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नए आपराधिक कानूनों को संक्षिप्त नाम से पुकारना कानून का उल्लंघन नहीं: हाईकोर्ट

Wed, 24 Jul 2024 04:58 AM IST
Chandigarh Bureau चंडीगढ़ ब्यूरो
Updated Wed, 24 Jul 2024 04:58 AM IST
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Calling new criminal laws by short names is not a violation of law: High Court
चंडीगढ़। नए आपराधिक कानूनों को यदि उनके संक्षिप्त नाम बीएनएसएस, बीएनएस व बीएसए से पुकारा जाएगा तो यह किसी कानून का उल्लंघन नहीं है। सांसदों और विधायकों को एमपी व एमएलए के नाम से जाना जाता है। इतना ही नहीं लंबे नामों वाले राजनीति दल जैसे एआईएमआईएम, भाजपा, डीएमके, जेडीयू, टीडीपी आदि संक्षिप्त नाम से जाने जाते हैं, चाहे उनके नाम किसी भी भाषा में लिखे गए हों। ऐसे में इन कानूनों को संक्षिप्त नाम से पुकारना गलत नहीं है। हाईकोर्ट के समक्ष पंजाब का एक आपराधिक मामला पहुंचा था जिसमें जमानत की मांग की गई थी। भ्रष्टाचार के एक मामले में भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता, 2023, (बीएनएसएस) की धारा 482 के तहत गिरफ्तारी से पहले जमानत याचिका पर सुनवाई करते समय कोर्ट ने पाया कि याचिका में भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता का उल्लेख बीएनएसएस के तौर पर किया गया था।
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जस्टिस अनूप चितकारा ने कहा कि विभिन्न भाषाई पृष्ठभूमि वाले लोगों के लिए एक साझा भाषाई स्थान बनाना एकता और समावेशिता की भावना को बढ़ावा देने के लिए महत्वपूर्ण हो जाता है। उच्चारण में कठिन शीर्षक भाषाई बाधा, संज्ञानात्मक अराजकता और नीरसता का कारण बनते हैं जो कानूनी प्रणाली को सुचारु रूप से संचालित होने से रोक सकते हैं।
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नए आपराधिक कानूनों के शीर्षकों को संक्षिप्त नाम बीएनएस, बीएनएसएस और बीएसए में संक्षिप्त करने से शब्दों को इस तरह से मानकीकृत करने में मदद मिलेगी कि भाषाई क्षमता से जूझे बिना उन्हें सार्वभौमिक रूप से समझा जा सके। इसे सुलभ बनाकर पाठकों पर भार कम होने की संभावना है और हिंदी में पूर्ण उच्चारण की तुलना में यह सरल भी है।
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हाईकोर्ट ने कहा कि भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता, 2023; भारतीय न्याय संहिता, 2023 और भारतीय साक्ष्य अधिनियम, 2023 को पढ़ने से यह स्पष्ट हो जाता है कि इन कानूनों को उनके संक्षिप्त रूप, बीएनएसएस, बीएनएस और बीएसए से पुकारने पर कोई प्रतिबंध नहीं है। कोर्ट ने कहा कि शब्दों को पूर्ण रूप से लिखने के बजाय उन्हें संक्षिप्त करना एक ऐसी घटना है जो लिखित संचार के इतिहास में मौजूद रही है, पत्थर पर उकेरे गए प्राचीन शिलालेखों से लेकर मध्ययुगीन पांडुलिपियाें तथा आधुनिक समय के त्वरित संदेशों तक। प्राचीन रोमन साम्राज्य से लेकर आज अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता प्राप्त संक्षिप्ताक्षरों तक का विस्तृत संदर्भ कोर्ट ने आदेश में दिया।
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