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केंद्रीय वित्त मंत्री के आर्थिक पैकेज से कैप्टन निराशा, तो मनोहर बोले- उद्योगों को मिलेगी संजीवनी

Thu, 14 May 2020 10:41 AM IST
पंचकुला ब्‍यूरो अमर उजाला, चंडीगढ़
अमर उजाला, चंडीगढ़ Published by: पंचकुला ब्‍यूरो Updated Thu, 14 May 2020 10:41 AM IST
सार

  • असंगठित क्षेत्र को प्राथमिकता दी जानी चाहिए थी
  • आयकर रिटर्न की तिथि बढ़ाना कोई राहत नहीं है
  • प्रधानमंत्री ने ग्लोबल न होकर राष्ट्रीय होने की बात कही

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Union Finance Minister's Announced Economic Stimulus, Captain Amrinder Singh and Manohar Lal Reaction
कैप्टन अमरिंदर सिंह, सीएम मनोहर लाल - फोटो : फाइल फोटो

विस्तार

चंडीगढ़। पंजाब के मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह ने कहा है कि केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमन द्वारा बुधवार को घोषित पहला आर्थिक पैकेज निराशाजनक है। उन्होंने कहा कि असंगठित क्षेत्र को सबसे अधिक प्राथमिकता दी जानी चाहिए थी। सीएम ने कहा कि यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि वित्त मंत्री ने मौजूदा संकट के कारण अभूतपूर्व समस्याओं से जूझ रहे लाखों प्रवासी मजदूरों की तत्काल जरूरतों के अलावा सूक्ष्म, छोटे और मध्यमवर्गीय उद्योगों, एनबीएफसी और हाउसिंग सेक्टर की जरूरतों के बीच संतुलन बनाने पर ध्यान नहीं दिया।
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जीवन सुरक्षित करने का इरादा नहीं दिखा
प्रधानमंत्री द्वारा जान के साथ जहान को सुरक्षित बनाने पर दिए गए जोर का हवाला देते हुए कैप्टन ने कहा कि वित्त मंत्री द्वारा मानवीय जीवन सुरक्षित बनाने का इरादा नहीं दिखाया गया, जबकि इसके बिना जीवन निर्वाह नहीं हो सकता। मुख्यमंत्री ने कहा कि सूक्ष्म, छोटे और मध्यमवर्गीय उद्योग, हाउसिंग सेक्टर आदि को पहले बचाना होगा और इसके बाद पुनरुद्धार के चरण पर पहुंचना होगा। यह उद्योग अपने कामगारों के बिना कैसे बचेंगे, जिन्हें भीड़ में छोड़ दिया गया है और वह जल्द वापस लौटने के मूड में नहीं दिखते। उन्होंने केंद्र को मजदूरों ख़ासकर असंगठित क्षेत्र के मजदूरों की तकलीफों पर ध्यान देने की अपील की।
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अपेक्षित पैकेज की जगह कर्ज की पेशकश
मुख्यमंत्री ने कहा कि छोटे और मध्यमवर्गीय उद्योगों को संकट से निकालने के लिए अपेक्षित पैकेज हासिल नहीं हुआ, उलटे उसे कर्ज देने की पेशकश की जा रही है, जो उन्हें आखिर में कर्ज के और गहरे संकट में धकेल देगा। कहा कि स्वास्थ्य क्षेत्र में मौजूदा संकटकालीन हालात में काम कर रहे सूक्ष्म, छोटे और मध्यमवर्गीय उद्योगों को कोई वित्तीय रियायत का एलान नहीं किया गया, जिसकी इन उद्योगों के लिए बड़ी जरूरत थी। उन्होंने कहा कि संवेदनशील हालात में प्राथमिकताओं पर विचार न किया जाना निराशाजनक है। पंजाब में 2.52 लाख औद्योगिक इकाइयों में से केवल 1000 बड़े उद्योग हैं। केंद्र को एमएसएमई उद्योगों को फिर कार्यशील करने के लिए बड़ा पैकेज लाना चाहिए था। उन्होंने कहा कि बिजली क्षेत्र के लिए राहत भी उचित रूप में नहीं है।

आयकर रिटर्न की तिथि बढ़ाना कोई राहत नहीं है
उन्होंने कहा कि जहां तक वेतन पर गुजारा करने वाले मध्यम वर्ग का संबंध है, केवल आमदनी कर दाखिल करने की तारीख आगे बढ़ाना और टीडीएस घटाने को कोई बड़ी राहत का कदम नहीं कहा जा सकता। सीएम ने कहा कि कर दाताओं के पिछले वर्ष का खुद का पैसा वापस करने को राहत का कदम कैसे कहा जा सकता है।

उद्योगों को संजीवनी देने का काम करेगा पैकेज

कोरोना से जंग लड़ने के साथ ही हरियाणा सराकर उद्योगों को पटरी पर लाने की तैयारी कर रही है। इस कड़ी में केंद्र सरकार की ओर से दिया गया पैकेज संजीवनी का काम करेगा। राष्ट्रीयता की भावना को देखते हुए प्रधानमंत्री ने 200 करोड़ के टेंडर ग्लोबल न होकर राष्ट्रीय करने की बात कही है। जिससे हम अपने ही देश की कंपनियों से सामान खरीद कर लोकल को वोकल की कहावत को चरितार्थ कर सकें। यह बात यहां वीडियो कांफ्रेंस के माध्यम से सीएम मनोहर लाल ने पत्रकारों से बातचीत में कही।

उन्होंने कहा कि उद्योगों के साथ ही सरकार को इस बात का भी ख्याल है कि उद्योग से जुड़े श्रमिकों को कोई परेशानी न हो। उद्योगों से ही श्रमिकों की रोजी रोटी चलती है और श्रमिकों के अथक परिश्रम से देश चल रहा है। लिहाजा श्रमिकों की सुविधा को देखते हुए हमने दो हजार बसों और 28 रेलगाड़ियों के माध्यम से श्रमिकों को उनके गंतव्य के लिए भेज दिया है। जो लोग जाना चाह रहे हैं उन्हें भेजने की व्यवस्था आगे भी की जा रही है। मनोहर लाल ने कहा कि आने वाले समय में केंद्र सरकार की ओर से और अधिक घोषणाएं की जाएंगी। जिससे संकट के इस समय में काफी हद तक राहत मिलेगी।

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विपक्ष को लग रहा बहुत बड़ा मुद्दा मिल गया
फसल की खरीद और भुगतान को लेकर विपक्ष की ओर से उठाए जा रहे सवालों पर सीएम ने साफ किया कि विपक्ष को लग रहा है कि उन्हें बहुत बड़ा मुद्दा मिल गया है। यह बात अलग है कि कुछ तकनीकी दिक्कतों के चलते भुगतान में देरी हुई, लेकिन जल्द ही फसल की रकम किसानों के खाते में पहुंच जाएगी। सरसों की फसल का पूरा पैसा 1200 करोड़ हैफेड के माध्यम से भेज दिया गया है। पूर्व सरकारे बाजरे की खरीद नहीं करती थीं, लेकिन हम वह भी कर रहे हैँ। आने वाले समय में सरकार मक्का और दालों की भी खरीद करेगी।
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