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25 किलो हेरोइन बहुत बड़ी मात्रा, पुलिस ने प्लांट की मानना संभव नहीं : हाईकोर्ट
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चंडीगढ़। पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने 25 किलो हेरोइन की तस्करी के मामले में आरोपी की 20 साल की सजा को बरकरार रखते हुए अमृतसर की अदालत के फैसले के खिलाफ अपील को खारिज कर दिया है। हाईकोर्ट ने कहा कि पुलिस 25 किलो हेरोइन प्लांट कर दे यह मानना संभव नहीं है।
एफआईआर के अनुसार जनवरी 2010 को अमृतसर में स्टेट स्पेशल ऑपरेशन सेल को गुप्त सूचना मिली थी कि पाकिस्तान से आई हेरोइन को राजिंदर सिंह व अन्य आगे सप्लाई करने जा रहे हैं। इसके बाद पुलिस ने तीन टीमें बनाकर टवेरा कार को रोका और गजटेड ऑफिसर की मौजूदगी में तलाशी हुई। इस दौरान एक-एक किलो को 25 पैकेट बरामद हुए जो एफएसएल की जांच में हेरोइन के पाए गए। अमृतसर की फार्स्ट ट्रैक कोर्ट ने 2012 में याची को दोषी मान 20 साल की सजा सुनाई थी।
सजा के खिलाफ याची ने हाईकोर्ट में अपील की थी जिसका 12 साल बाद हाईकोर्ट ने निपटारा किया है। हाईकोर्ट ने कहा कि याची की यह दलील स्वीकार नहीं की जा सकती कि उसे इस मामले में नशा प्लांट करके पुलिस ने फंसाया है। पुलिस अधिकारी इतनी बड़ी मात्रा में नशा प्लांट करें यह बात स्वीकार नहीं की जा सकती। इसके साथ ही याची ऐसा कोई भी कारण बताने में नाकाम रहा जिसके चलते पुलिस उसे झूठे मामले में फंसा रही हो। साथ ही इस मामले में सैंपल लेते हुए तय प्रक्रिया का पूरी तरह से पालन किया गया था और सबूतों की कड़ी कहीं भी नहीं टूटती। एफएसएल में भेजे गए सैंपल भी पूरी तरह से सही पाए गए। हाईकोर्ट ने कहा कि इस मामले में सभी गवाह पुलिस वाले थे केवल इस आधार पर नशे की तस्करी के इतने बड़े मामले में आरोपी को बरी नहीं किया जा सकता। इन टिप्पणियों के साथ ही हाईकोर्ट ने ट्रायल कोर्ट के आदेश के खिलाफ अपील को खारिज कर दिया।
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एफआईआर के अनुसार जनवरी 2010 को अमृतसर में स्टेट स्पेशल ऑपरेशन सेल को गुप्त सूचना मिली थी कि पाकिस्तान से आई हेरोइन को राजिंदर सिंह व अन्य आगे सप्लाई करने जा रहे हैं। इसके बाद पुलिस ने तीन टीमें बनाकर टवेरा कार को रोका और गजटेड ऑफिसर की मौजूदगी में तलाशी हुई। इस दौरान एक-एक किलो को 25 पैकेट बरामद हुए जो एफएसएल की जांच में हेरोइन के पाए गए। अमृतसर की फार्स्ट ट्रैक कोर्ट ने 2012 में याची को दोषी मान 20 साल की सजा सुनाई थी।
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सजा के खिलाफ याची ने हाईकोर्ट में अपील की थी जिसका 12 साल बाद हाईकोर्ट ने निपटारा किया है। हाईकोर्ट ने कहा कि याची की यह दलील स्वीकार नहीं की जा सकती कि उसे इस मामले में नशा प्लांट करके पुलिस ने फंसाया है। पुलिस अधिकारी इतनी बड़ी मात्रा में नशा प्लांट करें यह बात स्वीकार नहीं की जा सकती। इसके साथ ही याची ऐसा कोई भी कारण बताने में नाकाम रहा जिसके चलते पुलिस उसे झूठे मामले में फंसा रही हो। साथ ही इस मामले में सैंपल लेते हुए तय प्रक्रिया का पूरी तरह से पालन किया गया था और सबूतों की कड़ी कहीं भी नहीं टूटती। एफएसएल में भेजे गए सैंपल भी पूरी तरह से सही पाए गए। हाईकोर्ट ने कहा कि इस मामले में सभी गवाह पुलिस वाले थे केवल इस आधार पर नशे की तस्करी के इतने बड़े मामले में आरोपी को बरी नहीं किया जा सकता। इन टिप्पणियों के साथ ही हाईकोर्ट ने ट्रायल कोर्ट के आदेश के खिलाफ अपील को खारिज कर दिया।
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