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हाईकोर्ट ने पंचकूला नगर निगम पर लगाया पांच लाख का जुमाऱ्ना
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चंडीगढ़। पंचकूला नगर निगम के शहरवासियों को सुविधाएं देने में नाकाम रहने पर पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने कड़ा रुख अख्तियार कर लिया है। हाईकोर्ट ने नगर निगम आयुक्त को 5 लाख रुपये जुर्माना के तौर पर याचिकाकर्ता को अदा किए जाने के आदेश दिए हैं। साथ यह भी कहा है कि जुर्माने की राशि को अप्रैल के अंत तक हर हाल में जमा करवाना होगा।
जस्टिस निर्मलजीत कौर ने निगम आयुक्त को आदेश दिए हैं कि अगर अप्रैल के अंत तक जुर्माने की राशि नहीं आती है तो अगली सुनवाई तक जुर्माने की राशि बढ़ा दी जाएगी। सकेतड़ी निवासी प्रदीप कुमार ने वर्ष 2017 में अपने घर में सीवर के पानी के भरे जाने के खिलाफ हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी। याचिकाकर्ता ने बताया कि इस बारे में नगर निगम को कई बार शिकायत की, लेकिन उसकी सुनवाई नहीं हुई। उस दौरान हाईकोर्ट ने तत्कालीन पंचकूला के डीसी और नगर निगम आयुक्त को तलब किया था।
हाईकोर्ट के बार-बार दिए आदेशों पर भी कार्रवाई नहीं किए जाने पर जस्टिस अमित रावल ने 30 मई 2017 को सीधे तौर पर नगर निगम को आदेश की अवमानना का दोषी पाया। पांच लाख रुपये का जुर्माना भी लगाया। मई 2017 के आदेशों के बावजूद जुर्माने की यह राशि अदा नहीं की गई और गत वर्ष अगस्त माह में हाईकोर्ट ने इस याचिका का निपटारा कर दिया था। इसके बाद याचिकाकर्ता ने निगम आयुक्त के खिलाफ हाईकोर्ट के आदेशों की अवमानना याचिका दायर कर कहा कि हाईकोर्ट के आदेशों के बावजूद निगम आयुक्त ने अभी तक जुर्माने के राशि अदा ही नहीं की है। हाईकोर्ट ने अब कड़ा रुख अपनाते हुए निगम आयुक्त राजेश जोगपाल को अप्रैल के अंत तक हर हाल में जुर्माने के 5 लाख रुपये अदा किये जाने के आदेश दे दिए हैं और कहा है कि इस समयावधि में यह राशि जमा नहीं करवाई गई तो जुर्माने की राशि और बढ़ा दी जाएगी।
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जस्टिस निर्मलजीत कौर ने निगम आयुक्त को आदेश दिए हैं कि अगर अप्रैल के अंत तक जुर्माने की राशि नहीं आती है तो अगली सुनवाई तक जुर्माने की राशि बढ़ा दी जाएगी। सकेतड़ी निवासी प्रदीप कुमार ने वर्ष 2017 में अपने घर में सीवर के पानी के भरे जाने के खिलाफ हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी। याचिकाकर्ता ने बताया कि इस बारे में नगर निगम को कई बार शिकायत की, लेकिन उसकी सुनवाई नहीं हुई। उस दौरान हाईकोर्ट ने तत्कालीन पंचकूला के डीसी और नगर निगम आयुक्त को तलब किया था।
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हाईकोर्ट के बार-बार दिए आदेशों पर भी कार्रवाई नहीं किए जाने पर जस्टिस अमित रावल ने 30 मई 2017 को सीधे तौर पर नगर निगम को आदेश की अवमानना का दोषी पाया। पांच लाख रुपये का जुर्माना भी लगाया। मई 2017 के आदेशों के बावजूद जुर्माने की यह राशि अदा नहीं की गई और गत वर्ष अगस्त माह में हाईकोर्ट ने इस याचिका का निपटारा कर दिया था। इसके बाद याचिकाकर्ता ने निगम आयुक्त के खिलाफ हाईकोर्ट के आदेशों की अवमानना याचिका दायर कर कहा कि हाईकोर्ट के आदेशों के बावजूद निगम आयुक्त ने अभी तक जुर्माने के राशि अदा ही नहीं की है। हाईकोर्ट ने अब कड़ा रुख अपनाते हुए निगम आयुक्त राजेश जोगपाल को अप्रैल के अंत तक हर हाल में जुर्माने के 5 लाख रुपये अदा किये जाने के आदेश दे दिए हैं और कहा है कि इस समयावधि में यह राशि जमा नहीं करवाई गई तो जुर्माने की राशि और बढ़ा दी जाएगी।
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