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कैप्टन की तीखी प्रतिक्रिया- लॉकडाउन में केंद्र सरकार का कृषि पैकेज ‘जुमलों के अलावा और कुछ नहीं’
Sat, 16 May 2020 02:12 PM IST
पंचकुला ब्यूरो
अमर उजाला, चंडीगढ़
अमर उजाला, चंडीगढ़
Published by: पंचकुला ब्यूरो
Updated Sat, 16 May 2020 02:12 PM IST
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कैप्टन अमरिंदर सिंह
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केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण द्वारा कृषि क्षेत्र को लेकर किए एलान को जुमलों की गठरी बताते हुए पंजाब के मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह ने शुक्रवार को कहा कि आर्थिक पैकेज में संकट में घिरे किसानों को कोई तुरंत राहत नहीं दी गई है, जो इन मुश्किल हालात के बीच दो बड़ी फसलों को संभालने की चुनौतियों से लड़ रहे हैं। आर्थिक पैकेज के अब तक घोषित तीनों हिस्सों ने समाज के जरूरतमंद वर्गों को निराश ही किया है। मुख्यमंत्री ने कहा कि स्पष्ट तौर पर केंद्र उन लोगों के बचाव के लिए जरूरी कदम उठाने में असफल रहा है, जिन्हें कोविड संकट में लॉकडाउन के दौरान संघर्ष करना पड़ रहा है।
कैप्टन ने किसानों के लिए किए एलान में किसानों की मुश्किलों का कोई ठोस हल न करने पर गहरी चिंता जाहिर करते हुए कहा कि किसानों को तत्काल राहत की जरूरत है, न कि सुधार के उपायों की, जो लंबे समय से चले आ रहे हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि बुरी तरह प्रभावित राज्यों में से एक होने के कारण पंजाब को गेहूं की कटाई /खरीद के दौरान किसानों के लिए सहायता की जरूरत थी, जो केंद्र प्रदान करने में असफल रहा। बार-बार आग्रह करने के बावजूद केंद्र ने मंडियों में अपनी उपज देरी से लाने वाले किसानों को बोनस नहीं दिया।
किसानों के लिए कोई मदद नहीं दी केंद्र ने : कैप्टन
मुख्यमंत्री ने कहा कि केंद्रीय सहायता की कमी के बावजूद पंजाब के किसानों ने अपनी हिम्मत और संघर्ष से आगे बढ़ते हुए देश को एक बार फिर गेहूं की और ज्यादा फ़सल मुहैया करवाई है, जोकि संकट की इस घड़ी में बहुत जरूरी थी। उन्होंने आगे कहा कि राज्य की एजेंसियों ने केंद्र की मदद से बिना निर्विघ्न और सुचारू खरीद यकीनी बनाने के लिए दिन रात काम किया। उन्होंने कहा कि कोविड प्रोटोकोल और मजदूरों की कमी से निपटने के लिए समय से पहले अब राज्य में धान की बीजाई शुरू हो चुकी है।
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मुख्यमंत्री ने कहा कि एक बार फिर केंद्र सरकार ने मदद करने का कोई संकेत नहीं दिया। उन्होंने कहा कि कृषि सैक्टर के पैकेज के हिस्से के तौर पर वित्त मंत्री किसानों और सहयोगी क्षेत्रों में काम करने वालों की जिंदगी पर सकारात्मक प्रभाव डालने वाली लंबे समय की योजनाएं लाईं, जिसकी तुरंत कोई जरूरत नहीं है, बल्कि पराली जलाने से रोकने के लिए प्रोत्साहन के तौर पर बोनस के अलावा धान के न्यूनतम समर्थन मूल्य में विस्तार का ऐलान करना चाहिए था।
प्रवासियों का पलायन रोकने की कोई स्कीम नहीं
प्रवासी मजदूरों समेत पहले के ऐलानों का जिक्र करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रवासी मजदूरों को भी कोई तुरंत ठोस राहत नहीं दी गई। दो महीने के मुफ़्त राशन, जोकि किसी भी स्थिति में राज्य सरकारें पहले ही मुहैया करवा रही हैं, से प्रवासी लोगों का बड़े स्तर पर पलायन रोका नहीं जा रहा। उन्होंने कहा कि कोई स्पष्ट प्रोत्साहन, जो प्रवासियों को रुकने के लिए उत्साहित करे, के बिना लॉकडाऊन के बाद भी देश का आर्थिक पुनरुद्घार नहीं होगा।
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कैप्टन ने किसानों के लिए किए एलान में किसानों की मुश्किलों का कोई ठोस हल न करने पर गहरी चिंता जाहिर करते हुए कहा कि किसानों को तत्काल राहत की जरूरत है, न कि सुधार के उपायों की, जो लंबे समय से चले आ रहे हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि बुरी तरह प्रभावित राज्यों में से एक होने के कारण पंजाब को गेहूं की कटाई /खरीद के दौरान किसानों के लिए सहायता की जरूरत थी, जो केंद्र प्रदान करने में असफल रहा। बार-बार आग्रह करने के बावजूद केंद्र ने मंडियों में अपनी उपज देरी से लाने वाले किसानों को बोनस नहीं दिया।
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किसानों के लिए कोई मदद नहीं दी केंद्र ने : कैप्टन
मुख्यमंत्री ने कहा कि केंद्रीय सहायता की कमी के बावजूद पंजाब के किसानों ने अपनी हिम्मत और संघर्ष से आगे बढ़ते हुए देश को एक बार फिर गेहूं की और ज्यादा फ़सल मुहैया करवाई है, जोकि संकट की इस घड़ी में बहुत जरूरी थी। उन्होंने आगे कहा कि राज्य की एजेंसियों ने केंद्र की मदद से बिना निर्विघ्न और सुचारू खरीद यकीनी बनाने के लिए दिन रात काम किया। उन्होंने कहा कि कोविड प्रोटोकोल और मजदूरों की कमी से निपटने के लिए समय से पहले अब राज्य में धान की बीजाई शुरू हो चुकी है।
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मुख्यमंत्री ने कहा कि एक बार फिर केंद्र सरकार ने मदद करने का कोई संकेत नहीं दिया। उन्होंने कहा कि कृषि सैक्टर के पैकेज के हिस्से के तौर पर वित्त मंत्री किसानों और सहयोगी क्षेत्रों में काम करने वालों की जिंदगी पर सकारात्मक प्रभाव डालने वाली लंबे समय की योजनाएं लाईं, जिसकी तुरंत कोई जरूरत नहीं है, बल्कि पराली जलाने से रोकने के लिए प्रोत्साहन के तौर पर बोनस के अलावा धान के न्यूनतम समर्थन मूल्य में विस्तार का ऐलान करना चाहिए था।
प्रवासियों का पलायन रोकने की कोई स्कीम नहीं
प्रवासी मजदूरों समेत पहले के ऐलानों का जिक्र करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रवासी मजदूरों को भी कोई तुरंत ठोस राहत नहीं दी गई। दो महीने के मुफ़्त राशन, जोकि किसी भी स्थिति में राज्य सरकारें पहले ही मुहैया करवा रही हैं, से प्रवासी लोगों का बड़े स्तर पर पलायन रोका नहीं जा रहा। उन्होंने कहा कि कोई स्पष्ट प्रोत्साहन, जो प्रवासियों को रुकने के लिए उत्साहित करे, के बिना लॉकडाऊन के बाद भी देश का आर्थिक पुनरुद्घार नहीं होगा।