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Panchkula News: फर्जी डीएसपी बनकर सीसीटीवी कैमरे का टेंडर दिलाने का झांसा देकर ठग लिए 33 लाख
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पंचकूला। फर्जी डीएसपी बनकर ठगी करने का मामला सामने आया है। पानीपत निवासी योगेश अरोड़ा ने पुलिस को दी शिकायत में आरोप लगाया है कि पानीपत के विपुल गोयल नामक युवक खुद को डीएसपी बताकर वर्दी पहनता था और सीसीटीवी कैमरे का टेंडर दिलवाने के नाम पर उससे और उसके परिवार से करीब 33 लाख रुपये हड़प लिए। पीड़ित की शिकायत पर सेक्टर-7 थाना में मामला दर्ज किया गया है।
जानकारी के अनुसार वर्ष 2014 में शिकायतकर्ता योगेश अरोड़ा के दोस्त तरुण गोयल ने अपने छोटे भाई विपुल गोयल से मुलाकात करवाई। विपुल अक्सर पुलिस की वर्दी में मिलता था। इससे शिकायतकर्ता को विश्वास हो गया कि वह सच में पुलिस अधिकारी है। धीरे-धीरे विपुल और तरुण ने शिकायतकर्ता को समझाया कि वे उन्हें सरकारी दफ्तरों में सीसीटीवी कैमरे लगाने का बड़ा टेंडर दिला देंगे। इसी बहाने फरवरी 2017 में 15 लाख रुपये नकद पंचकूला बुलाया गया और वहां से रकम ऐंठ ली गई।
किस्तों में दिए लाखों रुपये
शिकायतकर्ता का आरोप है कि इसके बाद अलग-अलग तारीखों पर विपुल, तरुण और उनके सहयोगियों के खातों में लगभग 20 लाख रुपये बैंक ट्रांसफर किए गए और कई बार नकद रकम भी दी गई। 2018 के अंत तक शिकायतकर्ता से लगभग 35 लाख रुपये वसूल लिए गए। शिकायतकर्ता के अनुसार 2017 से 2022 तक उन्हें टेंडर नहीं मिला और जब उन्होंने पैसे लौटाने की मांग की तो आरोपी ने बार-बार टालमटोल की। जून 2023 में मात्र 1.96 लाख रुपये लौटाए गए जबकि शेष रकम नहीं दी गई।
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आरोपी के माता-पिता ने भी पैसे लौटाने का दिया था आश्वासन
कई बार जब वह पानीपत स्थित आरोपियों के घर गए तो उनके माता-पिता ने भी आश्वासन दिया कि पैसे लौटा दिए जाएंगे मगर बाद में पूरा परिवार मिलने से बचने लगा। शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया कि विपुल गोयल पुलिस विभाग में कार्यरत नहीं है। वह केवल डीएसपी की वर्दी पहनकर आम लोगों को विश्वास में लेता था।
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जानकारी के अनुसार वर्ष 2014 में शिकायतकर्ता योगेश अरोड़ा के दोस्त तरुण गोयल ने अपने छोटे भाई विपुल गोयल से मुलाकात करवाई। विपुल अक्सर पुलिस की वर्दी में मिलता था। इससे शिकायतकर्ता को विश्वास हो गया कि वह सच में पुलिस अधिकारी है। धीरे-धीरे विपुल और तरुण ने शिकायतकर्ता को समझाया कि वे उन्हें सरकारी दफ्तरों में सीसीटीवी कैमरे लगाने का बड़ा टेंडर दिला देंगे। इसी बहाने फरवरी 2017 में 15 लाख रुपये नकद पंचकूला बुलाया गया और वहां से रकम ऐंठ ली गई।
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किस्तों में दिए लाखों रुपये
शिकायतकर्ता का आरोप है कि इसके बाद अलग-अलग तारीखों पर विपुल, तरुण और उनके सहयोगियों के खातों में लगभग 20 लाख रुपये बैंक ट्रांसफर किए गए और कई बार नकद रकम भी दी गई। 2018 के अंत तक शिकायतकर्ता से लगभग 35 लाख रुपये वसूल लिए गए। शिकायतकर्ता के अनुसार 2017 से 2022 तक उन्हें टेंडर नहीं मिला और जब उन्होंने पैसे लौटाने की मांग की तो आरोपी ने बार-बार टालमटोल की। जून 2023 में मात्र 1.96 लाख रुपये लौटाए गए जबकि शेष रकम नहीं दी गई।
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आरोपी के माता-पिता ने भी पैसे लौटाने का दिया था आश्वासन
कई बार जब वह पानीपत स्थित आरोपियों के घर गए तो उनके माता-पिता ने भी आश्वासन दिया कि पैसे लौटा दिए जाएंगे मगर बाद में पूरा परिवार मिलने से बचने लगा। शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया कि विपुल गोयल पुलिस विभाग में कार्यरत नहीं है। वह केवल डीएसपी की वर्दी पहनकर आम लोगों को विश्वास में लेता था।