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अशक्तों को जॉब फेयर में बुलाकर बैरंग लौटाया
अमर उजाला पंचकूला
Updated Sat, 19 Oct 2013 01:57 AM IST
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कोई हाथों के बल चलकर आया तो कोई ट्राइसाइकिल पर तो कोई किसी के कंधे पर बैठकर...। उम्मीद थी कि जॉब फेयर में इंटरव्यू देेंगे और पास होकर अपने पांव पर खड़े हो जाएंगे।
इनकी तादात 200 के आसपास थी, लेकिन सरकारी महकमे की लापरवाही के कारण इन उम्मीदवारों को सेक्टर-5 स्थित इंद्रधनुष ऑडिटोरियम से बैरंग ही लौटना पड़ा, क्योंकि यहां कोई इंटरव्यू लेने वाला ही नहीं पहुंचा। यह बात किसी के समझ में नहीं आ रही थी कि जब इंटरव्यू लेना ही नहीं था तो उन्हें बुलाया क्यों गया?
जिला सचिवालय में सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय के विकलांगजन कार्य विभाग की तरफ से पिछले दिनों जॉब फेयर के दौरान प्रशिक्षित अशक्त युवाओं को रोजगार दिए जाने का प्लान बनाया गया था। योजना थी कि 200 कुशल युवाओं को रोजगार दिया जाएगा।
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इसके तहत ही सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय और नेशनल हैंडीकैप्ड फाइनेंस एंड डेवलपमेंट कॉरपोरेशन की ओर से इस जॉब फेयर का आयोजन किया जाना था। नौकरी की उम्मीद में कई अशक्त दूर-दूर से पहुंचे थे, लेकिन यहां ऑडिटोरियम में उनकी सुध लेने वाला कोई नहीं था। संजय, मुकेश व राकेश ने बताया कि अगर रोजगार मेले की तारीख में कोई बदलाव हुआ था, तो उसकी जानकारी दी जानी चाहिए थी, लेकिन ऐसा नहीं किया गया।
ट्रेनिंग के बाद मिलनी थी नौकरी
27 सितंबर को जिला सचिवालय के सभागार में हुई बैठक में तय हुआ था कि 18 नवंबर को इंद्रधनुष ऑडिटोरियम में जॉब फेयर में जो अभ्यर्थी चुने जाएंगे, उन्हें ट्रेनिंग सेशन के लिए नामांकित किया जाएगा। फेयर में चुने जाने वालों को प्रशिक्षण संस्थानों के सहयोग से रुचि वाले विषय में निशुल्क ट्रेनिंग दी जानी थी।
40 फीसदी से ज्यादा वालों से मांगे थे आवेदन
जिनकी विकलांगता 40 प्रतिशत या इससे है, उनसे मेले में रोजगार के लिए 15 अक्तूबर तक जिला सचिवालय स्थित समाज कल्याण विभाग में आवेदन पत्र जमा कराने को कहा गया था। कई फार्म भी जमा हुए, जिसमें योग्यता, आवास व विकलांगता प्रमाण पत्र लगाए गए। फार्म भरने वाले करीब 200 लोग शुक्रवार को ऑडिटोरियम पहुंचे थे।
सीएमओ के मार्फत जारी हुई सूची
आवेदन तो काफी आए थे और विकलांग प्रमाण पत्रों की प्रमाणिकता की जांच के लिए सीएमओ कार्यालय से सभी सरकारी अस्पतालों में प्रमाण पत्र भेजे गए। प्रमाण पत्रों की जांच के बाद ही फाइनल सूची बनी।
अशक्तों को परेशानी हुई, उसके लिए खेद है। रोजगार मेले के लिए बैठक हुई थी, लेकिन तारीख तय नहीं हुई थी। जांच कराई जाएगी कि किस स्तर पर चूक हुई।
- अनिल कुमार, मुख्य प्रबंधक सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय
मुझे इस बारे में जानकारी नहीं है। अगर ऐसी गलती हुई है तो जांच कराई जाएगी।
- एसपी अरोड़ा, एडीसी पंचकूला।
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इनकी तादात 200 के आसपास थी, लेकिन सरकारी महकमे की लापरवाही के कारण इन उम्मीदवारों को सेक्टर-5 स्थित इंद्रधनुष ऑडिटोरियम से बैरंग ही लौटना पड़ा, क्योंकि यहां कोई इंटरव्यू लेने वाला ही नहीं पहुंचा। यह बात किसी के समझ में नहीं आ रही थी कि जब इंटरव्यू लेना ही नहीं था तो उन्हें बुलाया क्यों गया?
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जिला सचिवालय में सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय के विकलांगजन कार्य विभाग की तरफ से पिछले दिनों जॉब फेयर के दौरान प्रशिक्षित अशक्त युवाओं को रोजगार दिए जाने का प्लान बनाया गया था। योजना थी कि 200 कुशल युवाओं को रोजगार दिया जाएगा।
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इसके तहत ही सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय और नेशनल हैंडीकैप्ड फाइनेंस एंड डेवलपमेंट कॉरपोरेशन की ओर से इस जॉब फेयर का आयोजन किया जाना था। नौकरी की उम्मीद में कई अशक्त दूर-दूर से पहुंचे थे, लेकिन यहां ऑडिटोरियम में उनकी सुध लेने वाला कोई नहीं था। संजय, मुकेश व राकेश ने बताया कि अगर रोजगार मेले की तारीख में कोई बदलाव हुआ था, तो उसकी जानकारी दी जानी चाहिए थी, लेकिन ऐसा नहीं किया गया।
ट्रेनिंग के बाद मिलनी थी नौकरी
27 सितंबर को जिला सचिवालय के सभागार में हुई बैठक में तय हुआ था कि 18 नवंबर को इंद्रधनुष ऑडिटोरियम में जॉब फेयर में जो अभ्यर्थी चुने जाएंगे, उन्हें ट्रेनिंग सेशन के लिए नामांकित किया जाएगा। फेयर में चुने जाने वालों को प्रशिक्षण संस्थानों के सहयोग से रुचि वाले विषय में निशुल्क ट्रेनिंग दी जानी थी।
40 फीसदी से ज्यादा वालों से मांगे थे आवेदन
जिनकी विकलांगता 40 प्रतिशत या इससे है, उनसे मेले में रोजगार के लिए 15 अक्तूबर तक जिला सचिवालय स्थित समाज कल्याण विभाग में आवेदन पत्र जमा कराने को कहा गया था। कई फार्म भी जमा हुए, जिसमें योग्यता, आवास व विकलांगता प्रमाण पत्र लगाए गए। फार्म भरने वाले करीब 200 लोग शुक्रवार को ऑडिटोरियम पहुंचे थे।
सीएमओ के मार्फत जारी हुई सूची
आवेदन तो काफी आए थे और विकलांग प्रमाण पत्रों की प्रमाणिकता की जांच के लिए सीएमओ कार्यालय से सभी सरकारी अस्पतालों में प्रमाण पत्र भेजे गए। प्रमाण पत्रों की जांच के बाद ही फाइनल सूची बनी।
अशक्तों को परेशानी हुई, उसके लिए खेद है। रोजगार मेले के लिए बैठक हुई थी, लेकिन तारीख तय नहीं हुई थी। जांच कराई जाएगी कि किस स्तर पर चूक हुई।
- अनिल कुमार, मुख्य प्रबंधक सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय
मुझे इस बारे में जानकारी नहीं है। अगर ऐसी गलती हुई है तो जांच कराई जाएगी।
- एसपी अरोड़ा, एडीसी पंचकूला।