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Panchkula News: सरस मेले में महिला शक्ति की झलक, समूह की मदद से बनी आत्मनिर्भर
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पंचकूला। सेक्टर-5 परेड ग्राउंड में चल रहा सरस मेला लोगों को खूब पसंद आ रहा है। मेले में देशभर से आए कारीगरों, स्वयं सहायता समूहों (एसएचजीएस) और ग्रामीण उद्योगों के स्टॉल्स ने हस्तशिल्प, हथकरघा, गृह-उद्योग उत्पाद, पारंपरिक व्यंजन और सांस्कृतिक प्रस्तुतियों से आगंतुकों का मन मोह लिया।
हस्तशिल्प, हथकरघा, ऑर्गेनिक व घरेलू उत्पाद, लोकनृत्य और देशी व्यंजनों से सजा फूड कोर्ट मुख्य आकर्षण बने हुए हैं। मेले में आजीविका मिशन की महिलाओं ने अपने उत्पाद बेचकर आर्थिक लाभ कमाया और आत्मनिर्भर बनने का सपना साकार किया।
प्रियंका की मेहनत रंग लाई
पिंजौर के गांव जटवाला की महिला प्रियंका ने समूह से 1 लाख का लोन लेकर वूलन स्वेटर और बेबी सेट बनाने का काम शुरू किया। मेहनत और लगन से तैयार किए उत्पादों को उन्होंने मेले में स्टॉल लगाकर बेचा। प्रियंका ने अच्छी कमाई की और अब आत्मनिर्भर बन चुकी हैं। स्थानीय लोग और मेले में आए ग्राहक उनके बनाए समान की सराहना कर रहे हैं।
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ब्राह्मण माजरा की महिला ने बनाई पहचान
पानीपत के गांव ब्राह्मण माजरा की महिला ने समूह से 50,000 का लोन लेकर कॉस्मेटिक और गारमेंट का काम शुरू किए। उन्होंने समय पर लोन चुका दिया। शुरुआत चुनौतीपूर्ण रही, लेकिन मेहनत और ग्राहकों के भरोसे से उनकी स्थिति मजबूत हुई। उन्होंने कहा कि इस काम ने उन्हें आर्थिक आजादी और सामाजिक पहचान दी और अन्य महिलाओं को भी अपने सपनों को पूरा करने के लिए प्रेरित किया।
सुमन का बेकरी व्यवसाय
कालका निवासी सुमन ने समूह से 1.5 लाख का लोन लेकर बेकरी व्यवसाय शुरू किया। शुरुआती चुनौतियों के बावजूद मेहनत और लगन से वह अपने व्यवसाय में सफल हुई और अब आत्मनिर्भर बन गई हैं। सुमन ने कहा कि महिलाओं को अपने हौसले और मेहनत पर भरोसा रखना चाहिए जिससे कोई भी लक्ष्य हासिल किया जा सकता है। उनके बेकरी उत्पादों की गुणवत्ता और मेहनत की सराहना लोग कर रहे हैं।
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हस्तशिल्प, हथकरघा, ऑर्गेनिक व घरेलू उत्पाद, लोकनृत्य और देशी व्यंजनों से सजा फूड कोर्ट मुख्य आकर्षण बने हुए हैं। मेले में आजीविका मिशन की महिलाओं ने अपने उत्पाद बेचकर आर्थिक लाभ कमाया और आत्मनिर्भर बनने का सपना साकार किया।
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प्रियंका की मेहनत रंग लाई
पिंजौर के गांव जटवाला की महिला प्रियंका ने समूह से 1 लाख का लोन लेकर वूलन स्वेटर और बेबी सेट बनाने का काम शुरू किया। मेहनत और लगन से तैयार किए उत्पादों को उन्होंने मेले में स्टॉल लगाकर बेचा। प्रियंका ने अच्छी कमाई की और अब आत्मनिर्भर बन चुकी हैं। स्थानीय लोग और मेले में आए ग्राहक उनके बनाए समान की सराहना कर रहे हैं।
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ब्राह्मण माजरा की महिला ने बनाई पहचान
पानीपत के गांव ब्राह्मण माजरा की महिला ने समूह से 50,000 का लोन लेकर कॉस्मेटिक और गारमेंट का काम शुरू किए। उन्होंने समय पर लोन चुका दिया। शुरुआत चुनौतीपूर्ण रही, लेकिन मेहनत और ग्राहकों के भरोसे से उनकी स्थिति मजबूत हुई। उन्होंने कहा कि इस काम ने उन्हें आर्थिक आजादी और सामाजिक पहचान दी और अन्य महिलाओं को भी अपने सपनों को पूरा करने के लिए प्रेरित किया।
सुमन का बेकरी व्यवसाय
कालका निवासी सुमन ने समूह से 1.5 लाख का लोन लेकर बेकरी व्यवसाय शुरू किया। शुरुआती चुनौतियों के बावजूद मेहनत और लगन से वह अपने व्यवसाय में सफल हुई और अब आत्मनिर्भर बन गई हैं। सुमन ने कहा कि महिलाओं को अपने हौसले और मेहनत पर भरोसा रखना चाहिए जिससे कोई भी लक्ष्य हासिल किया जा सकता है। उनके बेकरी उत्पादों की गुणवत्ता और मेहनत की सराहना लोग कर रहे हैं।