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बहनें नहीं बांध पाएंगी राखी
Panchkula
Updated Fri, 26 Jul 2013 05:33 AM IST
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पंचकूला। घग्गर नदी में वीरवार देर शाम मिले हितेश के शव के सेक्टर 15 स्थित घर पहुंचते ही चीख-पुकार मच गई। हितेश के पिता देवेंद्र कपूर ने अपने बेटे के शव की पहचान हाथ पर बने एक टैटू से की। उसके हाथ पर एच गुदा था। हितेश दो बहनों का इकलौता भाई था। पढ़ने में काफी होशियार और सीए की तैयारी कर रहे हितेश ने चंडीगढ़ सेक्टर-22 मॉडल स्कूल से बारहवीं की परीक्षा पास की थी। देवेंद कपूर ने कहा कि अब उनकी बेटियां भाई को राखी भी नहीं बांध पाएंगी। पूरे परिवार में रो-रोकर बुरा हाल है। देवेंद्र पंचकूला इंडस्ट्रियल फेज वन स्थित एक फैक्टरी में कांट्रेक्ट लेबर के तौर पर काम करते हैं। उन्होंने बताया कि उनका सपना था कि उनका बेटा पढ़-लिख कर मदद करेगा, लेकिन वह तो बीच में ही साथ छोड़ गया। हितेश बुधवार सुबह दोस्त की बर्थ डे पार्टी में जाने की बात कहकर निकल गया था। देर शाम पुलिस से सूचना मिली कि ऐसा वाकया हुआ है, आप आ जाओ।
सम्वित की भी हैं दो बहनें
सेक्टर-11 निवासी सम्वित रैना की भी दो बहनें हैं। सम्वित का शव घर पर पहुंचते ही चीख-पुकार मच गई। सम्वित की बहनें रुचिका और वसुधा बेसुध हो गईं। सम्वित के पिता तो थोड़ा संभले थे, लेकिन उनकी बहनों का तो बुरा हाल है। घर पर आसपास के लोग काफी लोग इकट्ठा थे। इसी बीच बारिश काफी तेज हो गई, लेकिन शव इतना फूल गया था कि उसे रख पाना मुश्किल था। 20 मिनट बाद अंतिम संस्कार को ले जाया गया। सम्वित का जन्म दो बहनों के दस साल के बाद हुआ था।
ग्रामीणों ने पेश की मिसाल
बुर्जकोटिया, दीवाना और अन्य गांवों के लोगों ने सामाजिकता की मिसाल पेश की। प्रशासन के सर्च अभियान में तीनों गांवों के लोग जुटे हैं। हर गांव से लगभग दस से 15 लोग अलग-अलग टीम बनाकर सर्च अभियान में लगे हैं। कालका एसडीएम मनीता मलिक ने बताया कि नदी के आसपास झाड़ियों में काफी सांप और जहरीले जानवर भी हैं। इस स्थिति के बारे में लोगों को पूरी जानकारी हैं। सर्च अभियान में वे पूरा साथ दे रहे हैं।
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बड़ी मुश्किल से पढ़ा रहे थे रविंदर को
सेक्टर-14 निवासी रविंदर के पिता चंचल सिंह ने बताया कि उनके बेटे रविंदर सिंह ने सीए का प्री-एग्जाम पास कर लिया था। चंचल सिंह एचआईडीसी में चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी हैं। बेटा पढ़ाई में काफी तेज था। चंचल सिंह के दफ्तर में काम करने वाले दुर्गा दास ने बताया कि चंचल बेटे को बहुत मुश्किल से पढ़ा रहे थे। रविंदर चंडीगढ़ में सीए की कोचिंग कर रहा था। चंचल के अंदर अपने बेटे को सीए बनाने का जुनून था। उन्हें उम्मीद भी कि उनकी मेहनत जरूर रंग लाएगी, लेकिन संघर्षों की दुनिया में उनका लाडला बीच में साथ छोड़कर चला गया। रविंदर का एक छोटा भाई है।
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सम्वित की भी हैं दो बहनें
सेक्टर-11 निवासी सम्वित रैना की भी दो बहनें हैं। सम्वित का शव घर पर पहुंचते ही चीख-पुकार मच गई। सम्वित की बहनें रुचिका और वसुधा बेसुध हो गईं। सम्वित के पिता तो थोड़ा संभले थे, लेकिन उनकी बहनों का तो बुरा हाल है। घर पर आसपास के लोग काफी लोग इकट्ठा थे। इसी बीच बारिश काफी तेज हो गई, लेकिन शव इतना फूल गया था कि उसे रख पाना मुश्किल था। 20 मिनट बाद अंतिम संस्कार को ले जाया गया। सम्वित का जन्म दो बहनों के दस साल के बाद हुआ था।
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ग्रामीणों ने पेश की मिसाल
बुर्जकोटिया, दीवाना और अन्य गांवों के लोगों ने सामाजिकता की मिसाल पेश की। प्रशासन के सर्च अभियान में तीनों गांवों के लोग जुटे हैं। हर गांव से लगभग दस से 15 लोग अलग-अलग टीम बनाकर सर्च अभियान में लगे हैं। कालका एसडीएम मनीता मलिक ने बताया कि नदी के आसपास झाड़ियों में काफी सांप और जहरीले जानवर भी हैं। इस स्थिति के बारे में लोगों को पूरी जानकारी हैं। सर्च अभियान में वे पूरा साथ दे रहे हैं।
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बड़ी मुश्किल से पढ़ा रहे थे रविंदर को
सेक्टर-14 निवासी रविंदर के पिता चंचल सिंह ने बताया कि उनके बेटे रविंदर सिंह ने सीए का प्री-एग्जाम पास कर लिया था। चंचल सिंह एचआईडीसी में चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी हैं। बेटा पढ़ाई में काफी तेज था। चंचल सिंह के दफ्तर में काम करने वाले दुर्गा दास ने बताया कि चंचल बेटे को बहुत मुश्किल से पढ़ा रहे थे। रविंदर चंडीगढ़ में सीए की कोचिंग कर रहा था। चंचल के अंदर अपने बेटे को सीए बनाने का जुनून था। उन्हें उम्मीद भी कि उनकी मेहनत जरूर रंग लाएगी, लेकिन संघर्षों की दुनिया में उनका लाडला बीच में साथ छोड़कर चला गया। रविंदर का एक छोटा भाई है।