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Panchkula News: नकली शराब से हुई मौतों का मामला पहुंचा हाईकोर्ट, निष्पक्ष जांच की मांग
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चंडीगढ़। नकली शराब की बेरोकटोक बिक्री के चलते बीते दिनों हुईं मौतों के मामले की निष्पक्ष जांच की मांग को लेकर पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट में याचिका दाखिल की गई है।
याचिका दाखिल करते हुए मोहाली निवासी बिक्रमजीत सिंह बाजवा ने हाईकोर्ट को बताया कि आचार संहिता लागू होने और संसदीय चुनाव के नजदीक होने के बावजूद नकली शराब बेचने की छूट दी जा रही है। बीते दिनों संगरूर के रविदास पुरा, तिबरी, गुजरान, ओप्पली और धोंडोली खुर्द गांवों में नकली शराब के कारण कई लोगों की मौत हुई थी। यह घटना कोई पहला मामला नहीं है, इससे पहले भी दो बार ऐसी घटनाएं हो चुकी हैं। इतना गंभीर मामला होने के बावजूद सरकार ने दोषियों के खिलाफ कार्रवाई में कोई मुस्तैदी नहीं दिखाई और इसी का नतीजा है कि दोषियों को सजा नहीं मिल पा रही है। पुलिस नकली शराब बनाने और बेचने वालों पर काबू पाने में नाकाम रही है।
याची ने बताया कि नकली शराब में मेथनॉल मिलाया गया, जो इंसानों के लिए बहुत अधिक घातक है। यदि मेथनॉल की बिक्री को लेकर सख्ती बरती जाए तो नकली शराब बनाने और बेचने के साथ ही इसके सेवन से होने वाली मौतों को रोका जा सकता है। मेथनॉल की खरीद, बिक्री और इसके ट्रांसपोर्टेशन का पूरा लेखा-जोखा सरकार के पास मौजूद होना चाहिए ताकि इसका गलत उपयोग न किया जा सके। जो कंपनी इसका इस्तेमाल करती है उससे इसके उपयोग को लेकर शपथपत्र लिया जाना चाहिए। यदि मेथनॉल की सप्लाई नकली शराब बनाने वालों को नहीं होगी तो वे इसका निर्माण ही नहीं कर सकेंगे क्योंकि यह आवश्यक घटक है और इसके बिना नकली शराब नहीं बनाई जा सकती। याचिका हाईकोर्ट की रजिस्ट्री में दाखिल की गई है और इस पर 2 अप्रैल को सुनवाई होगी।
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याचिका दाखिल करते हुए मोहाली निवासी बिक्रमजीत सिंह बाजवा ने हाईकोर्ट को बताया कि आचार संहिता लागू होने और संसदीय चुनाव के नजदीक होने के बावजूद नकली शराब बेचने की छूट दी जा रही है। बीते दिनों संगरूर के रविदास पुरा, तिबरी, गुजरान, ओप्पली और धोंडोली खुर्द गांवों में नकली शराब के कारण कई लोगों की मौत हुई थी। यह घटना कोई पहला मामला नहीं है, इससे पहले भी दो बार ऐसी घटनाएं हो चुकी हैं। इतना गंभीर मामला होने के बावजूद सरकार ने दोषियों के खिलाफ कार्रवाई में कोई मुस्तैदी नहीं दिखाई और इसी का नतीजा है कि दोषियों को सजा नहीं मिल पा रही है। पुलिस नकली शराब बनाने और बेचने वालों पर काबू पाने में नाकाम रही है।
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याची ने बताया कि नकली शराब में मेथनॉल मिलाया गया, जो इंसानों के लिए बहुत अधिक घातक है। यदि मेथनॉल की बिक्री को लेकर सख्ती बरती जाए तो नकली शराब बनाने और बेचने के साथ ही इसके सेवन से होने वाली मौतों को रोका जा सकता है। मेथनॉल की खरीद, बिक्री और इसके ट्रांसपोर्टेशन का पूरा लेखा-जोखा सरकार के पास मौजूद होना चाहिए ताकि इसका गलत उपयोग न किया जा सके। जो कंपनी इसका इस्तेमाल करती है उससे इसके उपयोग को लेकर शपथपत्र लिया जाना चाहिए। यदि मेथनॉल की सप्लाई नकली शराब बनाने वालों को नहीं होगी तो वे इसका निर्माण ही नहीं कर सकेंगे क्योंकि यह आवश्यक घटक है और इसके बिना नकली शराब नहीं बनाई जा सकती। याचिका हाईकोर्ट की रजिस्ट्री में दाखिल की गई है और इस पर 2 अप्रैल को सुनवाई होगी।
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