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होम सेक्रेटरी ने इंजीनियरिंग डिपार्टमेंट से मांगी रिपोर्ट
Updated Thu, 10 Aug 2017 01:48 AM IST
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होम सेक्रेटरी ने इंजीनियरिंग डिपार्टमेंट से मांगी रिपोर्ट
- कब से बंद पड़े थे सीसीटीवी कैमरे, कंपनी को कब रिमाइंडर भेजा
- इंजीनियरिंग डिपार्टमेंट से पूछा, समय पर सीसीटीवी कैमरों की मेंटेनेंस क्यों नहीं हो रही
- वर्ष 2009 में पांच करोड़ रुपये की लागत से लगाए गए थे 100 सीसीटीवी कैमरे
अमर उजाला ब्यूरो
चंडीगढ़।
शहर में एक भी नाइट विजन सीसीटीवी कैमरा नहीं है। इसका खुलासा तब हुआ, जब चंडीगढ़ पुलिस हरियाणा के सीनियर आईएएस के बेटी से छेड़छाड़ मामले में सीसीटीवी फुटेज खंगालने में जुटी। सीसीटीवी फुटेज को लेकर जब चंडीगढ़ पुलिस से सवाल किए गए, तब पुलिस ने कहा कि उस रात जिस सड़क से आईएएस की बेटी अपनी जान बचाते हुए भागी थी। वहां एक भी सीसीटीवी कैमरा काम नहीं कर रहा था। यूटी पुलिस के इस बयान के बाद सीसीटीवी कैमरों का राज खुला। जिस कंपनी को यूटी प्रशासन ने करोड़ों रुपये देकर शहर में 100 सीसीटीवी कैमरे लगवाए थे, अब उस कंपनी पर सवाल उठने लगे हैं।
इंजीनियरिंग डिपार्टमेंट और चंडीगढ़ पुलिस की इस लापरवाही के सामने आने के बाद होम सेक्रेटरी अनुराग अग्रवाल ने यूटी इंजीनियरिंग डिपार्टमेंट से सीसीटीवी कैमरा को लेकर रिपोर्ट मांग ली है। होम सेक्रेटरी अनुराग अग्रवाल ने इंजीनियरिंग डिपार्टमेंट से मुंबई स्थित प्राइवेट कंपनी को वर्ष 2009 से लेकर अब तक सीसीटीवी कैमरे के मेंटेनेंस के लिए दिए गए रुपये और कंपनी ने कब-कब सीसीटीवी कैमरों की मेंटेनेंस की। सीसीटीवी कैमरे कब से बंद पड़े थे। सीसीटीवी कैमरा को ठीक कराने के लिए कंपनी को कब रिमाइंडर भेजा गया। इन सब सवालों के जवाब मांगे हैं। वहीं जब कंपनी के अधिकारी से बात की गई तो उन्होंने चुप्पी साध ली। किसी भी सवाल का जवाब देने से बचते रहे।
कंपनी को नोटिस भी हुआ, पेनेल्टी भी लगी, कार्रवाई नहीं
नाम न लिखे जाने की शर्त पर यूटी इंजीनियरिंग डिपार्टमेंट के एक अधिकारी ने बताया कि मुंबई की प्राइवेट कंपनी शनाइडर को विभाग कई बार नोटिस कर चुका है। कंपनी पर पेनेल्टी भी लगाई जा चुकी है। सीसीटीवी कैमरों की मेंटेनेंस न करने व बार-बार कैमरों में खामियां सामने आने पर कंपनी को 2016 में पेनेल्टी भी लगाई गई। लेकिन टेंडर अलॉट करते समय पेनेल्टी का क्लॉज नहीं जोड़ा गया था। इस कारण कंपनी ने न तो पेनेल्टी दी और कंपनी की इस लापरवाही पर कोई विभागीय कार्रवाई भी नहीं की गई।
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सवालों के कटघरे में इंजीनियरिंग डिपार्टमेंट
41 कैमरे 20 जुलाई को हुए खराब तो चार अगस्त को रिमाइंडर क्यों
इलेक्ट्रिकल विंग के सुपरिंटेंडेंट इंजीनियर रंजित सिंह ने बताया कि सीसीटीवी कैमरे 20 जुलाई को खराब हुए थे। पहला सवाल यह उठता है कि शहर में 20 जुलाई को एक दिन में ही शहर के 41 सीसीटीवी कैमरे खराब हो गए। क्योंकि इंजीनियरिंग डिपार्टमेंट ने जो रिपोर्ट साझा की है, उसके मुताबिक सात अगस्त 2017 तक शहर भर में 41 सीसीटीवी कैमरे खराब पड़े थे। इस प्रकरण के सामने आने के फौरन बाद इंजीनियरिंग डिपार्टमेेंट ने मुंबई की कंपनी को मंगलवार को शहर में खराब पड़े सीसीटीवी कैमरों को ठीक करने को कहा था। बीते मंगलवार देर शाम तक कंपनी ने 12 सीसीटीवी कैमरे ठीक किए। दूसरा सवाल यह कि जब 20 जुलाई को एक ही दिन में शहर के 41 सीसीटीवी कैमरे खराब हो गए तो यूटी इंजीनियरिंग डिपार्टमेंट ने चार अगस्त को नोटिस क्यों किया।
पांच करोड़ की लागत से लगाए गए 100 सीसीटीवी कैमरे
चंडीगढ़ पुलिस ने वर्ष 2009 में शहर की मुख्य सड़कों पर करीब पांच करोड़ रुपये की लागत से 100 सीसीटीवी कैमरे लगाए थे। इन सीसीटीवी कैमरा की समय सीमा करीब 9 से 10 साल तक की है। इनमें से अधिकतर सीसीटीवी कैमरा आउटडेटेड हो चुके हैं। इनकी समय-सीमा खत्म हो चुकी है। कई सीसीटीवी कैमरों की जगह नए लगाए जाने चाहिए।
कोट्स:
कंपनी को खराब पड़े सीसीटीवी कैमरों को ठीक करने के लिए कहा गया है, इंजीनियरिंग डिपार्टमेंट से रिपोर्ट मांगी गई है। लापरवाही सामने आने पर कार्रवाई की जाएगी।
- अनुराग अग्रवाल, होम सेक्रेटरी।
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- कब से बंद पड़े थे सीसीटीवी कैमरे, कंपनी को कब रिमाइंडर भेजा
- इंजीनियरिंग डिपार्टमेंट से पूछा, समय पर सीसीटीवी कैमरों की मेंटेनेंस क्यों नहीं हो रही
- वर्ष 2009 में पांच करोड़ रुपये की लागत से लगाए गए थे 100 सीसीटीवी कैमरे
अमर उजाला ब्यूरो
चंडीगढ़।
शहर में एक भी नाइट विजन सीसीटीवी कैमरा नहीं है। इसका खुलासा तब हुआ, जब चंडीगढ़ पुलिस हरियाणा के सीनियर आईएएस के बेटी से छेड़छाड़ मामले में सीसीटीवी फुटेज खंगालने में जुटी। सीसीटीवी फुटेज को लेकर जब चंडीगढ़ पुलिस से सवाल किए गए, तब पुलिस ने कहा कि उस रात जिस सड़क से आईएएस की बेटी अपनी जान बचाते हुए भागी थी। वहां एक भी सीसीटीवी कैमरा काम नहीं कर रहा था। यूटी पुलिस के इस बयान के बाद सीसीटीवी कैमरों का राज खुला। जिस कंपनी को यूटी प्रशासन ने करोड़ों रुपये देकर शहर में 100 सीसीटीवी कैमरे लगवाए थे, अब उस कंपनी पर सवाल उठने लगे हैं।
इंजीनियरिंग डिपार्टमेंट और चंडीगढ़ पुलिस की इस लापरवाही के सामने आने के बाद होम सेक्रेटरी अनुराग अग्रवाल ने यूटी इंजीनियरिंग डिपार्टमेंट से सीसीटीवी कैमरा को लेकर रिपोर्ट मांग ली है। होम सेक्रेटरी अनुराग अग्रवाल ने इंजीनियरिंग डिपार्टमेंट से मुंबई स्थित प्राइवेट कंपनी को वर्ष 2009 से लेकर अब तक सीसीटीवी कैमरे के मेंटेनेंस के लिए दिए गए रुपये और कंपनी ने कब-कब सीसीटीवी कैमरों की मेंटेनेंस की। सीसीटीवी कैमरे कब से बंद पड़े थे। सीसीटीवी कैमरा को ठीक कराने के लिए कंपनी को कब रिमाइंडर भेजा गया। इन सब सवालों के जवाब मांगे हैं। वहीं जब कंपनी के अधिकारी से बात की गई तो उन्होंने चुप्पी साध ली। किसी भी सवाल का जवाब देने से बचते रहे।
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कंपनी को नोटिस भी हुआ, पेनेल्टी भी लगी, कार्रवाई नहीं
नाम न लिखे जाने की शर्त पर यूटी इंजीनियरिंग डिपार्टमेंट के एक अधिकारी ने बताया कि मुंबई की प्राइवेट कंपनी शनाइडर को विभाग कई बार नोटिस कर चुका है। कंपनी पर पेनेल्टी भी लगाई जा चुकी है। सीसीटीवी कैमरों की मेंटेनेंस न करने व बार-बार कैमरों में खामियां सामने आने पर कंपनी को 2016 में पेनेल्टी भी लगाई गई। लेकिन टेंडर अलॉट करते समय पेनेल्टी का क्लॉज नहीं जोड़ा गया था। इस कारण कंपनी ने न तो पेनेल्टी दी और कंपनी की इस लापरवाही पर कोई विभागीय कार्रवाई भी नहीं की गई।
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सवालों के कटघरे में इंजीनियरिंग डिपार्टमेंट
41 कैमरे 20 जुलाई को हुए खराब तो चार अगस्त को रिमाइंडर क्यों
इलेक्ट्रिकल विंग के सुपरिंटेंडेंट इंजीनियर रंजित सिंह ने बताया कि सीसीटीवी कैमरे 20 जुलाई को खराब हुए थे। पहला सवाल यह उठता है कि शहर में 20 जुलाई को एक दिन में ही शहर के 41 सीसीटीवी कैमरे खराब हो गए। क्योंकि इंजीनियरिंग डिपार्टमेंट ने जो रिपोर्ट साझा की है, उसके मुताबिक सात अगस्त 2017 तक शहर भर में 41 सीसीटीवी कैमरे खराब पड़े थे। इस प्रकरण के सामने आने के फौरन बाद इंजीनियरिंग डिपार्टमेेंट ने मुंबई की कंपनी को मंगलवार को शहर में खराब पड़े सीसीटीवी कैमरों को ठीक करने को कहा था। बीते मंगलवार देर शाम तक कंपनी ने 12 सीसीटीवी कैमरे ठीक किए। दूसरा सवाल यह कि जब 20 जुलाई को एक ही दिन में शहर के 41 सीसीटीवी कैमरे खराब हो गए तो यूटी इंजीनियरिंग डिपार्टमेंट ने चार अगस्त को नोटिस क्यों किया।
पांच करोड़ की लागत से लगाए गए 100 सीसीटीवी कैमरे
चंडीगढ़ पुलिस ने वर्ष 2009 में शहर की मुख्य सड़कों पर करीब पांच करोड़ रुपये की लागत से 100 सीसीटीवी कैमरे लगाए थे। इन सीसीटीवी कैमरा की समय सीमा करीब 9 से 10 साल तक की है। इनमें से अधिकतर सीसीटीवी कैमरा आउटडेटेड हो चुके हैं। इनकी समय-सीमा खत्म हो चुकी है। कई सीसीटीवी कैमरों की जगह नए लगाए जाने चाहिए।
कोट्स:
कंपनी को खराब पड़े सीसीटीवी कैमरों को ठीक करने के लिए कहा गया है, इंजीनियरिंग डिपार्टमेंट से रिपोर्ट मांगी गई है। लापरवाही सामने आने पर कार्रवाई की जाएगी।
- अनुराग अग्रवाल, होम सेक्रेटरी।