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ट्रिब्यूनल ने दिया नाकाफी मुआवजा, हाईकोर्ट ने किया डबल
Updated Fri, 23 Jun 2017 01:43 AM IST
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ट्रिब्यूनल ने दिया नाकाफी मुआवजा, हाईकोर्ट ने किया डबल
अमर उजाला ब्यूरो
चंडीगढ़।
पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने संगरूर निवासी रूपेंदर कौर की याचिका पर सुनवाई करते हुए उसके पति की मौत पर मोटर एक्सीडेंट क्लेम ट्रिब्यूनल की ओर से दिया 4,08,000 रुपये का मुआवजा बढ़ाकर 8 लाख 37 हजार कर दिया है।
इस मामले में रूपेंदर कौर व अन्य ने हाईकोर्ट में अपील दायर कर मोटर एक्सीडेंट क्लेम ट्रिब्यूनल संगरूर के उस आदेश को चुनौती दी थी। याची का पति रणधीर सिंह घटना के समय सिर्फ 27 साल का था और वह दूध का कारोबार करता था। उसकी मासिक आय लगभग 10000 रुपये के करीब थी। 30 अप्रैल 2010 को उसके पति की एक सड़क दुर्घटना में मौत हो गई। मृतक की पत्नी, उसका बच्चा व उसके पिता उस पर निर्भर थे। जब मामला मोटर एक्सीडेंट क्लेम ट्रिब्यूनल संगरूर के सामने आया तो ट्रिब्यूनल ने पाया कि याचिकाकर्ता का परिवार ऐसा कोई सबूत ट्रिब्यूनल के सामने पेश नहीं कर पाया, जिससे यह साबित हो सके कि मृतक की आय दस हजार रुपये थी। ट्रिब्यूनल ने मृतक की आय तीन हजार रुपये मानते हुए 4,08,000 रुपये देने का आदेश दिया। हाईकोर्ट ने अपील पर सुनवाई करते हुए पाया कि ट्रिब्यूनल की ओर से दिया मुआवजा काफी कम है। हाईकोर्ट ने मुआवजा राशि 6,12,000 तय की। इसके अलावा कोर्ट ने मृतक के पिता व बच्चे को एक-एक लाख रुपये अलग से देने का आदेश दिया।
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अमर उजाला ब्यूरो
चंडीगढ़।
पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने संगरूर निवासी रूपेंदर कौर की याचिका पर सुनवाई करते हुए उसके पति की मौत पर मोटर एक्सीडेंट क्लेम ट्रिब्यूनल की ओर से दिया 4,08,000 रुपये का मुआवजा बढ़ाकर 8 लाख 37 हजार कर दिया है।
इस मामले में रूपेंदर कौर व अन्य ने हाईकोर्ट में अपील दायर कर मोटर एक्सीडेंट क्लेम ट्रिब्यूनल संगरूर के उस आदेश को चुनौती दी थी। याची का पति रणधीर सिंह घटना के समय सिर्फ 27 साल का था और वह दूध का कारोबार करता था। उसकी मासिक आय लगभग 10000 रुपये के करीब थी। 30 अप्रैल 2010 को उसके पति की एक सड़क दुर्घटना में मौत हो गई। मृतक की पत्नी, उसका बच्चा व उसके पिता उस पर निर्भर थे। जब मामला मोटर एक्सीडेंट क्लेम ट्रिब्यूनल संगरूर के सामने आया तो ट्रिब्यूनल ने पाया कि याचिकाकर्ता का परिवार ऐसा कोई सबूत ट्रिब्यूनल के सामने पेश नहीं कर पाया, जिससे यह साबित हो सके कि मृतक की आय दस हजार रुपये थी। ट्रिब्यूनल ने मृतक की आय तीन हजार रुपये मानते हुए 4,08,000 रुपये देने का आदेश दिया। हाईकोर्ट ने अपील पर सुनवाई करते हुए पाया कि ट्रिब्यूनल की ओर से दिया मुआवजा काफी कम है। हाईकोर्ट ने मुआवजा राशि 6,12,000 तय की। इसके अलावा कोर्ट ने मृतक के पिता व बच्चे को एक-एक लाख रुपये अलग से देने का आदेश दिया।
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