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अकांक्ष के पिता अरुण सेन बोले- असली गुनाहगार को मिलेगी सजा, तब मिलेगा मृत बेटे को इंसाफ

Thu, 21 Nov 2019 10:52 AM IST
पंचकुला ब्‍यूरो न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़ Published by: पंचकुला ब्‍यूरो Updated Thu, 21 Nov 2019 10:52 AM IST
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father not happy from akansh sen murder case verdict, justice
फाइल फोटो
चंडीगढ़ जिला अदालत ने भले ही हरमेहताब को मृत्यु तक कैद में रहने की सजा सुना दी लेकिन अकांक्ष सेन के पिता अरुण सेन अभी भी इसे पूरा इंसाफ नहीं मान रहे। उनका कहना है कि उन्हें असल में इंसाफ तब मिलेगा जब असली गुनहगार बलराज रंधावा गिरफ्तार होगा और उसे सजा होगी। इसके लिए वह चंडीगढ़ प्रशासक वीपी सिंह बदनौर समेत कई अधिकारियों के सामने गुहार लगा चुके हैं।
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अरुण सेन ने बताया कि जिला अदालत के फैसले का वह सम्मान करते हैं लेकिन बलराज ने ही उनके बेटे को उनसे दूर किया है, जब तक उसे सजा नहीं होगी, उन्हें इंसाफ नहीं मिलेगा। कहा कि हरमेहताब के गिरफ्तार होने के बाद से अभी कहानी का सिर्फ एक चेहरा ही दुनिया के सामने आया है। बलराज की गिरफ्तारी के बाद पूरी कहानी साफ हो होगी, इसलिए उसका पकड़ा जाना जरूरी है। अकांक्ष सेन के पिता ने कहा कि हरमेहताब को सजा मिलने के बाद उम्मीद है कि पुलिस अब बलराज को गिरफ्तार करने में तेजी दिखाएगी।
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अरुण सेन ने बताया कि बलराज की गिरफ्तारी को लेकर वह प्रशासक वीपी सिंह बदनौर से मिले। प्रशासक को पूरे मामले की खुद जानकारी दी और बलराज को जल्द गिरफ्तार करने की मांग की। प्रशासक ने भी सकारात्मक रुख दिखाया और आश्वासन दिया कि बलराज जहां कहीं भी होगा, उसे गिरफ्तार करने की पूरी कोशिश की जाएगी। अरुण सेन ने आगे कहा कि बेटे को इंसाफ दिलाने के लिए जहां तक जाना पड़े, वह जाएंगे... हार नहीं मानेंगे।
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दोस्तों की मदद के लिए हमेशा तैयार रहता था अकांक्ष
अकांक्ष सेन एक लेखक, बिजनेसमैन और हर समय मदद के लिए तैयार रहने वाली शख्सियत थे। 12वीं कक्षा में वह अपने क्षेत्र के टॉपर थे। पाइन ग्रोव स्कूल से उन्होंने पढ़ाई की थी। स्कूल में वह अपनी कक्षा के हेड ब्वॉय भी थे। 12वीं कक्षा के बाद हिंदू कालेज से बी.कॉम ऑनर्स की पढ़ाई की। अकांक्ष किताबें पढ़ने के शौकीन थे और कविताएं भी लिखते थे। वह अपने करिअर को लेकर काफी उत्साही थे।


अकांक्ष के पिता ने बताया कि अकांक्ष दोस्तों, रिश्तेदारों के साथ-साथ किसी अनजान की मदद के लिए भी हमेशा तैयार रहते थे। असल मायने वह दिल का राजा था। वह दोस्तों को स्थापित करना चाहते थे इसलिए बिजनेसमैन बने। पिता ने बताया कि वह पूरे देश के लिए सोचते थे। ऐसे व्यक्ति का जाना, सभी के लिए नुकसान है।
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