फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Chandigarh ›   Panchkula News ›   अप्रैल माह से बढ़े हुए रेट्स के खिलाफ था संघ्सर्ष चालू

अप्रैल माह से बढ़े हुए रेट्स के खिलाफ था संघ्सर्ष चालू

Tue, 10 Jul 2018 02:00 AM IST
Updated Tue, 10 Jul 2018 02:00 AM IST
विज्ञापन
अप्रैल माह से बढ़े हुए रेट्स के खिलाफ था संघ्सर्ष चालू
अप्रैल से चल रहा था संघर्ष, अब आया काम
विज्ञापन

मेयर सहित पार्षद और रेजिडेंट्स एमओयू रद्द करने की मांग कर रहे थे
अमर उजाला ब्यूरो
चंडीगढ़। पेड पार्किंग के बढ़े रेट को लेकर अप्रैल से ही संघर्ष शुरू हो गया था। मेयर देवेश मोदगिल और उनके गुट के पार्षद शुरू से ही चाहते थे कि रेट कम हो या फिर कंपनी के साथ समझौता रद्द किया जाए। सदन ने एमओयू रद्द करने का प्रस्ताव प्रशासन को भी भेजा, लेकिन प्रशासन ने नगर निगम को खुद ही निर्णय लेने के लिए वापस भेज दिया। शहरवासी और व्यापारी इस बढ़े हुए रेट्स से परेशान थे। व्यापारियों और रेजिडेंट्स की एसोसिएशन ने पार्किंग में मिल रही सुविधाओं पर सवाल भी उठाए।
अप्रैल माह से लेकर जून तक हर बैठक में पेड पार्किंग चलाने वाली आर्य इंफ्रा कंपनी का मामला उछला, लेकिन यही बात सामने आई कि एमओयू के अनुसार समझौता रद्द नहीं किया जा सकता। अगर सदन समझौता रद्द करता है तो पंजाब म्युनिसिपल एक्ट के 416 के तहत जो नुकसान होगा, उसकी रिकवरी पार्षदों पर डल जाएगी।
विज्ञापन

पार्किंग को चेक करने के लिए मेयर ने पूर्व मेयर राज बाला मलिक के नेतृत्व में कमेटी भी बनाई थी। कमेटी ने लंबी चौड़ी अपनी रिपोर्ट दी, इसके बावजूद आर्य इंफ्रा कंपनी के साथ समझौता रद्द नहीं किया जा सका, लेकिन अब किस्त जमा न होने के मामले में नगर निगम ने आर्य इंफ्रा कंपनी का एमओयू रद्द कर लिया। सदन में इसको लेकर राजनीति भी शुरू हुई क्योकि पार्षदों का एक गुट सदन में कहता था कि एमओयू के अनुसार सदन आर्य इंफ्रा कंपनी के साथ समझौता खारिज नहीं कर सकता। मालूम हो कि एक अप्रैल से रेट बढ़ गए थे, जबकि पिछले साल दिसंबर माह से पहले दोपहिया वाहन से दो और कार से 5 रुपये वसूल किए जाते थे। उस समय घंटे वाइज भी रेट नहीं बढ़ते थे। पिछले माह 29 जून को हुई बैठक में कमिश्नर ने आश्वासन दिया था कि एमओयू के दायरे में रहते हुए वह कार्रवाई करेंगे।
विज्ञापन
विज्ञापन


कोट..
स्मार्ट पार्किंग के नाम पर सिर्फ शहरवासियों को लूटा गया। एंट्री टैक्स वसूल किया जा रहा था। अब नगर निगम को पुराने रेट्स ही लागू करने चाहिए। बढ़े हुए रेट से लोगों पर भारी बोझ पड़ गया था।
-बलजिंदर सिंह बिट्टू, अध्यक्ष फासवेक

कोट..
व्यापारियों और लोगों का मतलब पेड पार्किंग के रेट कम करने से है। चाहे वह कंपनी करे या नगर निगम। निगम पेड पार्किंग चलाती है तो प्रवेश द्वारों पर सभ्य कर्मचारी तैनात करे न कि मजदूर। अगर किसी ग्राहक के साथ बदतमीजी हुई तो व्यापारी इसका विरोध करेंगे।
-नीरज बजाज, अध्यक्ष, सेक्टर-17 बिजनेस प्रमोशन काउंसिल

कोट..
रेट काफी ज्यादा थे। बाजारों के कारोबार पर असर पड़ रहा था। स्मार्ट पार्किंग में भीतर वाहन लगाने के लिए कर्मचारी तैनात होने चाहिए, लेकिन ऐसा नहीं किया जा रहा था। अब रेट कम कर शहरवासियों और व्यापारियों को राहत देनी चाहिए।

-चरणजीव सिंह, चेयरमैन, व्यापार मंडल

कोट..
हर किसी का अतिरिक्त खर्चा बढ़ गया था। एक चालक को कई कई पार्किंग में जाना पड़ता था। इससे कारोबार पर भी असर पड़ रहा था। नगर निगम को पब्लिक फ्रेंडली पार्किंग बनानी चाहिए।
-त्रिभुवन चोपड़ा, महासचिव, सेक्टर-17 व्यापार मंडल
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed