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फर्जी नाम से लोन लेने के आरोपी को 3 साल कैद
Updated Fri, 21 Jul 2017 08:50 PM IST
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बैंक से फर्जी आईडी पर लिया था कार लोन, दो को कैद
अमर उजाला ब्यूरो
चंडीगढ़।
बैंक से फर्जी दस्तावेज के आधार पर 5.50 लाख रुपये का लोन लेने के मामले में जिला अदालत ने दो लोगों को दोषी करार दिया है। सेक्टर-35 निवासी दुष्यंत कुमार (32) को तीन साल और जीरकपुर निवासी समर ठाकुर (20) को डेढ़ साल कैद की सजा सुनाई गई है। इसके अलावा दोनों पर क्रमश: 2500 और 1000 रुपये जुर्माना लगाया गया है। दुष्यंत वेस्टर्न कमांड चंडीमंदिर में बतौर क्लर्क और समर जीरकपुर स्थित ट्राइसिटी ऑटोस में काम करता था।
दोनों के खिलाफ धोखाधड़ी, फर्जी दस्तावेज, आपराधिक साजिश के तहत संबंधित केस स्टेट बैंक ऑफ पटियाला के शाखा प्रबंधक विकास कुमार गर्ग की ओर से सेक्टर-36 थाने में दर्ज कराया गया था। उनके अनुसार सेक्टर-35 स्थित बैंक की शाखा को 22 नवंबर 2014 को ट्राइसिटी ऑटो की ओर से स्विफ्ट कार के लोन के लिए एप्लीकेशन आई थी। इसमें विनोद कुमार ने कार लोन के लिए आवेदन किया था। विनोद कुमार की ओर से सभी दस्तावेज पैन कार्ड, रेजिडेंस प्रूफ और सैलरी स्लिप आदि दिए गए थे। दस्तावेज के आधार पर बैंक ने उन्हें 5.50 लाख रुपये का लोन पास किया था। इसके बाद विनोद ने कार खरीदी थी। दस्तावेज की जांच पड़ताल में सामने आया कि विनोद ने फर्जी नाम से यह लोन लिया था। उसका असली नाम दुष्यंत कुमार है और वह वेस्टर्न कमांड, चंडीमंदिर में बतौर स्टेनो कार्यरत था।
दुष्यंत कुमार ने ट्राइसिटी ऑटो की मदद से यह धोखाधड़ी की थी। पुलिस ने केस दर्ज कर जांच की तो कार डीलर कंपनी के कर्मचारी समर ठाकुर की संलिप्तता सामने आई। पुलिस ने केस में उसका नाम बाद में जोड़ा था। अदालत ने दोनों को फर्जीवाड़े और धोखाधड़ी में दोषी पाते हुए उन्हें सजा सुनाई।
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-वेस्टर्न कमांड के क्लर्क को तीन साल और फर्जीवाड़े में मदद करने वाले को डेढ़ साल की सजा
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अमर उजाला ब्यूरो
चंडीगढ़।
बैंक से फर्जी दस्तावेज के आधार पर 5.50 लाख रुपये का लोन लेने के मामले में जिला अदालत ने दो लोगों को दोषी करार दिया है। सेक्टर-35 निवासी दुष्यंत कुमार (32) को तीन साल और जीरकपुर निवासी समर ठाकुर (20) को डेढ़ साल कैद की सजा सुनाई गई है। इसके अलावा दोनों पर क्रमश: 2500 और 1000 रुपये जुर्माना लगाया गया है। दुष्यंत वेस्टर्न कमांड चंडीमंदिर में बतौर क्लर्क और समर जीरकपुर स्थित ट्राइसिटी ऑटोस में काम करता था।
दोनों के खिलाफ धोखाधड़ी, फर्जी दस्तावेज, आपराधिक साजिश के तहत संबंधित केस स्टेट बैंक ऑफ पटियाला के शाखा प्रबंधक विकास कुमार गर्ग की ओर से सेक्टर-36 थाने में दर्ज कराया गया था। उनके अनुसार सेक्टर-35 स्थित बैंक की शाखा को 22 नवंबर 2014 को ट्राइसिटी ऑटो की ओर से स्विफ्ट कार के लोन के लिए एप्लीकेशन आई थी। इसमें विनोद कुमार ने कार लोन के लिए आवेदन किया था। विनोद कुमार की ओर से सभी दस्तावेज पैन कार्ड, रेजिडेंस प्रूफ और सैलरी स्लिप आदि दिए गए थे। दस्तावेज के आधार पर बैंक ने उन्हें 5.50 लाख रुपये का लोन पास किया था। इसके बाद विनोद ने कार खरीदी थी। दस्तावेज की जांच पड़ताल में सामने आया कि विनोद ने फर्जी नाम से यह लोन लिया था। उसका असली नाम दुष्यंत कुमार है और वह वेस्टर्न कमांड, चंडीमंदिर में बतौर स्टेनो कार्यरत था।
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दुष्यंत कुमार ने ट्राइसिटी ऑटो की मदद से यह धोखाधड़ी की थी। पुलिस ने केस दर्ज कर जांच की तो कार डीलर कंपनी के कर्मचारी समर ठाकुर की संलिप्तता सामने आई। पुलिस ने केस में उसका नाम बाद में जोड़ा था। अदालत ने दोनों को फर्जीवाड़े और धोखाधड़ी में दोषी पाते हुए उन्हें सजा सुनाई।
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-वेस्टर्न कमांड के क्लर्क को तीन साल और फर्जीवाड़े में मदद करने वाले को डेढ़ साल की सजा