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मेयर ने नड़डा सेकहा, अधिकारों के साथ विभाग ट्रांसफर करावाओ
Updated Wed, 21 Jun 2017 09:23 PM IST
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‘अधिकारों के साथ विभाग निगम को दिलाओ’
अमर उजाला ब्यूरो
चंडीगढ़।
स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा के समक्ष मेयर आशा जसवाल ने प्राइमरी स्वास्थ्य विभाग को पूरी तरह से निगम को दिलवाने की मांग की। जसवाल ने कहा कि प्राइमरी स्वास्थ्य और शिक्षा विभाग 5 साल से निगम को शिफ्ट किए गए हैं, लेकिन डिस्पेंसरियों की हालत में अभी तक इसलिए सुधार नहीं हो पाया क्योंकि प्रशासन ने पूरी तरह से अधिकारों के साथ ये विभाग ट्रांसफर नहीं किए। अभी यहां पर डॉक्टरों और स्टाफ को नियुक्त करने और उनके तबादले का अधिकार प्रशासन के पास ही है। यहां तक की दवाएं भी प्रशासन ही उपलब्ध करवाता है।
निगम डिस्पेंसरियों का विकास नहीं कर पा रहा है। मेयर आशा जसवाल ने योग दिवस के मौके पर सेक्टर-17 में जब यह बात केंद्रीय मंत्री के समक्ष उठाई, उस समय प्रशासक वीपी सिंह बदनौर भी मौजूद थे। मेयर ने स्वास्थ्य मंत्री से कहा कि अगर डिस्पेंसरियों में सुविधाएं मिलेंगी तो ही पीजीआई और सेक्टर-32 जीएमसीएच का बोझ कम होगा। पूरे अधिकार न मिलने के कारण जो बजट प्राइमरी शिक्षा और स्वास्थ्य के विकास के लिए पास होता है वह खर्च भी नहीं हो पाता है।
मालूम हो कि नगर निगम का सदन यह प्रस्ताव पास कर चुका है कि प्रशासन ने अगर प्राइमरी शिक्षा और स्वास्थ्य विभाग पूरी तरह से देने है तो वह नगर निगम को दे अगर प्रशासन ऐसा नहीं करता तो यह दोनो विभाग प्रशासन को वापस ले लेने चाहिए।
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मेयर ने स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा से लगाई गुहार
कहा, डिस्पेंसरियों की हालत सुधरेगी तभी पीजीआई और जीएमसीएच-32 में बोझ होगा कम
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अमर उजाला ब्यूरो
चंडीगढ़।
स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा के समक्ष मेयर आशा जसवाल ने प्राइमरी स्वास्थ्य विभाग को पूरी तरह से निगम को दिलवाने की मांग की। जसवाल ने कहा कि प्राइमरी स्वास्थ्य और शिक्षा विभाग 5 साल से निगम को शिफ्ट किए गए हैं, लेकिन डिस्पेंसरियों की हालत में अभी तक इसलिए सुधार नहीं हो पाया क्योंकि प्रशासन ने पूरी तरह से अधिकारों के साथ ये विभाग ट्रांसफर नहीं किए। अभी यहां पर डॉक्टरों और स्टाफ को नियुक्त करने और उनके तबादले का अधिकार प्रशासन के पास ही है। यहां तक की दवाएं भी प्रशासन ही उपलब्ध करवाता है।
निगम डिस्पेंसरियों का विकास नहीं कर पा रहा है। मेयर आशा जसवाल ने योग दिवस के मौके पर सेक्टर-17 में जब यह बात केंद्रीय मंत्री के समक्ष उठाई, उस समय प्रशासक वीपी सिंह बदनौर भी मौजूद थे। मेयर ने स्वास्थ्य मंत्री से कहा कि अगर डिस्पेंसरियों में सुविधाएं मिलेंगी तो ही पीजीआई और सेक्टर-32 जीएमसीएच का बोझ कम होगा। पूरे अधिकार न मिलने के कारण जो बजट प्राइमरी शिक्षा और स्वास्थ्य के विकास के लिए पास होता है वह खर्च भी नहीं हो पाता है।
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मालूम हो कि नगर निगम का सदन यह प्रस्ताव पास कर चुका है कि प्रशासन ने अगर प्राइमरी शिक्षा और स्वास्थ्य विभाग पूरी तरह से देने है तो वह नगर निगम को दे अगर प्रशासन ऐसा नहीं करता तो यह दोनो विभाग प्रशासन को वापस ले लेने चाहिए।
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मेयर ने स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा से लगाई गुहार
कहा, डिस्पेंसरियों की हालत सुधरेगी तभी पीजीआई और जीएमसीएच-32 में बोझ होगा कम