{"_id":"5c4f66d4bdec224e364f96e9","slug":"21548707540-panchkula-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"नगर निगम ने 32 करोड़ रुपये का बकाया राशि मांगी","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
नगर निगम ने 32 करोड़ रुपये का बकाया राशि मांगी
विज्ञापन
प्रशासन पर निगम का 32 करोड़ रुपये का बकाया, लिखा पत्र
सबहेड
नगर निगम को प्रशासन ने लंबे समय से नहीं दिया है सरकारी इमारतों का सर्विस टैक्स
अमर उजाला ब्यूरो
चंडीगढ़। चंडीगढ़ नगर निगम को आय के स्रोत बढ़ाने की हिदायत देने वाले चंडीगढ़ प्रशासन खुद निगम का करोड़ों रुपये का देनदार है। इस संबंध में निगम ने प्रशासन को पत्र लिखकर बकाया राशि की मांग की है।
चंडीगढ़ प्रशासन ने गत कई वर्षों से नगर निगम को सेवा कर (सर्विस टैक्स) ही अदा नहीं किया है। प्रशासन को सेवा कर के रूप में निगम को 32.93 करोड़ का भुगतान करना है। अगर निगम इस पर ब्याज जोड़ेगा तो और अधिक राशि बनेगी। प्रशासन के संबंधित अधिकारियों से पत्रों का जवाब न मिलने के बाद निगम के अधिकारियों ने अब प्रशासन के वरिष्ठ अधिकारियों से बैठक कर बकाया राशि अदा करने का अनुरोध किया है।
चंडीगढ़ प्रशासन के अधिकारियों ने संबंधित इंजीनियरिंग विभाग अधिकारियों को निर्देश दिया है कि वह निगम की कर शाखा से लंबित कर शुल्क की विस्तृत जानकारी लें। निगम के संबंधित अधिकारी का कहना है कि निगम को सबसे अधिक सेवा शुल्क चंडीगढ़ प्रशासन से ही मिलता है। पर वहां से पिछले कुछ वर्षों से भुगतान नहीं हो रहा है।
विज्ञापन
निगम ने पूर्व में इसके लिए कई पत्र भेजे व उसके बाद प्रशासन के वित्त सचिव ने इस मुद्दे के निपटारे के लिए एक समिति का गठन किया था। इस कमेटी की विशेष बैठक में निगम अधिकारियों ने इस लंबित राशि के भुगतान का अनुरोध किया ताकि निगम की डगमगाती वित्तीय स्थिति में कुछ सुधार हो सके। बताया जाता है कि शहर में करीब 250 ऐसी सरकारी इमारतें हैं, जिनका सर्विस टैक्स प्रशासन को अदा करना है। निगम द्वारा इसके लिए प्रशासन के मुख्य अभियंता कार्यालय के नाम पर नोटिस भेजे गए हैं। इन भवनों में यूटी सचिवालय भवन, रॉक गार्डन, पंजाब और हरियाणा उच्च न्यायालय, विधानसभा भवन, जिला अदालत परिसर, पंजाब राजभवन, हरियाणा राजभवन, आईएसबीटी 17, वन और वन्यजीव विभाग, सरकारी कॉलेज, औषधालय, सामान्य अस्पताल -16 , क्रिकेट स्टेडियम -16, फुटबॉल स्टेडियम, पुलिस लाइन और यातायात पुलिस लाइन शामिल हैं।
कोट्स
सर्विस टैक्स की राशि बकाया है। इस संबंध में नगर निगम ने प्रशासन को पत्र लिखा है। प्रशासन की ओर से कुछ राशि जमा कराई गई है या नहीं, इसकी भी ली जा रही है।
केके यादव, आईएएस, कमिश्नर, नगर निगम चंडीगढ़
विज्ञापन
सबहेड
नगर निगम को प्रशासन ने लंबे समय से नहीं दिया है सरकारी इमारतों का सर्विस टैक्स
अमर उजाला ब्यूरो
चंडीगढ़। चंडीगढ़ नगर निगम को आय के स्रोत बढ़ाने की हिदायत देने वाले चंडीगढ़ प्रशासन खुद निगम का करोड़ों रुपये का देनदार है। इस संबंध में निगम ने प्रशासन को पत्र लिखकर बकाया राशि की मांग की है।
चंडीगढ़ प्रशासन ने गत कई वर्षों से नगर निगम को सेवा कर (सर्विस टैक्स) ही अदा नहीं किया है। प्रशासन को सेवा कर के रूप में निगम को 32.93 करोड़ का भुगतान करना है। अगर निगम इस पर ब्याज जोड़ेगा तो और अधिक राशि बनेगी। प्रशासन के संबंधित अधिकारियों से पत्रों का जवाब न मिलने के बाद निगम के अधिकारियों ने अब प्रशासन के वरिष्ठ अधिकारियों से बैठक कर बकाया राशि अदा करने का अनुरोध किया है।
विज्ञापन
चंडीगढ़ प्रशासन के अधिकारियों ने संबंधित इंजीनियरिंग विभाग अधिकारियों को निर्देश दिया है कि वह निगम की कर शाखा से लंबित कर शुल्क की विस्तृत जानकारी लें। निगम के संबंधित अधिकारी का कहना है कि निगम को सबसे अधिक सेवा शुल्क चंडीगढ़ प्रशासन से ही मिलता है। पर वहां से पिछले कुछ वर्षों से भुगतान नहीं हो रहा है।
विज्ञापन
निगम ने पूर्व में इसके लिए कई पत्र भेजे व उसके बाद प्रशासन के वित्त सचिव ने इस मुद्दे के निपटारे के लिए एक समिति का गठन किया था। इस कमेटी की विशेष बैठक में निगम अधिकारियों ने इस लंबित राशि के भुगतान का अनुरोध किया ताकि निगम की डगमगाती वित्तीय स्थिति में कुछ सुधार हो सके। बताया जाता है कि शहर में करीब 250 ऐसी सरकारी इमारतें हैं, जिनका सर्विस टैक्स प्रशासन को अदा करना है। निगम द्वारा इसके लिए प्रशासन के मुख्य अभियंता कार्यालय के नाम पर नोटिस भेजे गए हैं। इन भवनों में यूटी सचिवालय भवन, रॉक गार्डन, पंजाब और हरियाणा उच्च न्यायालय, विधानसभा भवन, जिला अदालत परिसर, पंजाब राजभवन, हरियाणा राजभवन, आईएसबीटी 17, वन और वन्यजीव विभाग, सरकारी कॉलेज, औषधालय, सामान्य अस्पताल -16 , क्रिकेट स्टेडियम -16, फुटबॉल स्टेडियम, पुलिस लाइन और यातायात पुलिस लाइन शामिल हैं।
कोट्स
सर्विस टैक्स की राशि बकाया है। इस संबंध में नगर निगम ने प्रशासन को पत्र लिखा है। प्रशासन की ओर से कुछ राशि जमा कराई गई है या नहीं, इसकी भी ली जा रही है।
केके यादव, आईएएस, कमिश्नर, नगर निगम चंडीगढ़