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भवाई नृत्य
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राजस्थानी भवाई नृत्य देख दर्शक हुए मस्त
-चंडीगढ़ के हिमाचल भवन में मटकों को सिर पर रख बैलेंस के साथ नृत्य करने वाली नृत्यांगना सुनीता ने सबको किया आकर्षित
अमर उजाला ब्यूरो
चंडीगढ़। राजस्थान के उदयपुर क्षेत्र में किया जाने वाला भवाई नृत्य का जलवा अब चंडीगढ़ के हिमाचल भवन में दिख रहा है। मटकों को सिर पर रख एकदम बैलेंस के साथ इस नृत्य को करने वाली राजस्थान की नृत्यांगना सुनीता अपने इस फोक नृत्य से न सिर्फ विजिटर्स को लुभा रही हैं बल्कि उनका यह नृत्य विजिटर्स को भी अपनी ओर खींच ले रहा है।
सेक्टर-28 के हिमाचल भवन में राजस्थान फेयर के दौरान पहुंचीं सुनीता ने बताया कि वह पिछले बीस साल से भवाई नृत्य कर रही हैं। इसमें मटकों की संख्या आठ होती है। सुनीता ने बताया कि वह नृत्य करते समय कभी गिलास पर खड़ी होती हैं या फिर परात के कटाव पर खड़े होकर नृत्य करती हैं। सुनीता ने कहा कि मटकों के साथ बैलेंस बनाना काफी कठिन होता है।
सुनीता ने बताया कि वह अब तक हंगरी, जर्मनी, पेरिस, दुबई और रूस में इस नृत्य का प्रदर्शन कई बड़े आयोजनों के दौरान कर चुकी हैं। उन्होंने कहा कि यह नृत्य आसान नहीं है। उन्होंने इस नृत्य में प्रवीणता बचपन से हासिल कर ली थी। राजस्थान में उनकी मां और परिवार इस कला से जुड़े थे। उन्होंने कहा कि अपनी बेटी को भी उन्होंने इस नृत्य को सिखाया पर शादी के बाद बेटी ने इसको छोड़ दिया। सुनीता ने कहा कि अब तक हिमाचल भवन में आने वाले पचास विजिटर्स ने उनसे इस नृत्य को सीखने के लिए बात की है।
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कठपुतली कल्चर को कर रहे प्रंमोट
हिमाचल भवन में ही सुनीता के साथ आए कठपुतली शो करने वाले कुलदीप भट और जगदीश भट ने बताया कि वह कठपुतली कल्चर को प्रमोट करने में लगे हैं। उन्होंने कहा कि कठपुतली शो अब बेशक कम हो गए हैं, पर इसका प्रदर्शन जहां भी होता है उसको बच्चों से लेकर बूढे़ तक खूब देखते हैं। हिमाचल भवन में इस शो को देखने के लिए अब तक पांच सौ से ज्यादा लोग आ चुके हैं।
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-चंडीगढ़ के हिमाचल भवन में मटकों को सिर पर रख बैलेंस के साथ नृत्य करने वाली नृत्यांगना सुनीता ने सबको किया आकर्षित
अमर उजाला ब्यूरो
चंडीगढ़। राजस्थान के उदयपुर क्षेत्र में किया जाने वाला भवाई नृत्य का जलवा अब चंडीगढ़ के हिमाचल भवन में दिख रहा है। मटकों को सिर पर रख एकदम बैलेंस के साथ इस नृत्य को करने वाली राजस्थान की नृत्यांगना सुनीता अपने इस फोक नृत्य से न सिर्फ विजिटर्स को लुभा रही हैं बल्कि उनका यह नृत्य विजिटर्स को भी अपनी ओर खींच ले रहा है।
सेक्टर-28 के हिमाचल भवन में राजस्थान फेयर के दौरान पहुंचीं सुनीता ने बताया कि वह पिछले बीस साल से भवाई नृत्य कर रही हैं। इसमें मटकों की संख्या आठ होती है। सुनीता ने बताया कि वह नृत्य करते समय कभी गिलास पर खड़ी होती हैं या फिर परात के कटाव पर खड़े होकर नृत्य करती हैं। सुनीता ने कहा कि मटकों के साथ बैलेंस बनाना काफी कठिन होता है।
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सुनीता ने बताया कि वह अब तक हंगरी, जर्मनी, पेरिस, दुबई और रूस में इस नृत्य का प्रदर्शन कई बड़े आयोजनों के दौरान कर चुकी हैं। उन्होंने कहा कि यह नृत्य आसान नहीं है। उन्होंने इस नृत्य में प्रवीणता बचपन से हासिल कर ली थी। राजस्थान में उनकी मां और परिवार इस कला से जुड़े थे। उन्होंने कहा कि अपनी बेटी को भी उन्होंने इस नृत्य को सिखाया पर शादी के बाद बेटी ने इसको छोड़ दिया। सुनीता ने कहा कि अब तक हिमाचल भवन में आने वाले पचास विजिटर्स ने उनसे इस नृत्य को सीखने के लिए बात की है।
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कठपुतली कल्चर को कर रहे प्रंमोट
हिमाचल भवन में ही सुनीता के साथ आए कठपुतली शो करने वाले कुलदीप भट और जगदीश भट ने बताया कि वह कठपुतली कल्चर को प्रमोट करने में लगे हैं। उन्होंने कहा कि कठपुतली शो अब बेशक कम हो गए हैं, पर इसका प्रदर्शन जहां भी होता है उसको बच्चों से लेकर बूढे़ तक खूब देखते हैं। हिमाचल भवन में इस शो को देखने के लिए अब तक पांच सौ से ज्यादा लोग आ चुके हैं।