए व डाटा एंट्री ऑपरेटर की भूमिका की जांच
विजिलेंस टीम करीब एक सौ करोड़ के इस घोटाले से एक्साइज विभाग के किसी भी कर्मचारी और अधिकारी के पाक-साफ होने की बात नहीं कह रही है। घोटाले में कितनी संख्या में आरोपी शामिल हैं, इसकी भी फिलहाल कोई गिनती नहीं है। जांच टीम के सदस्य घोटाले में सीए और डाटा एंट्री ऑपरेटर की भूमिका की जांच करने में जुटे हैं। लेकिन फिलहाल उनमें से किसी को गिरफ्तार नही किया गया है। विजिलेंस टीम प्रमाणिक और पुख्ता सुबूत हाथ आने पर ही उन्हें गिरफ्तार कर सकती है। घोटाले के उजागर होने पर करीब एक हजार कंपनियों का रिकॉर्ड खंगाला गया। इनमें से करीब तीस कंपनियों ने पूरी पेनल्टी देकर उनके मामले को सेटल किया। इससे प्रशासन को रोड़ों रुपये रेवेन्यू भी वसूल हुआ है।


ऐसे हुआ था भंडाफोड़
बीती 17 जुलाई 2018 को यूटी प्रशासन में वैट ट्रिब्यूनल कोर्ट लगी। उस दौरान एक्साइज विभाग ने कंपनी मैसर्ज इंडो स्विफ्ट का वैट अमाउंट स्क्रूटनी के बाद पांच करोड़, 90 लाख 54 हजार व 342 रुपये बताया। लेकिन कंपनी की तरफ से पहुंचे एडवोकेट ने 31 मार्च 2015 को ही मामले का निपटारा होने की बात कही। बताया गया कि एक्साइज विभाग ने महज पांच हजार रुपये का टैक्स वसूल उनका चालान किया है। करोड़ों रुपये का टैक्स महज पांच हजार रुपये में निपटने पर एडवाइजर परिमल राय ने एक्शन लेते हुए विजिलेंस, यूटी को मामले की तह तक जांच के निर्देश दिए थे।
विज्ञापन
विज्ञापन
सबसे विश्वसनीय Hindi News वेबसाइट अमर उजाला पर पढ़ें हर राज्य और शहर से जुड़ी क्राइम समाचार की
ब्रेकिंग अपडेट।
 
रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें अमर उजाला हिंदी न्यूज़ APP अपने मोबाइल पर।
Amar Ujala Android Hindi News APP Amar Ujala iOS Hindi News APP
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed