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Panchkula News: बलवंत राजोआना की आंखों का पीजीआई में होगा ऑपरेशन
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निजी अस्पताल में इलाज की मांग हाईकोर्ट ने ठुकराई
कहा- पहले भी पीजीआई में हुई थी जांच, वहीं कराया जाए इलाज
अमर उजाला ब्यूरो
चंडीगढ़। पटियाला केंद्रीय जेल में 30 साल से अधिक समय से बंद बलवंत सिंह राजोआना की आंखों का ऑपरेशन अब पीजीआई चंडीगढ़ में कराया जाएगा। पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने राजोआना की पटियाला के निजी डॉ. आरएस रंधावा आई अस्पताल में इलाज की मांग स्वीकार नहीं की। अदालत ने निर्देश दिया कि उसका आवश्यक उपचार पीजीआई चंडीगढ़ में ही हो।
राजोआना ने याचिका में कहा था कि पटियाला केंद्रीय जेल के अस्पताल में मोतियाबिंद ऑपरेशन की सुविधा नहीं है। उसने पुलिस सुरक्षा में निजी अस्पताल ले जाकर ऑपरेशन कराने की अनुमति मांगी थी। राजोआना ने इलाज का पूरा खर्च स्वयं उठाने की बात भी कही थी। उसे 27 जनवरी को पीजीआई चंडीगढ़ लाया गया था। वहां चिकित्सकों ने उसकी दोनों आंखों की जांच की थी। जांच में मोतियाबिंद की स्थिति पहले जैसी पाई गई। चिकित्सकों ने तब तत्काल ऑपरेशन की आवश्यकता नहीं बताई थी।
मामले का इतिहास :
राजोआना 27 जनवरी 1996 से लगातार हिरासत में है। वह 31 अगस्त 1995 की सीबीआई प्राथमिकी से जुड़े मामले में दोषी ठहराया गया था। अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश, चंडीगढ़ ने 31 जुलाई 2007 को उसे मृत्युदंड सुनाया था। निचली अदालत के इस फैसले को हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट ने भी बरकरार रखा था।
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कहा- पहले भी पीजीआई में हुई थी जांच, वहीं कराया जाए इलाज
अमर उजाला ब्यूरो
चंडीगढ़। पटियाला केंद्रीय जेल में 30 साल से अधिक समय से बंद बलवंत सिंह राजोआना की आंखों का ऑपरेशन अब पीजीआई चंडीगढ़ में कराया जाएगा। पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने राजोआना की पटियाला के निजी डॉ. आरएस रंधावा आई अस्पताल में इलाज की मांग स्वीकार नहीं की। अदालत ने निर्देश दिया कि उसका आवश्यक उपचार पीजीआई चंडीगढ़ में ही हो।
राजोआना ने याचिका में कहा था कि पटियाला केंद्रीय जेल के अस्पताल में मोतियाबिंद ऑपरेशन की सुविधा नहीं है। उसने पुलिस सुरक्षा में निजी अस्पताल ले जाकर ऑपरेशन कराने की अनुमति मांगी थी। राजोआना ने इलाज का पूरा खर्च स्वयं उठाने की बात भी कही थी। उसे 27 जनवरी को पीजीआई चंडीगढ़ लाया गया था। वहां चिकित्सकों ने उसकी दोनों आंखों की जांच की थी। जांच में मोतियाबिंद की स्थिति पहले जैसी पाई गई। चिकित्सकों ने तब तत्काल ऑपरेशन की आवश्यकता नहीं बताई थी।
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मामले का इतिहास :
राजोआना 27 जनवरी 1996 से लगातार हिरासत में है। वह 31 अगस्त 1995 की सीबीआई प्राथमिकी से जुड़े मामले में दोषी ठहराया गया था। अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश, चंडीगढ़ ने 31 जुलाई 2007 को उसे मृत्युदंड सुनाया था। निचली अदालत के इस फैसले को हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट ने भी बरकरार रखा था।
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