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पलायन जारी : लॉकडाउन के डर से पिंजौर से निजी बस में 45 मजदूर यूपी रवाना
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पिंजौर। प्रवासी मजदूरों का शहर से पलायन लगातार जारी है। रविवार को भी 45 के करीब मजदूर निजी बस के माध्यम से बरेली, बदायूं (उत्तर प्रदेश) के लिए रवाना हो गए।
जितेंद्र, नन्हे, रिंकू, मनोज समेत अन्य मजदूरों ने बताया कि सरकार ने आज से 7 दिन का लॉकडाउन बढ़ा दिया है। कहीं ऐसा न हो कि बीते साल की तरह लॉकडाउन को दो तीन महीने का न कर दिया जाए। ऐसी स्थिति में वे वापस घर नहीं पहुंच सकेंगे। यहां काम न होने की वजह से समस्याओं का सामना करना पड़ेगा। मजदूरों का आरोप है कि सरकार लॉकडाउन के दौरान उनकी कोई सहायता नहीं करती। पिछली बार भी राशन आदि लेने के लिए उन्हें दर-दर ठोकरें खानी पड़ीं। सामाजिक संगठनों की ओर से की जा रही भोजन व्यवस्था के चलते उन्हें खाना नसीब हो गया नहीं तो उनके भूखे मरने तक की नौबत आ जाती। उन्हें डर है कि सरकार यदि अब लॉकडाउन को महीनों के लिए बढ़ाती है तो उन्हें दोबारा से परेशानी का सामना करना पड़ सकता है।
घर जाकर खाना तो मिल जाएगा
मैं जिला बरेली का रहने वाला हूं। लॉकडाउन में काम नहीं होता परंतु किराया सहित अन्य खर्चे होते हैं। घर जाकर कम से कम सुकून से खाना तो मिलता रहेगा। अभी समय है परंतु बाद में सरकार ने लॉकडाउन लगा दिया तो घर नहीं पहुंच पाएंगे। काम करने के बाद भी लोग पैसे नहीं देते यहां भूखे मरने से क्या फायदा।
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-जितेंद्र कुमार, प्रवासी मजदूर, बरेली
लॉकडाउन में नहीं मिलता है काम
मैं बेलदारी का काम करता हूं, लेकिन अब वापस अपने घर यूपी जा रहा हूं। लॉकडाउन में यहां कोई काम नहीं मिलता और खाने के लाले पड़ जाते हैं। शनिवार, रविवार दो दिन के लॉकडाउन में काम नहीं मिला। अब लॉकडाउन और बढ़ा दिया है। काम न होने की वजह से यहां रुककर क्या करेंगे।
नन्हे लाल, प्रवासी मजदूर, यूपी
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जितेंद्र, नन्हे, रिंकू, मनोज समेत अन्य मजदूरों ने बताया कि सरकार ने आज से 7 दिन का लॉकडाउन बढ़ा दिया है। कहीं ऐसा न हो कि बीते साल की तरह लॉकडाउन को दो तीन महीने का न कर दिया जाए। ऐसी स्थिति में वे वापस घर नहीं पहुंच सकेंगे। यहां काम न होने की वजह से समस्याओं का सामना करना पड़ेगा। मजदूरों का आरोप है कि सरकार लॉकडाउन के दौरान उनकी कोई सहायता नहीं करती। पिछली बार भी राशन आदि लेने के लिए उन्हें दर-दर ठोकरें खानी पड़ीं। सामाजिक संगठनों की ओर से की जा रही भोजन व्यवस्था के चलते उन्हें खाना नसीब हो गया नहीं तो उनके भूखे मरने तक की नौबत आ जाती। उन्हें डर है कि सरकार यदि अब लॉकडाउन को महीनों के लिए बढ़ाती है तो उन्हें दोबारा से परेशानी का सामना करना पड़ सकता है।
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घर जाकर खाना तो मिल जाएगा
मैं जिला बरेली का रहने वाला हूं। लॉकडाउन में काम नहीं होता परंतु किराया सहित अन्य खर्चे होते हैं। घर जाकर कम से कम सुकून से खाना तो मिलता रहेगा। अभी समय है परंतु बाद में सरकार ने लॉकडाउन लगा दिया तो घर नहीं पहुंच पाएंगे। काम करने के बाद भी लोग पैसे नहीं देते यहां भूखे मरने से क्या फायदा।
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-जितेंद्र कुमार, प्रवासी मजदूर, बरेली
लॉकडाउन में नहीं मिलता है काम
मैं बेलदारी का काम करता हूं, लेकिन अब वापस अपने घर यूपी जा रहा हूं। लॉकडाउन में यहां कोई काम नहीं मिलता और खाने के लाले पड़ जाते हैं। शनिवार, रविवार दो दिन के लॉकडाउन में काम नहीं मिला। अब लॉकडाउन और बढ़ा दिया है। काम न होने की वजह से यहां रुककर क्या करेंगे।
नन्हे लाल, प्रवासी मजदूर, यूपी