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हरियाणा कर्मचारी चयन आयोग के पूर्व चेयरमैन और अफसरों पर विजिलेंस केस दर्ज, जानिए मामला
Thu, 02 Jul 2020 10:47 AM IST
पंचकुला ब्यूरो
अमर उजाला, चंडीगढ़
अमर उजाला, चंडीगढ़
Published by: पंचकुला ब्यूरो
Updated Thu, 02 Jul 2020 10:47 AM IST
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फाइल फोटो
हरियाणा में 1983 पीटीआई शिक्षकों को गलत तरीके से नौकरी देने के मामले में विजिलेंस ने पंचकूला में हरियाणा राज्य कर्मचारी चयन आयोग के पूर्व चेयरमैन, पूर्व सदस्यों एवं अधिकारियों के खिलाफ केस दर्ज किया है। यह भर्ती पूर्व सीएम भूपेंद्र हुड्डा के कार्यकाल में 2006 में शुरू हुई व 2010 में पूरी हुई। विजिलेंस की एफआईआर में किसी का नाम नहीं है। भर्ती के समय मौजूद सभी अफसर और कर्मचारी इसमें शामिल किए गए हैं। 2005 से 2010 तक आयोग के चेयरमैन नंद लाल पुनिया (ब्रिगेडियर, रिटायर्ड) थे।
डीएसपी शरीफ सिंह की शिकायत पर दर्ज एफआईआर के अनुसार आयोग ने विज्ञापन निकालकर 20 जुलाई 2006 को 1983 पीटीआई की भर्ती के लिए आवेदन मांगे थे। 28 दिसंबर 2006 को चयन प्रक्रिया की घोषणा की गई। इसके अनुसार कुल 200 अंक लिखित परीक्षा के और 25 अंक साक्षात्कार के थे। आरोप है कि इस भर्ती प्रक्रिया के दौरान आयोग के तत्कालीन चेयरमैन व सदस्यों ने अपने पद का दुरुपयोग कर अयोग्य उम्मीदवारों को लाभ पहुंचाया। इसके लिए चयन मापदंडों में बार-बार बदलाव किया गया।
आयोग के तत्कालीन चेयरमैन ने 30 जून 2008 और 11 जुलाई 2008 के निर्णय के संबंध में निर्धारित चयन प्रक्रिया के विरुद्ध मुख्यमंत्री निवास के सामने विरोध प्रदर्शन का हवाला देते हुए 31 जुलाई 2008 को चयन मापदंडों में बदलाव किया। इसके बाद हाईकोर्ट में मामला पहुंचा और भर्ती रद्द कर दी गई।
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एफआईआर के अनुसार तत्कालीन चेयरमैन ने चयन आयोग के सदस्यों के साथ मिलकर झूठे दस्तावेज तैयार किए। चयन प्रक्रिया में आयोग के सदस्यों ने अपने चहेते उम्मीदवारों को साक्षात्कार में अधिक से अधिक अंक दिए। योग्य उम्मीदवारों को बेहद कम अंक दिए गए। इस पर उनके खिलाफ धारा 166, 193, 466, 468, 471, 120बी भ्रष्टाचार उन्मूलन अधिनियम 1988 की धारा 13 (2) और (1)डी के तहत केस दर्ज किया गया है।
एफआईआर में किसी का नाम नहीं, डीएसपी विजिलेंस सुरेश कर रहे जांच
विजिलेंस की ओर से दर्ज एफआईआर में किसी का नाम मौजूद नहीं है। भर्ती के समय मौजूद चेयरमैन, सदस्य, अधिकारी व कर्मचारी ही इसमें शामिल किए गए हैं। 2005 से 2010 तक आयोग के चेयरमैन नंद लाल पुनिया (ब्रिगेडियर, रिटायर्ड) थे। डीएसपी विजिलेंस सुरेश कुमार को मामले की जांच सौंपी गई है। एजी हरियाणा ने 26 जून 2020 को पूरे मामले में कानूनी राय दी थी, उसके बाद 30 जून 2020 को मामला दर्ज किया गया।
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डीएसपी शरीफ सिंह की शिकायत पर दर्ज एफआईआर के अनुसार आयोग ने विज्ञापन निकालकर 20 जुलाई 2006 को 1983 पीटीआई की भर्ती के लिए आवेदन मांगे थे। 28 दिसंबर 2006 को चयन प्रक्रिया की घोषणा की गई। इसके अनुसार कुल 200 अंक लिखित परीक्षा के और 25 अंक साक्षात्कार के थे। आरोप है कि इस भर्ती प्रक्रिया के दौरान आयोग के तत्कालीन चेयरमैन व सदस्यों ने अपने पद का दुरुपयोग कर अयोग्य उम्मीदवारों को लाभ पहुंचाया। इसके लिए चयन मापदंडों में बार-बार बदलाव किया गया।
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आयोग के तत्कालीन चेयरमैन ने 30 जून 2008 और 11 जुलाई 2008 के निर्णय के संबंध में निर्धारित चयन प्रक्रिया के विरुद्ध मुख्यमंत्री निवास के सामने विरोध प्रदर्शन का हवाला देते हुए 31 जुलाई 2008 को चयन मापदंडों में बदलाव किया। इसके बाद हाईकोर्ट में मामला पहुंचा और भर्ती रद्द कर दी गई।
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एफआईआर के अनुसार तत्कालीन चेयरमैन ने चयन आयोग के सदस्यों के साथ मिलकर झूठे दस्तावेज तैयार किए। चयन प्रक्रिया में आयोग के सदस्यों ने अपने चहेते उम्मीदवारों को साक्षात्कार में अधिक से अधिक अंक दिए। योग्य उम्मीदवारों को बेहद कम अंक दिए गए। इस पर उनके खिलाफ धारा 166, 193, 466, 468, 471, 120बी भ्रष्टाचार उन्मूलन अधिनियम 1988 की धारा 13 (2) और (1)डी के तहत केस दर्ज किया गया है।
एफआईआर में किसी का नाम नहीं, डीएसपी विजिलेंस सुरेश कर रहे जांच
विजिलेंस की ओर से दर्ज एफआईआर में किसी का नाम मौजूद नहीं है। भर्ती के समय मौजूद चेयरमैन, सदस्य, अधिकारी व कर्मचारी ही इसमें शामिल किए गए हैं। 2005 से 2010 तक आयोग के चेयरमैन नंद लाल पुनिया (ब्रिगेडियर, रिटायर्ड) थे। डीएसपी विजिलेंस सुरेश कुमार को मामले की जांच सौंपी गई है। एजी हरियाणा ने 26 जून 2020 को पूरे मामले में कानूनी राय दी थी, उसके बाद 30 जून 2020 को मामला दर्ज किया गया।