{"_id":"67ba27fccff458afa7052bf8","slug":"agents-kept-roaming-in-13-countries-for-five-months-had-to-remain-hungry-panchkula-news-c-87-1-pk11006-119883-2025-02-23","type":"story","status":"publish","title_hn":"डंकी रूट का काला सच: पांच माह तक 13 देशों में घुमाते रहे एजेंट, भूखे-प्यासे रहे; पैरों में पड़े छाले","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
डंकी रूट का काला सच: पांच माह तक 13 देशों में घुमाते रहे एजेंट, भूखे-प्यासे रहे; पैरों में पड़े छाले
Sun, 23 Feb 2025 01:09 AM IST
चंडीगढ़ ब्यूरो
सुमित यादव, संवाद, पंचकूला
सुमित यादव, संवाद, पंचकूला
Published by: चंडीगढ़ ब्यूरो
Updated Sun, 23 Feb 2025 01:09 AM IST
सार
वीरेंद्र ट्रंप सरकार की ओर से 13 फरवरी को भेजे गए भारतीयों में शामिल था। वीरेंद्र ने बताया कि अमेरिका जाने के लिए ग्रुप में आठ लोग थे, वह भी टूरिस्ट वीजा के नाम पर विदेश में कमाने के झांसे में फंस गए थे। अमेरिका से हुई वापसी के बाद वीरेंद्र ने रोते हुए आपबीती सुनाई।
विज्ञापन
पंचकूला का वीरेंद्र यूएसए से डिपोर्ट
- फोटो : संवाद
विस्तार
अमेरिकी डॉलर कमाने की चाह में चंडीमंदिर निवासी वीरेंद्र को विदेश के जंगलों में पांच महीने तक दर-दर भटकना पड़ा। पांच माह तक एजेंट उसे 13 देशों में घुमाते रहे। भूखा-प्यासा रहना पड़ा। विरोध किया तो आठ दिन तक बंधक बनाकर रखा। चोरी छिपे अलग-अलग देशों में जाने के लिए तकलीफ भरा सफर तय किया।
वीरेंद्र ट्रंप सरकार की ओर से 13 फरवरी को भेजे गए भारतीयों में शामिल था। वीरेंद्र ने बताया कि अमेरिका जाने के लिए ग्रुप में आठ लोग थे, वह भी टूरिस्ट वीजा के नाम पर विदेश में कमाने के झांसे में फंस गए थे। अमेरिका से हुई वापसी के बाद वीरेंद्र ने रोते हुए आपबीती सुनाई।
विज्ञापन
विज्ञापन
वीरेंद्र ट्रंप सरकार की ओर से 13 फरवरी को भेजे गए भारतीयों में शामिल था। वीरेंद्र ने बताया कि अमेरिका जाने के लिए ग्रुप में आठ लोग थे, वह भी टूरिस्ट वीजा के नाम पर विदेश में कमाने के झांसे में फंस गए थे। अमेरिका से हुई वापसी के बाद वीरेंद्र ने रोते हुए आपबीती सुनाई।
विज्ञापन
पांच माह इन रूट का किया इस्तेमाल
वीरेंद्र ने बताया कि आरोपी अमेरिका भेजने के नाम पर पांच माह अलग-अलग यातायात मार्गों से कई देशों में घुमाते रहे। आरोपियों ने सबसे पहले दुबई भेजा। वहां से फिर बहरीन भेज दिया। इसके बाद तुर्की, ब्राजील, बोलिविया, पेरु, इक्वाडोर, कोलंबिया, पनामा, कोस्टारिका, होंडरस, गोटमाला ले गए थे। इन रास्तों में एजेंटों की तरफ से न तो खाने की व्यवस्था की जाती थी और न ही रहने की व्यवस्था करते थे। इस दौरान घर वालों से पैसा मंगाकर काम चलाना पड़ता था।
विज्ञापन