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आशा प्रोत्साहन भुगतान की निगरानी करेगा आशा-पे एप
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चंडीगढ़। हरियाणा में आशा वर्करों को दिए जाने वाले प्रोत्साहन भुगतान की निगरानी करने के लिए आशा-पे के नाम से एप तैयार किया गया है। राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के निदेशक प्रभजोत सिंह ने बताया कि आशा-पे एप या पोर्टल के लागू होने के बाद सभी स्तरों पर आशा प्रोत्साहन भुगतान की निगरानी की जाएगी। आशा वर्कर अपने भुगतान और कटौती (यदि कोई हो) की स्थिति के बारे में भी जान सकेंगे। यह जानकारी मिशन निदेशक ने मुख्य सचिव विजय वर्धन की अध्यक्षता में आयोजित बैठक में दी गई। बैठक में स्वास्थ्य महकमे के अतिरिक्त मुख्य सचिव राजीव अरोड़ा भी मौजूद रहे।
मिशन निदेशक प्रभजोत ने बताया कि आशा वर्कर के चयन मानदंड और आयु आधारित नामांकन के संशोधन के बारे में विस्तार से चर्चा के बाद, आशा वर्करों की न्यूनतम योग्यता कक्षा 10वीं पास के रूप में तय की गई है। जबकि मेवात विकास प्राधिकरण के तहत आने वाले क्षेत्र यानी जैसा कि जिला नूंह और पलवल के ब्लॉक हथीन के लिए न्यूनतम योग्यता कक्षा 8वीं पास होगी। इसके अलावा, आशा वर्कर के नामांकन की आयु सीमा 25 से 45 वर्ष के बीच होनी चाहिए और 01 अप्रैल 2021 से प्रभावी 60 वर्ष की आयु प्राप्त करने के बाद आशा कार्यकर्ताओं की सेवाएं समाप्त कर दी जाएंगी। स्वास्थ्य विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव राजीव अरोड़ा ने बताया कि वर्तमान में 20,268 आशा वर्करों को राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के तहत नामांकित किया गया है। उन्हें देश में अधिकतम प्रोत्साहन मिल रहा है, क्योंकि राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के तहत प्रदर्शन आधारित प्रोत्साहन के अलावा राज्य के बजट से राज्य सरकार ने उनके लिए व्यापक प्रोत्साहन पैकेज का प्रावधान भी किया है। अरोड़ा ने बताया कि आशा वर्करों की नामांकन प्रक्रिया को सरल और निष्पक्ष रूप से संहिताबद्ध किया गया है। इसके अलावा, आशा वर्करों के नामांकन, कार्य, भुगतान और छंटनी मानदंडों को पूरा करने हेतू कई बदलाव भी किए गए हैं। अनुपस्थित रहने वाले आशा वर्करों की नीति को सूचीबद्ध करते हुए मिशन निदेशक ने बताया कि स्थानीय अधिकारियों को लिखित सूचना के बिना तीन महीने से अधिक समय तक अनुपस्थित रहने वाली आशा वर्कर को औपचारिक नोटिस के तुरंत बाद चिह्नि करके भारमुक्त कर देना चाहिए। यहां तक कि 3 महीने तक के अनौपचारिक मातृत्व अवकाश के मामले में, आशा वर्कर को संबंधित अधिकारियों से लिखित रूप में अनुमोदित करवाना आवश्यक होगा।
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मिशन निदेशक प्रभजोत ने बताया कि आशा वर्कर के चयन मानदंड और आयु आधारित नामांकन के संशोधन के बारे में विस्तार से चर्चा के बाद, आशा वर्करों की न्यूनतम योग्यता कक्षा 10वीं पास के रूप में तय की गई है। जबकि मेवात विकास प्राधिकरण के तहत आने वाले क्षेत्र यानी जैसा कि जिला नूंह और पलवल के ब्लॉक हथीन के लिए न्यूनतम योग्यता कक्षा 8वीं पास होगी। इसके अलावा, आशा वर्कर के नामांकन की आयु सीमा 25 से 45 वर्ष के बीच होनी चाहिए और 01 अप्रैल 2021 से प्रभावी 60 वर्ष की आयु प्राप्त करने के बाद आशा कार्यकर्ताओं की सेवाएं समाप्त कर दी जाएंगी। स्वास्थ्य विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव राजीव अरोड़ा ने बताया कि वर्तमान में 20,268 आशा वर्करों को राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के तहत नामांकित किया गया है। उन्हें देश में अधिकतम प्रोत्साहन मिल रहा है, क्योंकि राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के तहत प्रदर्शन आधारित प्रोत्साहन के अलावा राज्य के बजट से राज्य सरकार ने उनके लिए व्यापक प्रोत्साहन पैकेज का प्रावधान भी किया है। अरोड़ा ने बताया कि आशा वर्करों की नामांकन प्रक्रिया को सरल और निष्पक्ष रूप से संहिताबद्ध किया गया है। इसके अलावा, आशा वर्करों के नामांकन, कार्य, भुगतान और छंटनी मानदंडों को पूरा करने हेतू कई बदलाव भी किए गए हैं। अनुपस्थित रहने वाले आशा वर्करों की नीति को सूचीबद्ध करते हुए मिशन निदेशक ने बताया कि स्थानीय अधिकारियों को लिखित सूचना के बिना तीन महीने से अधिक समय तक अनुपस्थित रहने वाली आशा वर्कर को औपचारिक नोटिस के तुरंत बाद चिह्नि करके भारमुक्त कर देना चाहिए। यहां तक कि 3 महीने तक के अनौपचारिक मातृत्व अवकाश के मामले में, आशा वर्कर को संबंधित अधिकारियों से लिखित रूप में अनुमोदित करवाना आवश्यक होगा।
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