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कथित सूचनाओं पर लोगों को फंसाने की ब्रिटिश काल जैसी पुलिसिंग बंद हो: हाईकोर्ट
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चंडीगढ़। पंजाब पुलिस द्वारा बिना किसी सत्यापन, जांच या छापे के केवल गुप्त सूचना के आधार पर गंभीर आपराधिक मामलों की एफआईआर और इनमें 18 से 20 वर्ष के युवकों को निशाना बनाने की प्रवृत्ति पर सवाल उठाते हुए अदालत ने पंजाब के पुलिस महानिदेशक को इस पूरे तरीके की समीक्षा करने का निर्देश दिया है।
कोर्ट ने औपनिवेशिक दौर की पुलिसिंग से तुलना करते हुए तीखी टिप्पणी करते हुए कहा कि ब्रिटिश शासनकाल में पुलिस महज आरोपों या कथित सूचनाओं के आधार पर लोगों को मनमाने ढंग से फंसाया करती थी लेकिन एक सांविधानिक लोकतंत्र में ऐसी प्रथाएं पूरी तरह अस्वीकार्य हैं। हाईकोर्ट ने कहा कि इस तरह के तरीके व्यक्तिगत स्वतंत्रता के खिलाफ हैं और लोकतांत्रिक गणराज्य में इन्हें बर्दाश्त नहीं किया जा सकता।
19 वर्षीय युवक ने नियमित जमानत की मांग की थी। उस पर 29 जून 2025 को अमृतसर में एफआईआर दर्ज की गई थी। आरोप था कि याचिकाकर्ता सहित पांच युवक एक गिरोह बनाकर जानलेवा हथियारों के साथ डकैती की तैयारी कर रहे हैं। कोर्ट ने कहा कि एफआईआर किसी भी छापे से पहले ही केवल गुप्त सूचना के आधार पर दर्ज कर ली गई। याचिकाकर्ता से केवल दातर बरामद हुई थी जो प्रथम दृष्टया एक कृषि उपकरण है।
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कोर्ट ने याची को अंतरिम जमानत देते हुए आदेश की प्रति पंजाब के डीजीपी को भेजने का निर्देश दिया। डीजीपी को कोर्ट ने आदेश दिया कि वह जांच करें कि इस तरह के मामले किस आधार पर दर्ज किए जा रहे हैं, विशेषकर 18–20 वर्ष की आयु के युवकों के खिलाफ ताकि अनावश्यक आपराधिक मुकदमों के कारण उनका भविष्य बर्बाद न हो।
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कोर्ट ने औपनिवेशिक दौर की पुलिसिंग से तुलना करते हुए तीखी टिप्पणी करते हुए कहा कि ब्रिटिश शासनकाल में पुलिस महज आरोपों या कथित सूचनाओं के आधार पर लोगों को मनमाने ढंग से फंसाया करती थी लेकिन एक सांविधानिक लोकतंत्र में ऐसी प्रथाएं पूरी तरह अस्वीकार्य हैं। हाईकोर्ट ने कहा कि इस तरह के तरीके व्यक्तिगत स्वतंत्रता के खिलाफ हैं और लोकतांत्रिक गणराज्य में इन्हें बर्दाश्त नहीं किया जा सकता।
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19 वर्षीय युवक ने नियमित जमानत की मांग की थी। उस पर 29 जून 2025 को अमृतसर में एफआईआर दर्ज की गई थी। आरोप था कि याचिकाकर्ता सहित पांच युवक एक गिरोह बनाकर जानलेवा हथियारों के साथ डकैती की तैयारी कर रहे हैं। कोर्ट ने कहा कि एफआईआर किसी भी छापे से पहले ही केवल गुप्त सूचना के आधार पर दर्ज कर ली गई। याचिकाकर्ता से केवल दातर बरामद हुई थी जो प्रथम दृष्टया एक कृषि उपकरण है।
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कोर्ट ने याची को अंतरिम जमानत देते हुए आदेश की प्रति पंजाब के डीजीपी को भेजने का निर्देश दिया। डीजीपी को कोर्ट ने आदेश दिया कि वह जांच करें कि इस तरह के मामले किस आधार पर दर्ज किए जा रहे हैं, विशेषकर 18–20 वर्ष की आयु के युवकों के खिलाफ ताकि अनावश्यक आपराधिक मुकदमों के कारण उनका भविष्य बर्बाद न हो।