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श्रीलंका में भारत का डंका बजाएंगे पंचकूला के बच्चे
दीपक शाही, अमर उजाला/पंचकूला
Updated Mon, 11 Apr 2016 01:31 AM IST
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अमिता मरवाहा की टीम
- फोटो : अमर उजाला
कथक नृत्यांगना अमिता मरवाहा ने पहले खुद को मार्शल आर्ट में साबित किया। उन्होंने इसमें डबल ब्लैक बेल्ट हासिल की। इसके बाद उन गरीब बच्चों को मुकाम तक पहुंचाने का फैसला लिया, जो सुविधा के अभाव में लक्ष्य तक नहीं पहुंच पाते हैं। पंचकूला की अमिता ने उन बच्चों की मार्गदर्शक बनीं जिन्हें दो वक्त की रोटी बड़ी मुश्किल से नसीब होती हैं।
अपने चार साल के अथक प्रयास के बाद 2015 में स्लम एरिया के करीब 100 बच्चों को खेल के मैदान में उतारा। इन बच्चों ने उम्मीद से बढ़कर प्रदर्शन किया, उन्होंने राष्ट्रीय एवं राज्य स्तरीय प्रतियोगिता में मेडल भी जीते। इनमें से राष्ट्रीय प्रतियोगिता में बेहतर प्रदर्शन करने वाले पांच बच्चों का चयन अंतरराष्ट्रीय चैंपियनशिप के लिए हुआ है। ये पांचों खिलाड़ी श्रीलंका में भारत का डंका बजाएंगे। अमिता ने बताया कि 2011 में उन्होंने इन बच्चों को ट्रेनिंग देने की शुरुआत की।
कुछ बच्चे करते हैं वेटर का काम
अमिता के पास मार्शल आर्ट की ट्रेनिंग लेने वाले कुछ बच्चे रोजी-रोटी और पढ़ाई के लिए पार्ट टाइम जॉब भी करते हैं। इनमें कुछ बच्चे वेटर का काम करते हैं। जिससे उनके घर का गुजारा चलता है।
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खुद बच्चों के लिए किट भी खरीदती हैं
मार्शल आर्ट की ट्रेनिंग देने के साथ ही अमिता बच्चों के लिए खुद किट भी खरीदती हैं। इस काम में उनके पति पीसी मरवाहा उनका पूरा सहयोग करते हैं। एक किट की कीमत करीब आठ से दस हजार रुपये है। वहीं कुछ दोस्त भी हैं जो बच्चों को चैंपियनशिप के दौरान फीस देते हैं।
पांच बच्चों का इंटरनेशनल टैंग सू डू चैंपियनशिप में चयन
15 से 17 जनवरी 2015 को गाजियाबाद में आयोजित नेशनल टैंग सू डू नेशनल चैंपियनशिप में अच्छे प्रदर्शन के आधार पर पांच बच्चों का चयन इंटरनेशनल टैंग सू डू चैंपियनशिप के लिए किया गया है। इनमें चार बच्चे स्लम एरिया के हैं। पांचवीं प्रतिभागी उनकी बेटी हिमांशी हैं। यह चैंपियनशिप श्रीलंका में जून में आयोजित की जाएगी। खात बात यह है कि चारों बच्चे (करण, सूरज, प्रिया व यास्मिन) ने मात्र सात माह की ट्रेनिंग में नेशनल से इंटरनेशनल चैंपियनशिप तक का सफर तय किया है। अमिता बताती हैं कि ये बच्चे कमाल के हैं। ये मार्शल आर्ट के लिए ही बने हैं।
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अपने चार साल के अथक प्रयास के बाद 2015 में स्लम एरिया के करीब 100 बच्चों को खेल के मैदान में उतारा। इन बच्चों ने उम्मीद से बढ़कर प्रदर्शन किया, उन्होंने राष्ट्रीय एवं राज्य स्तरीय प्रतियोगिता में मेडल भी जीते। इनमें से राष्ट्रीय प्रतियोगिता में बेहतर प्रदर्शन करने वाले पांच बच्चों का चयन अंतरराष्ट्रीय चैंपियनशिप के लिए हुआ है। ये पांचों खिलाड़ी श्रीलंका में भारत का डंका बजाएंगे। अमिता ने बताया कि 2011 में उन्होंने इन बच्चों को ट्रेनिंग देने की शुरुआत की।
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कुछ बच्चे करते हैं वेटर का काम
अमिता के पास मार्शल आर्ट की ट्रेनिंग लेने वाले कुछ बच्चे रोजी-रोटी और पढ़ाई के लिए पार्ट टाइम जॉब भी करते हैं। इनमें कुछ बच्चे वेटर का काम करते हैं। जिससे उनके घर का गुजारा चलता है।
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खुद बच्चों के लिए किट भी खरीदती हैं
मार्शल आर्ट की ट्रेनिंग देने के साथ ही अमिता बच्चों के लिए खुद किट भी खरीदती हैं। इस काम में उनके पति पीसी मरवाहा उनका पूरा सहयोग करते हैं। एक किट की कीमत करीब आठ से दस हजार रुपये है। वहीं कुछ दोस्त भी हैं जो बच्चों को चैंपियनशिप के दौरान फीस देते हैं।
पांच बच्चों का इंटरनेशनल टैंग सू डू चैंपियनशिप में चयन
15 से 17 जनवरी 2015 को गाजियाबाद में आयोजित नेशनल टैंग सू डू नेशनल चैंपियनशिप में अच्छे प्रदर्शन के आधार पर पांच बच्चों का चयन इंटरनेशनल टैंग सू डू चैंपियनशिप के लिए किया गया है। इनमें चार बच्चे स्लम एरिया के हैं। पांचवीं प्रतिभागी उनकी बेटी हिमांशी हैं। यह चैंपियनशिप श्रीलंका में जून में आयोजित की जाएगी। खात बात यह है कि चारों बच्चे (करण, सूरज, प्रिया व यास्मिन) ने मात्र सात माह की ट्रेनिंग में नेशनल से इंटरनेशनल चैंपियनशिप तक का सफर तय किया है। अमिता बताती हैं कि ये बच्चे कमाल के हैं। ये मार्शल आर्ट के लिए ही बने हैं।