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लावारिस शवों का इलेक्ट्रिक या एलपीजी सिस्टम से दहन पर करें विचार
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इलेक्ट्रिक या एलपीजी सिस्टम से लावारिस शवों के अंतिम संस्कार पर करें विचार
तीन साल के लावारिस शवों के आंकड़ों को देखने के बाद हाईकोर्ट ने चंडीगढ़ नगर निगम को दिया
अमर उजाला ब्यूरो
चंडीगढ़। पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने चंडीगढ़ नगर निगम को आदेश दिया है कि वह लावारिस शवों के दहन के लिए लकड़ी के स्थान पर इलेक्ट्रिक या एलपीजी पद्घति अपनाने पर विचार करे। अगली सुनवाई पर नगर निगम को हाईकोर्ट में इस बारे में अपना पक्ष रखना होगा।
हाईकोर्ट के आदेश के अनुरूप चंडीगढ़ नगर निगम की वकील दीपाली पुरी ने हाईकोर्ट को जानकारी दी कि वर्ष 2016 में 167, 2017 में 187 तथा 2018 में 139 लावारिस शवों का शहर के शमशान घाटों पर दहन किया गया। कोर्ट ने कहा कि 503 शवों का आंकड़ा एक बड़ी संख्या है। कोर्ट ने कहा कि लकड़ी जलाने से प्रदूषण बढ़ता है और ऐसे में उसके स्थान पर एलपीजी या इलेक्ट्रिक सिस्टम का प्रयोग किया जा सकता है। कोर्ट ने निगम की वकील से पूछा कि क्या लावारिस शवों का दहन इन माध्यमों से किया जा सकता है। इस पर दीपाली पुरी ने कहा कि वह इस बारे में निगम का पक्ष लेने के बाद ही कुछ कह सकती हैं। इस पर हाईकोर्ट ने नगर निगम को आदेश दिए हैं कि वे हाईकोर्ट द्वारा दिए गए सुझाव पर निर्णय लेकर अगली सुनवाई पर कोर्ट को सूचित करें।
बाक्स-------
पीपीपी के तहत सरकारी मकानों की मरम्मत पर करें विचार
इसी बीच शहर के सरकारी मकानों की बदहाल स्थिति पर हाईकोर्ट ने यूटी प्रशासन से जवाब मांगा। यूटी प्रशासन ने कहा कि इस दिशा में काम किया जा रहा है। इस पर हाईकोर्ट ने यूटी प्रशासन को आदेश दिए कि वे पब्लिक प्राईवेट पार्टनरशिप के तहत इन मकानों की मरम्मत के काम पर विचार करें। हाईकोर्ट ने यूटी प्रशासन को अगली सुनवाई के दौरान इस बारे में प्रशासन का पक्ष रखने के आदेश दिए हैं।
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तीन साल के लावारिस शवों के आंकड़ों को देखने के बाद हाईकोर्ट ने चंडीगढ़ नगर निगम को दिया
अमर उजाला ब्यूरो
चंडीगढ़। पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने चंडीगढ़ नगर निगम को आदेश दिया है कि वह लावारिस शवों के दहन के लिए लकड़ी के स्थान पर इलेक्ट्रिक या एलपीजी पद्घति अपनाने पर विचार करे। अगली सुनवाई पर नगर निगम को हाईकोर्ट में इस बारे में अपना पक्ष रखना होगा।
हाईकोर्ट के आदेश के अनुरूप चंडीगढ़ नगर निगम की वकील दीपाली पुरी ने हाईकोर्ट को जानकारी दी कि वर्ष 2016 में 167, 2017 में 187 तथा 2018 में 139 लावारिस शवों का शहर के शमशान घाटों पर दहन किया गया। कोर्ट ने कहा कि 503 शवों का आंकड़ा एक बड़ी संख्या है। कोर्ट ने कहा कि लकड़ी जलाने से प्रदूषण बढ़ता है और ऐसे में उसके स्थान पर एलपीजी या इलेक्ट्रिक सिस्टम का प्रयोग किया जा सकता है। कोर्ट ने निगम की वकील से पूछा कि क्या लावारिस शवों का दहन इन माध्यमों से किया जा सकता है। इस पर दीपाली पुरी ने कहा कि वह इस बारे में निगम का पक्ष लेने के बाद ही कुछ कह सकती हैं। इस पर हाईकोर्ट ने नगर निगम को आदेश दिए हैं कि वे हाईकोर्ट द्वारा दिए गए सुझाव पर निर्णय लेकर अगली सुनवाई पर कोर्ट को सूचित करें।
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पीपीपी के तहत सरकारी मकानों की मरम्मत पर करें विचार
इसी बीच शहर के सरकारी मकानों की बदहाल स्थिति पर हाईकोर्ट ने यूटी प्रशासन से जवाब मांगा। यूटी प्रशासन ने कहा कि इस दिशा में काम किया जा रहा है। इस पर हाईकोर्ट ने यूटी प्रशासन को आदेश दिए कि वे पब्लिक प्राईवेट पार्टनरशिप के तहत इन मकानों की मरम्मत के काम पर विचार करें। हाईकोर्ट ने यूटी प्रशासन को अगली सुनवाई के दौरान इस बारे में प्रशासन का पक्ष रखने के आदेश दिए हैं।
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