{"_id":"598230504f1c1b9c508b4638","slug":"191501704272-panchkula-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"महिलाओं को शारीरिक शोषण से बचाएगा सेंसर स्टिकर","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
महिलाओं को शारीरिक शोषण से बचाएगा सेंसर स्टिकर
Updated Thu, 03 Aug 2017 01:34 AM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
महिलाओं को शारीरिक शोषण से बचाएगा सेंसर स्टीकर
कुलदीप शुक्ला
चंडीगढ़।
सिटी ब्यूटीफुल की बेटी ने महिलाओं के प्रति बढ़ते सेक्सुअल अपराध पर अंकुश लगाने का नायाब तरीका सेंसर स्टीकर के रूप में तैयार किया है। इसके यूजर्स पर किसी भी तरह का शारीरिक हमला या यौन उत्पीड़न करने की कोशिश होती है तो स्टीकर के माध्यम से कनेक्ट 5 लोगों को तत्काल अलर्ट चला जाएगा। इस सेंसर स्टीकर को बचाव के साथ सुबूत के तौर पर भी इस्तेमाल किया जा सकता है। यूजर अपनी ेसुविधा के हिसाब से सेट भी कर सकता है। यह डिवाइस ब्लूटूथ के माध्यम से स्मार्टफोन से कनेक्ट होगा। इससे 5 लोगों को मैसेज जाएगा, जो डिवाइस से जुड़े होंगे। डिवाइस को चंडीगढ़ की इंजीनियर मनीषा मोहन ने कैंम्ब्रीज स्थित मैसाचुसेट्स इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी (एमआईटी) में अपनी मास्टर डिग्री के समय तैयार किया।
कैसे काम करता है सेंसर स्टीकर
यह सेंसर दो मोड़ यानी निष्क्रिय मोड़ में मैन्युअल रूप से काम करता है। यानी जब खतरे का डर हो तो लड़की आसपास के लोगों को बटन दबाकर अलर्ट कर देगी। फास्ट अलार्म बटन दबते ही यह दोस्तों को कॉल करना शुरू कर देगा। सक्रिय मोड़ में यह संवेदक बाहरी संकेतों के माध्यम से खतरे का अनुमान लगाता है। उदाहरण के लिए, यदि कोई शरीर से कपड़े निकालने की कोशिश कर रहा है, तो सेंसर अपने स्मार्टफोन को एक संदेश भेजेगा, ताकि सेंसर यह सुनिश्चित करे कि लड़की संकट में है या नहीं। भेजे गए इस संदेश का जवाब 30 सेकंड के भीतर नहीं आता है तो आसपास के लोगों को सतर्क करने के लिए, फोन जोर से ध्वनि शुरू कर देगा। अगर लड़की 20 सेकंड के भीतर इस अलार्म को बंद नहीं करती है, तो एप यह मान लेगा कि लड़की मुसीबत में है और वह परिवार और दोस्तों को संकेत भेजना शुरू कर देगा।
डिवाइस तैयार करने में लगे 2 वर्ष
मनीषा ने बताया कि उनको मास्टर थीसिस के लिए निडर- यौन उत्पीड़न को रोकने और उसके बचने के तरीके बताने की थीम मिली थी। इसके चलते उन्होंने इस सेंसर स्टीकर को तैयार किया। इस डिवाइस को पूरी तरह से तैयार करने में कुल 2 वर्ष का समय लगा है। इस पर पूरी तरह से किया रिसर्च सफलतापूर्ण रहा है।
विज्ञापन
ऐसे किया डिवाइस तैयार
मनीषा ने बताया कि डिवाइस के माध्यम से न केवल महिलाओं बल्कि बच्चों, स्कूल जा रही लड़कियों और शारीरिक रूप से विकलांग आदि को भी शारीरिक शोषण से सुरक्षित किया जा सकता है। मोहन ने बताया इस डिवाइस को तैयार करने के लिए करीब 38 डॉलर यानी करीब 2500 रुपये लगे। फिलहाल इस पर रिसर्च पुरी हो चुकी है। अब कौन-सी कंपनी इस डिवाइस को लांच करती है इसे लेकर विचार-विमर्श चल रहा है।
पंजाब यूनिवर्सिटी में पिता प्रोफेसर, यहीं से शुरू हुई प्राथमिक पढ़ाई
डिवाइस की निर्माता मनीषा मोहन के पिता कृष्ण मोहन पंजाब यूनिवर्सिटी के ज्योग्राफी विभाग में प्रोफेसर हैं। इनकी माता निशि मोहन परिवार के साथ बच्चों की पूरी मदद में लगी रहती हैं। मनीषा परिवार में बड़ी बेटी हैं। उनका छोटा भाई सौरभ भी इंजीनियरिंग की पढ़ाई पूरी करके बंगलूरू स्थित एक कंपनी में ज्वॉइन कर चुका है। मनीषा मोहन बचपन से ही पढ़ाई में होशियार हैं और उनकी प्राथमिक शिक्षा सेक्टर-26 सेक्रेड हार्ट में पूरी हुई। उन्होंने ग्रेजुएशन की पढ़ाई चेन्नई के इंजीनियरिंग कॉलेज से की, जिसके बाद मास्टर की डिग्री पूरी करने कैंम्ब्रीज स्थित मैसाचुसेट्स इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी (एमआईटी) चली गईं। फिलहाल, वह ग्रेजुएशन की पढ़ाई पूरी करके चंडीगढ़ आ गई हैं।
ऐसे हुई इंस्पायर
मनीषा ने कहा कि महिलाओं के यौन उत्पीड़न, शारीरिक हमले, बलात्कार के मामले बढ़ने लगे हैं। कुछ ऐसा होना चाहिए जिससे शिकार होने वाली महिला के परिजनों को पहले ही वारदात की भनक लग जाए। जिसके बाद निर्भया केस एक ऐसा मोड़ रहा, जिसने मनीषा को एक ऐसी डिवाइस बनाने के लिए प्रेरित किया। चेन्नई में इंजीनियरिंग का अध्ययन करने के अनुभव के बाद से कुछ ऐसा बनाने की सोच रही थी।
विज्ञापन
कुलदीप शुक्ला
चंडीगढ़।
सिटी ब्यूटीफुल की बेटी ने महिलाओं के प्रति बढ़ते सेक्सुअल अपराध पर अंकुश लगाने का नायाब तरीका सेंसर स्टीकर के रूप में तैयार किया है। इसके यूजर्स पर किसी भी तरह का शारीरिक हमला या यौन उत्पीड़न करने की कोशिश होती है तो स्टीकर के माध्यम से कनेक्ट 5 लोगों को तत्काल अलर्ट चला जाएगा। इस सेंसर स्टीकर को बचाव के साथ सुबूत के तौर पर भी इस्तेमाल किया जा सकता है। यूजर अपनी ेसुविधा के हिसाब से सेट भी कर सकता है। यह डिवाइस ब्लूटूथ के माध्यम से स्मार्टफोन से कनेक्ट होगा। इससे 5 लोगों को मैसेज जाएगा, जो डिवाइस से जुड़े होंगे। डिवाइस को चंडीगढ़ की इंजीनियर मनीषा मोहन ने कैंम्ब्रीज स्थित मैसाचुसेट्स इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी (एमआईटी) में अपनी मास्टर डिग्री के समय तैयार किया।
कैसे काम करता है सेंसर स्टीकर
यह सेंसर दो मोड़ यानी निष्क्रिय मोड़ में मैन्युअल रूप से काम करता है। यानी जब खतरे का डर हो तो लड़की आसपास के लोगों को बटन दबाकर अलर्ट कर देगी। फास्ट अलार्म बटन दबते ही यह दोस्तों को कॉल करना शुरू कर देगा। सक्रिय मोड़ में यह संवेदक बाहरी संकेतों के माध्यम से खतरे का अनुमान लगाता है। उदाहरण के लिए, यदि कोई शरीर से कपड़े निकालने की कोशिश कर रहा है, तो सेंसर अपने स्मार्टफोन को एक संदेश भेजेगा, ताकि सेंसर यह सुनिश्चित करे कि लड़की संकट में है या नहीं। भेजे गए इस संदेश का जवाब 30 सेकंड के भीतर नहीं आता है तो आसपास के लोगों को सतर्क करने के लिए, फोन जोर से ध्वनि शुरू कर देगा। अगर लड़की 20 सेकंड के भीतर इस अलार्म को बंद नहीं करती है, तो एप यह मान लेगा कि लड़की मुसीबत में है और वह परिवार और दोस्तों को संकेत भेजना शुरू कर देगा।
विज्ञापन
डिवाइस तैयार करने में लगे 2 वर्ष
मनीषा ने बताया कि उनको मास्टर थीसिस के लिए निडर- यौन उत्पीड़न को रोकने और उसके बचने के तरीके बताने की थीम मिली थी। इसके चलते उन्होंने इस सेंसर स्टीकर को तैयार किया। इस डिवाइस को पूरी तरह से तैयार करने में कुल 2 वर्ष का समय लगा है। इस पर पूरी तरह से किया रिसर्च सफलतापूर्ण रहा है।
विज्ञापन
ऐसे किया डिवाइस तैयार
मनीषा ने बताया कि डिवाइस के माध्यम से न केवल महिलाओं बल्कि बच्चों, स्कूल जा रही लड़कियों और शारीरिक रूप से विकलांग आदि को भी शारीरिक शोषण से सुरक्षित किया जा सकता है। मोहन ने बताया इस डिवाइस को तैयार करने के लिए करीब 38 डॉलर यानी करीब 2500 रुपये लगे। फिलहाल इस पर रिसर्च पुरी हो चुकी है। अब कौन-सी कंपनी इस डिवाइस को लांच करती है इसे लेकर विचार-विमर्श चल रहा है।
पंजाब यूनिवर्सिटी में पिता प्रोफेसर, यहीं से शुरू हुई प्राथमिक पढ़ाई
डिवाइस की निर्माता मनीषा मोहन के पिता कृष्ण मोहन पंजाब यूनिवर्सिटी के ज्योग्राफी विभाग में प्रोफेसर हैं। इनकी माता निशि मोहन परिवार के साथ बच्चों की पूरी मदद में लगी रहती हैं। मनीषा परिवार में बड़ी बेटी हैं। उनका छोटा भाई सौरभ भी इंजीनियरिंग की पढ़ाई पूरी करके बंगलूरू स्थित एक कंपनी में ज्वॉइन कर चुका है। मनीषा मोहन बचपन से ही पढ़ाई में होशियार हैं और उनकी प्राथमिक शिक्षा सेक्टर-26 सेक्रेड हार्ट में पूरी हुई। उन्होंने ग्रेजुएशन की पढ़ाई चेन्नई के इंजीनियरिंग कॉलेज से की, जिसके बाद मास्टर की डिग्री पूरी करने कैंम्ब्रीज स्थित मैसाचुसेट्स इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी (एमआईटी) चली गईं। फिलहाल, वह ग्रेजुएशन की पढ़ाई पूरी करके चंडीगढ़ आ गई हैं।
ऐसे हुई इंस्पायर
मनीषा ने कहा कि महिलाओं के यौन उत्पीड़न, शारीरिक हमले, बलात्कार के मामले बढ़ने लगे हैं। कुछ ऐसा होना चाहिए जिससे शिकार होने वाली महिला के परिजनों को पहले ही वारदात की भनक लग जाए। जिसके बाद निर्भया केस एक ऐसा मोड़ रहा, जिसने मनीषा को एक ऐसी डिवाइस बनाने के लिए प्रेरित किया। चेन्नई में इंजीनियरिंग का अध्ययन करने के अनुभव के बाद से कुछ ऐसा बनाने की सोच रही थी।