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चार घंटे से ज्यादा स्मार्टफोन के इस्तेमाल से बच्चों की आंखों में भैंगापन

Sat, 10 Nov 2018 12:46 AM IST
Updated Sat, 10 Nov 2018 12:46 AM IST
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चार घंटे से ज्यादा स्मार्टफोन के इस्तेमाल से बच्चों की आंखों में भैंगापन
चार घंटे से ज्यादा स्मार्टफोन के इस्तेमाल से बच्चों की आंखों में भैंगापन
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पीजीआई की स्टडी में खुलासा, तीन बच्चे पहुंचे, स्मार्टफोन दूर किया तो ठीक हुए
डेढ़ महीने से रोजाना चार घंटे से ज्यादा स्मार्टफोन पर बिता रहे थे बच्चे
अमर उजाला ब्यूरो
चंडीगढ़। यह खबर उन अभिभावकों के लिए है, जिनके बच्चे कई घंटे तक स्मार्टफोन का इस्तेमाल करते हैं। स्मार्टफोन के लगातार इस्तेमाल से बच्चों की आंखों में भैंगापन और डबल विजन की शिकायत हो सकती है। पीजीआई के एडवांस आई सेंटर में तीन ऐसे बच्चे पहुंचे हैं, जो दिन में चार घंटे से ज्यादा स्मार्टफोन का इस्तेमाल कर रहे थे। इससे इन बच्चों की आंखों की मांसपेशियों में ऐंठन बन गई थी। इससे उन्हें भैंगापन और डबल विजन हुआ। पीजीआई ने इन तीनों केसों के इलाज में पाया कि जब इन बच्चों को स्मार्टफोन से दूर रखा गया तो वे पूरी तरह से ठीक हो गए। पैरेंट्स के लिए एडवाइजरी जारी करते हुए पीजीआई ने कहा है कि वे अपने बच्चों को स्मार्टफोन से दूर रखे, वरना उनकी आंखों में गंभीर मर्ज हो सकता है। यह शोध पीजीआई के डॉ. सर्वलीन कौर, जसप्रीत सुखीजा, राहुल खन्ना, आस्था ठाकुर और मनप्रीत सिंह ने किया है। तीनों ही केस को पीजीआई ने न्यूरोआप्थल्मोलॉजी जनरल में प्रकाशित किया है। पीजीआई अब मोबाइल फोन से होने वाले ड्राइनेस पर शोध कर रहा है।

टेस्ट होने के बाद बच्चों से पूछा तब पता चला
जब बच्चे पीजीआई पहुंचे तो पीजीआई के डॉक्टरों ने उनके शुरुआती टेस्ट करें, लेकिन उससे उनके भैंगेपन के कारण का पता नहीं चला। डॉक्टरों ने जब उनके पेरेंट्स से पूछा कि पिछले दिनों क्या बच्चों की लाइफ स्टाइल में कुछ बदलाव आया है तो जवाब मिला कि पिछले डेढ़ महीने से बच्चे स्मार्टफोन का इस्तेमाल कर रहे हैं। चार घंटे से भी ज्यादा का वक्त बिता रहे हैं। उसके बाद डॉक्टरों को मर्ज का सिरा मिला और उस पर काम करना शुरू कर दिया। उसके बाद दूसरे और तीसरे बच्चे से भी पूछा गया तो उन्होंने स्मार्टफोन के ज्यादा देर तक इस्तेमाल करने की बात कही। डॉक्टरों ने उन्हें कुछ दवाइयां दी और बच्चों को स्मार्टफोन से दूर रखने को कहा।
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बच्चों में लगने लगी है स्मार्टफोन की लत
देश के कई हिस्सों से खबर आने लगी है कि बच्चों में स्मार्टफोन की लत लगने लगी है। मेडिकल प्रोफेशनल्स भी इस बात को लेकर चिंतित हैं कि किस तरह छोटे बच्चों में सामाजिक के साथ स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं खड़ी हो रही हैं। बेहद कम उम्र में जब बच्चों को मोबाइल गेम्स या फोन पर किसी और चीज की लत लग जाती है तो बच्चे खाना-पीना, साफ-सफाई जैसी बातों को भूलकर बच्चे चिड़चिड़े और आक्रामक हो जाते हैं। जब बच्चे बहुत छोटे होते हैं तभी से इस समस्या की शुरुआत हो जाती है, लेकिन पेरेंट्स इस आने वाले खतरे को समझ नहीं पाते। 10 साल या उसके आसपास के बच्चे ही नहीं बल्कि इन दिनों तो बहुत छोटे यानी 3-4 साल के बच्चे भी मोबाइल और टैबलेट स्क्रीन से चिपके रहते हैं।
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बच्चों में स्मार्टफोन की ऐसे पड़ती है लत
शहर के वरिष्ठ मनोचिकित्सक डॉ. प्रमोद ने बताया कि आजकल यदि बच्चा रोता है तो पैरेंट्स मोबाइल फोन पकड़ा देते हैं। यदि बच्चा खाना नहीं खा रहा है तो मोबाइल फोन थमा देते हैं। इससे बच्चे में धीरे-धीरे आदत पड़ने लगती है। आजकल यूट्यूब चैनल पर बच्चों से संबंधित कई चैनल हैं। पैरेंट्स को चाहिए कि पहले वे खुद पर कंट्रोल करें। वे बच्चे के सामने घर पर कम से कम मोबाइल का इस्तेमाल करें। उसके सामने वीडियो को न देखे और न दिखाएं। बच्चे का मन बहलाने के लिए उसके साथ खेलें। कुछ वक्त निकालें।


ये तथ्य भी जान लीजिए
- माइक्रोसाफ्ट कंपनी के संस्थापक बिल गेट्स ने अपने बच्चों को 14 साल की उम्र तक उन्हें मोबाइल फोन नहीं दिया।
-एप्पल के संस्थापक स्टीव जॉब्स ने एक इंटरव्यू में बताया था कि उन्होंने अपने बच्चों को आईपैड से दूर रखा है।
-एप्पल कंपनी के सीईओ टिम कुक का कोई बच्चा नहीं है, लेकिन वे अपने 13 वर्षीय भतीजे को मोबाइल फोन इस्तेमाल करने की अनुमति नहीं दी है। न ही वह सोशल मीडिया पर है।
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