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छत्तीसगढ़ में कोयले की खदान को फिर से किया जाएगा शुरू : मान
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चंडीगढ़। पंजाब में चल रहे बिजली संकट के बीच आप प्रवक्ता मलविंदर सिंह कंग ने दावा किया है कि छत्तीसगढ़ में कोयले की खदान को फिर से शुरू किया जाएगा। इससे राज्य को प्रतिवर्ष 70 लाख मीट्रिक टन कोयला मिल सकेगा। इसके साथ ही पंजाब सरकार सौर ऊर्जा को लेकर भी बड़ा काम कर रही है, जल्द ही इसकी शुरुआत की जाएगी।
चंडीगढ़ स्थित पार्टी मुख्यालय में शनिवार को आप के प्रवक्ता मलविंदर सिंह कंग ने कहा कि पिछले 108 साल में इस साल गर्मी ने सभी रिकॉर्ड तोड़ दिए हैं। इस कारण इस साल अप्रैल और मई महीने में 40 से 45 प्रतिशत बिजली की मांग बढ़ी गई है, जो कि औसतन 10900 मेगावाट है। पिछले साल इन दोनों महीनों में बिजली की खपत 6500 मेगावाट की थी। कंग ने कहा कि मुख्यमंत्री भगवंत मान और ऊर्जा मंत्री पंजाब में बिजली की मांग पूरी करने लिए दिन रात काम कर रहे हैं और लगातार योजनाएं बना रहे हैं। पंजाब में आने वाले समय में बिजली की कोई कमी नहीं होगी।
उन्होंने कहा कि धान की बिजाई के सीजन में बिजली की खपत हर साल बढ़ जाती है, लेकिन सरकार किसानों को धान की फसल के लिए बिजली की कोई कमी नहीं होने देगी। मुख्यमंत्री इस पूरे मामले को लेकर बेहद गंभीर है और वह खुद नजर बनाए हुए हैं। कंग ने आरोप लगाते हुए कहा कि पिछली कांग्रेस सरकार ने बठिंडा के 4 और रोपड़ के 2 थर्मल प्लांट बंद करवा कर पंजाब में बिजली पैदा करने के स्रोत खत्म कर दिए जबकि इन प्लांटों से 800 मेगावाट बिजली उत्पन्न होती थी। इसका खामियाजा अब पंजाब की जनता को उठाना पड़ रहा है। उन्होंने कहा कि गुजरात के मुद्रा थर्मल प्लांट जिससे पंजाब समेत पांच राज्यों को बिजली मिलती थी वह भी वर्ष 2018 से बंद पड़ा है। इस थर्मल प्लांट से पंजाब को 475 मेगावाट बिजली मिलती थी जिसे पिछली सरकार ने बंद कर दिया था। इसके अलावा छत्तीसगढ़ के पछवाड़ा में कोयले की खदान जो पंजाब को 2001 में अलॉट हुई थी उसे भी 2015 से किसी भी सरकार ने चलाने की कोशिश नहीं की।
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कंग ने कहा कि इस खदान से सालाना 70 लाख मीट्रिक टन कोयला मिलता है। मुख्यमंत्री भगवंत मान ने खदान को दोबारा शुरू करने का फैसला लिया है। जून के आखिरी हफ्ते तक इस खदान में काम शुरू हो जाएगा। खदान के शुरू होने के उपरांत पंजाब को सस्ता कोयला मिलेगा और सरकार को 500 से 600 करोड़ रुपये की बचत भी होगी।
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चंडीगढ़ स्थित पार्टी मुख्यालय में शनिवार को आप के प्रवक्ता मलविंदर सिंह कंग ने कहा कि पिछले 108 साल में इस साल गर्मी ने सभी रिकॉर्ड तोड़ दिए हैं। इस कारण इस साल अप्रैल और मई महीने में 40 से 45 प्रतिशत बिजली की मांग बढ़ी गई है, जो कि औसतन 10900 मेगावाट है। पिछले साल इन दोनों महीनों में बिजली की खपत 6500 मेगावाट की थी। कंग ने कहा कि मुख्यमंत्री भगवंत मान और ऊर्जा मंत्री पंजाब में बिजली की मांग पूरी करने लिए दिन रात काम कर रहे हैं और लगातार योजनाएं बना रहे हैं। पंजाब में आने वाले समय में बिजली की कोई कमी नहीं होगी।
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उन्होंने कहा कि धान की बिजाई के सीजन में बिजली की खपत हर साल बढ़ जाती है, लेकिन सरकार किसानों को धान की फसल के लिए बिजली की कोई कमी नहीं होने देगी। मुख्यमंत्री इस पूरे मामले को लेकर बेहद गंभीर है और वह खुद नजर बनाए हुए हैं। कंग ने आरोप लगाते हुए कहा कि पिछली कांग्रेस सरकार ने बठिंडा के 4 और रोपड़ के 2 थर्मल प्लांट बंद करवा कर पंजाब में बिजली पैदा करने के स्रोत खत्म कर दिए जबकि इन प्लांटों से 800 मेगावाट बिजली उत्पन्न होती थी। इसका खामियाजा अब पंजाब की जनता को उठाना पड़ रहा है। उन्होंने कहा कि गुजरात के मुद्रा थर्मल प्लांट जिससे पंजाब समेत पांच राज्यों को बिजली मिलती थी वह भी वर्ष 2018 से बंद पड़ा है। इस थर्मल प्लांट से पंजाब को 475 मेगावाट बिजली मिलती थी जिसे पिछली सरकार ने बंद कर दिया था। इसके अलावा छत्तीसगढ़ के पछवाड़ा में कोयले की खदान जो पंजाब को 2001 में अलॉट हुई थी उसे भी 2015 से किसी भी सरकार ने चलाने की कोशिश नहीं की।
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कंग ने कहा कि इस खदान से सालाना 70 लाख मीट्रिक टन कोयला मिलता है। मुख्यमंत्री भगवंत मान ने खदान को दोबारा शुरू करने का फैसला लिया है। जून के आखिरी हफ्ते तक इस खदान में काम शुरू हो जाएगा। खदान के शुरू होने के उपरांत पंजाब को सस्ता कोयला मिलेगा और सरकार को 500 से 600 करोड़ रुपये की बचत भी होगी।