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आयुष्मान भारत योजना: लाभार्थी होने के बावजूद मरीज को जेब से देने पड़े पैसे, तो कैसे मिलेगा फायदा

Sat, 05 Oct 2019 02:30 PM IST
पंचकुला ब्‍यूरो न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़ Published by: पंचकुला ब्‍यूरो Updated Sat, 05 Oct 2019 02:30 PM IST
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आयुष्मान योजना - फोटो : अमर उजाला
हिमाचल के बिलासपुर के रहने वाले धर्मपाल बेहद गरीब परिवार से हैं। सांस में दिक्कत होने की वजह से पीजीआई में दिखाया तो पता चला कि पेसमेकर डालना पड़ेगा। डॉक्टरों ने करीब एक लाख रुपये का खर्च बताया। उन्हें किसी ने आयुष्मान भारत के बारे में बताया। नाम चेक किया तो पता चला कि वे लाभार्थी हैं।
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भागे-भागे पीजीआई पहुंचे और आयुष्मान की खिड़की से अपनी फाइल बनवाई, लेकिन जब इलाज की बारी आई तो एक नया पेंच फंस गया। डॉक्टरों ने कहा कि डबल चेंबर वाला पेसमेकर पड़ेगा। अमृत फार्मेसी या दूसरी दुकानों में इसका रेट करीब 80 हजार रुपये है, जबकि आयुष्मान भारत के तहत तय किए पैकेज में सिर्फ 60 हजार रुपये का रेट तय किया गया है।
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ऐसी स्थिति में धर्मपाल को 20 हजार की राशि अपने पास से देनी पड़ी है। पेसमेकर तो डल गया है, मगर 20 हजार रुपये की राशि इकट्ठा करने में उन्हें काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ा है। आयुष्मान खिड़की के कई बार चक्कर लगाए। पैसों के लिए भी जुगाड़ करना पड़ा। ऐसे कई पैकेज हैं, जिनके तय रेट तो बहुत कम है, लेकिन असल में उनकी लागत काफी ज्यादा है।
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यही स्थिति न्यूरोइन्वेंसल से जुड़े केसों की भी है। इसमें मरीज का करीब तीन लाख रुपये का खर्च आता है, जबकि पैकेज का रेट करीब एक लाख रुपये है। पीजीआई के डॉक्टरों का कहना है कि पैकेज के रेट काफी कम हैं। इन्हें बढ़ाने की जरूरत है। ऐसे कई मरीज हैं, जिनके पास आयुष्मान के कार्ड हैं और इसके तहत इलाज भी कराया, मगर उन्हें अपनी जेब भी पैसा देना पड़ा है।

 

पैकेज में काफी अंतर

आयुष्मान भारत के तहत जो पैकेज तय किए गए हैं, वे दूसरी इंश्योरेंस कंपनी के मुकाबले कम हैं। हालांकि, कुछ रेट सेंट्रल गवर्नमेंट हेल्थ स्कीम (सीजीएचएस) से ज्यादा भी है। जब इसकी तुलना स्टेट इंश्योरेंस स्कीम से की जाती है तो वहां के रेट ज्यादा हैं। इस बारे में हाल ही में नेशनल हेल्थ अथॉरिटी और आईआरडीएआई ने एक रिपोर्ट भी तैयार की थी, जिसमें बताया गया था कि स्टेट इंश्योरेंस, सेंट्रल इंश्योरेंस व आयुष्मान के बीच काफी अंतर है।

पैकेज का नाम आयुष्मान भारत सीजीएचएस
पीटीसीए सिंगल स्टेंट 65000 75000
ट्रांसश्योरथ्रल रिसेक्शन आफ प्रोस्टेट 25000 30000
सिजेरियन डिलीवरी 9000 14-16 हजार
सिजेरियन हिस्टेरेक्टामी 16000 18-21 हजार
कोलप्टोमी 1200 3 से साढ़े तीन हजार
वेजिनोप्लास्टी 10000 14 से 17 हजार
 

रेट कम होने के कारण प्राइवेट हास्पिटल नहीं हैं शामिल

चंडीगढ़ में सिर्फ चार से पांच प्राइवेट हास्पिटल ही आयुष्मान पैनल में शामिल हुए हैं। जबकि शहर में इस समय छोटे-बड़े करीब 15 से 18 हास्पिटल होंगे। यहां पर पेशेंट रश भी ज्यादा है, लेकिन हास्पिटल इस स्कीम के तहत आना नहीं चाहते। प्राइवेट हास्पिटल के संचालकों का कहना है कि जब तक इस स्कीम के तहत प्राइवेट सेक्टर इनवाल्व नहीं होगा, तब तक यह योजना सक्सेसफुल नहीं होगी और हास्पिटल तब तक शामिल नहीं होंगे, जब तक पैकेज के रेट सही नहीं होंगे।

आयुष्मान के तहत सिजेरियन डिलीवरी का पैकेज सिर्फ नौ हजार रुपये तय किए गए हैं, जबकि चंडीगढ़ के प्राइवेट हास्पिटल में सिजेरियन डिलीवरी का रेट 80 हजार से एक लाख रुपये लगते हैं। ऐसे में प्राइवेट हास्पिटल क्यों आयुष्मान के पैकेज को लागू करेंगे। उनका सवाल भी वाजिब। वे कहते हैं कि प्राइवेट हास्पिटल को अपनी क्वालिटी खर्च करने के लिए काफी पैसा खर्च करना पड़ता है। उनका क्वांटिटी से नहीं बल्कि क्वालिटी से लेना देना है।

चंडीगढ़ एक मेडिकल हब है। यहां पर दूसरे प्रदेश से भी पेशेंट आते हैं। सरकारी अस्पताल पहले से ही भरे हुए हैं, जबकि चंडीगढ़ में प्राइवेट हास्पिटल पहले से ही कम है। उन्हें प्रमोट नहीं किया गया है। कम से कम छोटे नर्सिंग होम को ही प्रमोट करें और पैकेज भी बढ़ाए। दोनों कदमों से आयुष्मान सक्सेसफुल हो पाएगा।
-डॉ. संजीव भाटिया, स्वास्थ्य विशेषज्ञ व डायरेक्टर ग्लोबल हेल्थ केयर चंडीगढ़

भारत के 70 फीसदी स्वास्थ्य क्षेत्र को प्राइवेट सेक्टर कवर करता है और आयुष्मान भारत में प्राइवेट सेक्टर शामिल नहीं है। क्योंकि पैकेज के रेट बहुत कम हैं। जब तक पैकेज के रेट नहीं बढ़ेंगे, तब तक यह योजना सफल नहीं हो सकती। इस बारे में सरकार को सोचना होगा और तभी सही मायने में यह योजना सफल हो पाएगी।
-डॉ. नीरज, पूर्व प्रेसिडेंट आईएमए
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