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मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह ने पंजाब में नौ कृषि-रसायनों की बिक्री पर लगाई पाबंदी
Sat, 15 Aug 2020 08:19 AM IST
पंचकुला ब्यूरो
अमर उजाला, चंडीगढ़
अमर उजाला, चंडीगढ़
Published by: पंचकुला ब्यूरो
Updated Sat, 15 Aug 2020 08:19 AM IST
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Agriculture
पंजाब के मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह ने शुक्रवार को राज्य में 9 कृषि-रसायनों की बिक्री और प्रयोग पर रोक लगाने के आदेश दिए हैं। कृषि विभाग के ध्यान में आया कि धान की गुणवत्ता के लिए नुकसानदायक होने के बावजूद किसानों द्वारा अभी भी इसका प्रयोग किया जा रहा है, जिसके बाद मुख्यमंत्री ने यह आदेश जारी किए।
इस पाबंदी का उद्देश्य धान की गुणवत्ता को बचाना है, जो अंतरराष्ट्रीय मार्केट में धान के निर्यात और लाभप्रद कीमत के लिए बहुत अहमियत रखता है। मुख्यमंत्री, जिनके पास कृषि विभाग भी है, ने कीटनाशक एक्ट के अंतर्गत तुरंत प्रभाव से 9 कृषि-रसायनों पर पाबंदी लगाने की मंजूरी दे दी है। इनमें ऐसीफेट, ट्राइएजोफोस, थायामीथौक्सैम, कारबेंडाजिम, ट्राइसाइकलाजोल, बुपरोफेजन, कार्बोफ्यूरान, प्रौपाइकोनाजोल और थायोफिनेट मिथाइल शामिल हैं।
आदेशों के मुताबिक इन 9 कीटनाशकों की बिक्री, माल भंडारण करने, वितरण और धान की फसल पर प्रयोग पर पाबंदी लग चुकी है। मुख्यमंत्री ने कृषि सचिव केएस पन्नू को इस संबंध में कृषि डायरेक्टर को विस्तृत हिदायतें जारी करने को कहा, जिससे राज्य सरकार की लैबोरेट्रियों द्वारा सैंपल टेस्टिंग जारी करने के बाद लगाई गई पाबंदी के सख्ती से अमल को यकीनी बनाया जा सके।
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पन्नू ने बताया कि यह कृषि-रसायन किसानों के हित में सही नहीं हैं, इसके नतीजे के तौर पर गुणवत्ता पर प्रभाव पड़ता है और चावलों में कीटनाशकों के अंश सरकार द्वारा तय किए गए अधिक से अधिक अंश के स्तर (एमआरएल) से अधिक रहने का खतरा बना रहता है।
सचिव ने बताया कि कृषि विभाग ने ऐसे रसायनों के प्रयोग से मनुष्य स्वास्थ्य पर पड़ने वाले बुरे प्रभावों संबंधी किसानों और कीटनाशक डीलरों को अवगत करवाने के लिए पिछले दो सालों से मुहिम चलाई हुई है। पंजाब राइस मिलर्स और एक्सपोर्ट्स एसोसिएशन ने भी यह मामला उठाया है कि अलग-अलग नमूनों में बासमती चावलों में इन कीटनाशकों के अंश निर्धारित एमआरएल से कहीं अधिक पाए गए हैं।
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इस पाबंदी का उद्देश्य धान की गुणवत्ता को बचाना है, जो अंतरराष्ट्रीय मार्केट में धान के निर्यात और लाभप्रद कीमत के लिए बहुत अहमियत रखता है। मुख्यमंत्री, जिनके पास कृषि विभाग भी है, ने कीटनाशक एक्ट के अंतर्गत तुरंत प्रभाव से 9 कृषि-रसायनों पर पाबंदी लगाने की मंजूरी दे दी है। इनमें ऐसीफेट, ट्राइएजोफोस, थायामीथौक्सैम, कारबेंडाजिम, ट्राइसाइकलाजोल, बुपरोफेजन, कार्बोफ्यूरान, प्रौपाइकोनाजोल और थायोफिनेट मिथाइल शामिल हैं।
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आदेशों के मुताबिक इन 9 कीटनाशकों की बिक्री, माल भंडारण करने, वितरण और धान की फसल पर प्रयोग पर पाबंदी लग चुकी है। मुख्यमंत्री ने कृषि सचिव केएस पन्नू को इस संबंध में कृषि डायरेक्टर को विस्तृत हिदायतें जारी करने को कहा, जिससे राज्य सरकार की लैबोरेट्रियों द्वारा सैंपल टेस्टिंग जारी करने के बाद लगाई गई पाबंदी के सख्ती से अमल को यकीनी बनाया जा सके।
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पन्नू ने बताया कि यह कृषि-रसायन किसानों के हित में सही नहीं हैं, इसके नतीजे के तौर पर गुणवत्ता पर प्रभाव पड़ता है और चावलों में कीटनाशकों के अंश सरकार द्वारा तय किए गए अधिक से अधिक अंश के स्तर (एमआरएल) से अधिक रहने का खतरा बना रहता है।
सचिव ने बताया कि कृषि विभाग ने ऐसे रसायनों के प्रयोग से मनुष्य स्वास्थ्य पर पड़ने वाले बुरे प्रभावों संबंधी किसानों और कीटनाशक डीलरों को अवगत करवाने के लिए पिछले दो सालों से मुहिम चलाई हुई है। पंजाब राइस मिलर्स और एक्सपोर्ट्स एसोसिएशन ने भी यह मामला उठाया है कि अलग-अलग नमूनों में बासमती चावलों में इन कीटनाशकों के अंश निर्धारित एमआरएल से कहीं अधिक पाए गए हैं।