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Chandigarh: वेश्यावृत्ति मामले में ग्राहक भी बराबर जिम्मेदार, दर्ज एफआईआर रद्द करने से हाईकोर्ट ने किया इनकार

Sat, 17 Aug 2024 04:50 AM IST
चंडीगढ़ ब्यूरो न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़ Published by: चंडीगढ़ ब्यूरो Updated Sat, 17 Aug 2024 04:50 AM IST
सार

एक स्पा सेंटर के परिसर में वेश्यालय चलाया जा रहा है, जिसके मालिक और प्रबंधक अपने ग्राहकों को मसाज के नाम पर वेश्यावृत्ति के लिए लड़कियां मुहैया कराते हैं। डीएसपी ने कांस्टेबल संदीप को फर्जी ग्राहक और एक अन्य कांस्टेबल को शेडो विटनेस के तौर पर नामित किया और यह तय किया गया कि वे दोनों छामा मारने के लिए स्पा सेंटर जाएंगे।

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Clients are equally responsible in prostitution case, High Court refuses to cancel FIR lodged
court new - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने चंडीगढ़ के एक स्पा सेंटर में छापे के दौरान आपत्तिजनक हालत में पाए जाने के आरोपी की एफआईआर रद्द करने की मांग को लेकर दाखिल याचिका को खारिज कर दिया है। हाईकोर्ट ने माना कि ग्राहक भी अभियोजन के लिए बराबर जिम्मेदार होता है और ऐसे में एफआईआर रद्द नहीं की जा सकती।
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चंडीगढ़ में आईपीसी की धारा 370 और 120-बी और अनैतिक तस्करी रोकथाम अधिनियम की धारा 3, 4, 5, 6 और 7 के तहत दर्ज एफआईआर को रद्द करने की मांग को लेकर व्यक्ति ने याचिका दाखिल की थी। एफआईआर के अनुसार, गुप्त सूचना मिली थी कि एक स्पा सेंटर के परिसर में वेश्यालय चलाया जा रहा है, जिसके मालिक और प्रबंधक अपने ग्राहकों को मसाज के नाम पर वेश्यावृत्ति के लिए लड़कियां मुहैया कराते हैं।
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डीएसपी ने कांस्टेबल संदीप को फर्जी ग्राहक और एक अन्य कांस्टेबल को शेडो विटनेस के तौर पर नामित किया और यह तय किया गया कि वे दोनों छामा मारने के लिए स्पा सेंटर जाएंगे। जब छापा मारा तो याचिकाकर्ता एक महिला के साथ आपत्तिजनक स्थिति में पाया गया। हाईकोर्ट ने कहा कि यह कहने की आवश्यकता नहीं है कि याचिकाकर्ता के खिलाफ आरोप गंभीर प्रकृति के हैं। 
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अनैतिक तस्करी (रोकथाम) अधिनियम, 1956 की धारा 7(1) प्रावधानों को पढ़ने से यह स्पष्ट हो जाता है कि वेश्यावृत्ति करने वाला व्यक्ति और जिसके साथ वेश्यावृत्ति की जाती है, दोनों ही अधिनियम के तहत उत्तरदायी हैं। बेशक अधिनियम की धारा 3 और 4 के तहत, ग्राहक को शामिल नहीं किया गया है और केवल वेश्यालय मालिक और वेश्यावृत्ति की कमाई पर जीने वाले व्यक्ति को ही शामिल किया गया है।


कोर्ट ने माना कि जिससे वेश्यावृत्ति होती है उस परिभाषा में कस्टमर भी आता है। वर्तमान याचिकाकर्ता के खिलाफ स्पष्ट आरोप यह है कि उसे किसी अन्य लड़की के साथ संबंध बनाते हुए आपत्तिजनक स्थिति में पाया गया था। याचिकाकर्ता के खिलाफ आरोपों की प्रकृति के साथ-साथ कानूनी स्थिति एफआईआर को सरसरी तौर पर रद्द करने की अनुमति नहीं देती है। ऐसे में इन टिप्पणियों के साथ ही हाईकोर्ट ने याचिका को खारिज कर दिया।
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