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दस साल बाद उर्दू शिक्षकों की भर्ती का रास्ता हुआ साफ
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चंडीगढ़। 544 जेबीटी उर्दू की भर्ती का रास्ता आखिरकार 10 साल के इंतजार के बाद साफ हो गया है। पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने हरियाणा सरकार को तीन माह में रिक्त पदों को भरने का आदेश दिया है।
हरियाणा सरकार ने 2012 में विज्ञापन निकाल कर जेबीटी उर्दू के 544 पदों के लिए आवेदन मांगा था। इस विज्ञापन के बाद कुल 261 आवेदन प्राप्त हुए थे और 233 उम्मीदवारों को इंटरव्यू केलिए बुलाया गया था। इसके बाद चयन कमेटी ने 75 लोगों की नियुक्ति की सिफारिश की थी। इसके खिलाफ बाकी आवेदकों ने हाईकोर्ट की शरण ली थी। हाईकोर्ट ने आदेश दिया था कि नए सिरे से चयन कमेटी बनाकर चयन प्रक्रिया को पूरा किया जाए। इसके खिलाफ चयनित शिक्षकों ने एडवोकेट मजलिज़ खान के माध्यम से हाईकोर्ट में अपील कर दी थी। इसके साथ ही हरियाणा सरकार ने भी सिंगल बेंच के आदेश को चुनौती दी थी। याचिकाएं लंबित रहते हाईकोर्ट ने चयन समिति गठित करने का आदेश दिया था। चयन समिति के समक्ष 158 आवेदकों को पेश होना था, लेकिन केवल 75 आवेदक ही चयन समिति के समक्ष पेश हुए। इनमें से भी 59 के नाम की चयन कमेटी ने सिफारिश की।
हाईकोर्ट के आदेश पर इस प्रक्रिया को पूरा किया गया। इस बीच पूर्व में चयनित 75 शिक्षकों की सेवाएं जारी रही। अब हाईकोर्ट ने इन शिक्षकों की नियुक्ति की प्रक्रिया को तीन माह में पूरा करने का आदेश दिया है। इन नवचयनित शिक्षकों को वरिष्ठता का लाभ तो पूर्व में नियुक्त आवेेदकों के बराबर मिलेगा, लेकिन कोई वित्तीय लाभ नहीं मिलेगा। हाईकोर्ट के आदेश के बाद आखिरकार 10 वर्ष बाद यह भर्ती पूरी होगी।
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हरियाणा सरकार ने 2012 में विज्ञापन निकाल कर जेबीटी उर्दू के 544 पदों के लिए आवेदन मांगा था। इस विज्ञापन के बाद कुल 261 आवेदन प्राप्त हुए थे और 233 उम्मीदवारों को इंटरव्यू केलिए बुलाया गया था। इसके बाद चयन कमेटी ने 75 लोगों की नियुक्ति की सिफारिश की थी। इसके खिलाफ बाकी आवेदकों ने हाईकोर्ट की शरण ली थी। हाईकोर्ट ने आदेश दिया था कि नए सिरे से चयन कमेटी बनाकर चयन प्रक्रिया को पूरा किया जाए। इसके खिलाफ चयनित शिक्षकों ने एडवोकेट मजलिज़ खान के माध्यम से हाईकोर्ट में अपील कर दी थी। इसके साथ ही हरियाणा सरकार ने भी सिंगल बेंच के आदेश को चुनौती दी थी। याचिकाएं लंबित रहते हाईकोर्ट ने चयन समिति गठित करने का आदेश दिया था। चयन समिति के समक्ष 158 आवेदकों को पेश होना था, लेकिन केवल 75 आवेदक ही चयन समिति के समक्ष पेश हुए। इनमें से भी 59 के नाम की चयन कमेटी ने सिफारिश की।
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हाईकोर्ट के आदेश पर इस प्रक्रिया को पूरा किया गया। इस बीच पूर्व में चयनित 75 शिक्षकों की सेवाएं जारी रही। अब हाईकोर्ट ने इन शिक्षकों की नियुक्ति की प्रक्रिया को तीन माह में पूरा करने का आदेश दिया है। इन नवचयनित शिक्षकों को वरिष्ठता का लाभ तो पूर्व में नियुक्त आवेेदकों के बराबर मिलेगा, लेकिन कोई वित्तीय लाभ नहीं मिलेगा। हाईकोर्ट के आदेश के बाद आखिरकार 10 वर्ष बाद यह भर्ती पूरी होगी।
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