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Panchkula News: आतंकी रिंदा से संपर्क कराने के आरोपी राजबीर की जमानत खारिज

Tue, 09 Jun 2026 02:08 AM IST
Chandigarh Bureau चंडीगढ़ ब्यूरो
Updated Tue, 09 Jun 2026 02:08 AM IST
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Bail rejected for Rajbir, accused of facilitating contact with terrorist Rinda.
गवाहों और साक्ष्यों को प्रभावित करने की आशंका जताई
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संवाद न्यूज एजेंसी
पंचकूला। एनआईए (राष्ट्रीय जांच एजेंसी) की विशेष अदालत ने आतंकवादी गतिविधियों, विस्फोटक पदार्थों और गैरकानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम (यूएपीए) से जुड़े मामले में आरोपी राजबीर सिंह उर्फ राजा की जमानत याचिका खारिज कर दी। आरोपी पंजाब के बटाला के कादियां क्षेत्र का निवासी है।
मामला वर्ष 2022 में दर्ज उस चर्चित केस से जुड़ा है, जिसमें करनाल के मधुबन टोल प्लाजा के पास एक इनोवा वाहन से तीन आईईडी, हथियार, जिंदा कारतूस, मोबाइल फोन और नकदी बरामद की गई थी। जांच एजेंसियों के अनुसार यह सामग्री पाकिस्तान में बैठे हैंडलरों की ओर से भारत में आतंकी गतिविधियों को अंजाम देने के लिए भेजी गई थी। बाद में गृह मंत्रालय के आदेश पर मामले की जांच एनआईए को सौंप दी गई।
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जांच के दौरान गिरफ्तार अन्य आरोपियों से पूछताछ में राजबीर सिंह का नाम सामने आया। एनआईए के अनुसार उसने सह-आरोपी गुरप्रीत सिंह उर्फ गोपी और आतंकवादी हरविंदर सिंह संधू उर्फ रिंदा के बीच संपर्क स्थापित कराने और बातचीत करवाने में अहम भूमिका निभाई थी। एजेंसी का यह भी आरोप है कि वह आतंकी नेटवर्क के संचालन, रंगदारी वसूली और अन्य आपराधिक गतिविधियों में शामिल रहा है।
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सुनवाई के दौरान बचाव पक्ष ने दलील दी कि आरोपी का नाम मूल एफआईआर में नहीं था और उसके खिलाफ कोई प्रत्यक्ष साक्ष्य नहीं है। साथ ही वह लंबे समय से जेल में बंद है और मामले के निपटारे में अभी काफी समय लग सकता है।
वहीं, एनआईए और हरियाणा सरकार की ओर से जमानत का विरोध करते हुए कहा गया कि आरोपी के खिलाफ पर्याप्त साक्ष्य मौजूद हैं। अभियोजन पक्ष ने अदालत को बताया कि आरोपी का आपराधिक इतिहास लंबा है और उसके खिलाफ पंजाब तथा महाराष्ट्र में कई गंभीर मामले दर्ज हैं। इसके अलावा कुछ संरक्षित गवाहों की गवाही अभी शेष है। ऐसे में आरोपी के रिहा होने पर गवाहों और साक्ष्यों को प्रभावित किए जाने की आशंका बनी हुई है।

दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद अदालत ने कहा कि यूएपीए के तहत जमानत देने के लिए आवश्यक शर्तें इस मामले में पूरी नहीं होतीं। न्यायालय ने उपलब्ध रिकॉर्ड के आधार पर आरोपी के खिलाफ प्रथमदृष्टया मामला बनता माना और इसी आधार पर राजबीर सिंह उर्फ राजा की जमानत याचिका खारिज कर दी।
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