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खेतों में पराली जलाने की घटनाएं बढ़ीं और चंडीगढ़ की हवा फिर खराब हुई, 160 पहुंचा एक्यूआई
Tue, 15 Oct 2019 05:03 PM IST
पंचकुला ब्यूरो
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
Published by: पंचकुला ब्यूरो
Updated Tue, 15 Oct 2019 05:03 PM IST
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पंजाब में जलाई जा रही पराली (धान की फसल के अवशेष) का असर चंडीगढ़ में भी दिखने लगा है। सोमवार को चंडीगढ़ का एयरक्वालिटी इंडेक्स (एक्यूआई) 160 के आसपास दर्ज किया गया है। इसका मतलब है कि हवा में प्रदूषण के कण मौजूद हैं और वह सेहत के लिए ठीक नहीं है।
लंग्स, अस्थमा और हार्ट के रोग से पीड़ित मरीजों को इस हवा में सांस लेना खतरनाक साबित हो सकता है। हालांकि, दशहरा के दो दिन बीतने के बाद हवा में सुधार देखने को मिला था। विशेषज्ञों का कहना है कि आगे भी हवा अच्छी नहीं रहने वाली है। क्योंकि पंजाब व हरियाणा में इस समय पराली धड़ल्ले से जलाई जा रही है। सरकारें उन्हें रोकने में नाकाम साबित हुई हैं।
सेटेलाइट से ली गई तस्वीर के मुताबिक 7 से 13 अक्तूबर तक पश्चिमी उत्तर प्रदेश, हरियाणा और पंजाब में धड़ल्ले से पराली जलाई गई है। हवाओं की वजह से इन पराली का धुआं दिल्ली, हरियाणा और चंडीगढ़ में आने लगा है। विशेषज्ञों ने यह भी बताया कि चंडीगढ़ से लगते पंजाब के इलाकों में भी आग जलाने की काफी घटनाएं देखने को मिल रही हैं।
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दूसरी तरफ ठंड भी बढ़ी हुई है, जिससे वायुमंडलीय सतह नीचे आ गई है और प्रदूषण के कण ऊपर जाने के बजाए नीचे ही रह रहे हैं। इस वजह से पीएम-10 और पीएम 2.5 के कण अपने तय लिमिट से ज्यादा दर्ज किए जा रहे हैं।
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लंग्स, अस्थमा और हार्ट के रोग से पीड़ित मरीजों को इस हवा में सांस लेना खतरनाक साबित हो सकता है। हालांकि, दशहरा के दो दिन बीतने के बाद हवा में सुधार देखने को मिला था। विशेषज्ञों का कहना है कि आगे भी हवा अच्छी नहीं रहने वाली है। क्योंकि पंजाब व हरियाणा में इस समय पराली धड़ल्ले से जलाई जा रही है। सरकारें उन्हें रोकने में नाकाम साबित हुई हैं।
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सेटेलाइट से ली गई तस्वीर के मुताबिक 7 से 13 अक्तूबर तक पश्चिमी उत्तर प्रदेश, हरियाणा और पंजाब में धड़ल्ले से पराली जलाई गई है। हवाओं की वजह से इन पराली का धुआं दिल्ली, हरियाणा और चंडीगढ़ में आने लगा है। विशेषज्ञों ने यह भी बताया कि चंडीगढ़ से लगते पंजाब के इलाकों में भी आग जलाने की काफी घटनाएं देखने को मिल रही हैं।
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दूसरी तरफ ठंड भी बढ़ी हुई है, जिससे वायुमंडलीय सतह नीचे आ गई है और प्रदूषण के कण ऊपर जाने के बजाए नीचे ही रह रहे हैं। इस वजह से पीएम-10 और पीएम 2.5 के कण अपने तय लिमिट से ज्यादा दर्ज किए जा रहे हैं।
जानकारी के मुताबिक सोमवार दोपहर 12 बजे पीएम 2.5 की मात्रा 210 से 228 के बीच दर्ज की गई, जबकि इसकी तय लिमिट 60 माइक्रोग्राम क्यूबिक मीटर (एमजीसीएम) है। दोपहर में थोड़ी मात्रा कम हुई, लेकिन शाम आते-आते फिर से बढ़ गई। पीएम 10 की मात्रा 152 दर्ज की गई थी, जबकि इसकी लिमिट 100 माइक्रोग्राम क्यूबिक मीटर (एमजीसीएम) है।
पंजाब, हरियाणा व वेस्ट यूपी में कब कितनी आग की लपटें दर्ज हुईं
तारीख आग की घटनाएं
सात अक्तूबर 46
आठ अक्तूबर 151
नौ अक्तूबर 195
दस अक्तूबर 353
11 अक्तूबर 250
12 अक्तूबर 201
13 अक्तूबर 287
(स्रोत : सीईईडब्ल्यू)
प्रदूषण न्यूनतम अधिकतम औसत
पीएम 2.5 105 155 228
पीएम 10 96 120 149
सीओ 22 39 72
ओजोन 01 34 63
(रात नौ बजे एयरक्वालिटी इंडेक्स 155 दर्ज किया गया)
इस समय पराली की घटनाएं बढ़ गई हैं। चंडीगढ़ के आसपास भी खूब धड़ल्ले पराली जलाई जा रही हैं। ठंड की वजह से वायुमंडलीय सतह भी नीचे है। इसलिए हवा की गुणवत्ता में फर्क पड़ा है। आने वाले वक्त में गुणवत्ता और प्रभावित हो सकती है।
- रविंद्रा खैवाल, एडिशनल प्रोफेसर इन्वायरमेंट विंग, स्कूल आफ पब्ल्कि हेल्थ पीजीआई
पंजाब, हरियाणा व वेस्ट यूपी में कब कितनी आग की लपटें दर्ज हुईं
तारीख आग की घटनाएं
सात अक्तूबर 46
आठ अक्तूबर 151
नौ अक्तूबर 195
दस अक्तूबर 353
11 अक्तूबर 250
12 अक्तूबर 201
13 अक्तूबर 287
(स्रोत : सीईईडब्ल्यू)
प्रदूषण न्यूनतम अधिकतम औसत
पीएम 2.5 105 155 228
पीएम 10 96 120 149
सीओ 22 39 72
ओजोन 01 34 63
(रात नौ बजे एयरक्वालिटी इंडेक्स 155 दर्ज किया गया)
इस समय पराली की घटनाएं बढ़ गई हैं। चंडीगढ़ के आसपास भी खूब धड़ल्ले पराली जलाई जा रही हैं। ठंड की वजह से वायुमंडलीय सतह भी नीचे है। इसलिए हवा की गुणवत्ता में फर्क पड़ा है। आने वाले वक्त में गुणवत्ता और प्रभावित हो सकती है।
- रविंद्रा खैवाल, एडिशनल प्रोफेसर इन्वायरमेंट विंग, स्कूल आफ पब्ल्कि हेल्थ पीजीआई