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हरियाणा विधानसभा की 17 और लोकसभा की दो सीटें दस साल के लिए आरक्षित, विधेयक पारित
Tue, 21 Jan 2020 04:00 PM IST
पंचकुला ब्यूरो
अमर उजाला, चंडीगढ़
अमर उजाला, चंडीगढ़
Published by: पंचकुला ब्यूरो
Updated Tue, 21 Jan 2020 04:00 PM IST
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विधानसभा सत्र में बोलते हुए मुख्यमंत्री
- फोटो : अमर उजाला
हरियाणा में विधानसभा की 17 और लोकसभा की दो सीटें अगले दस साल के लिए फिर से आरक्षित रहेंगी। इस संदर्भ में एससी आरक्षण संशोधन विधेयक को सोमवार को विधानसभा के विशेष सत्र में सभी विधायकों ने सर्वसम्मति से पारित किया। लोकसभा व राज्यसभा में इस बाबत विधेयक पहले ही पारित हो चुका है।
हरियाणा में भी विधानसभा व लोकसभा चुनावों के दौरान सीटों के आरक्षण संबंधी व्यवस्था कायम रहे, इसलिए इस संशोधन विधेयक को हरियाणा विधानसभा में भी पारित करवाना जरूरी था। विधानसभा सत्र के दौरान इसी संदर्भ में हरियाणा के मुख्यमंत्री मनोहर लाल ने हरियाणा विधानसभा में एक प्रस्ताव पेश किया। जिसमें संविधान (एक सौ छब्बीसवां संशोधन) विधेयक, 2019 के अनुसमर्थन को पारित करने का आग्रह किया गया।
विधानसभा स्पीकर ज्ञानचंद गुप्ता ने सीएम द्वारा प्रस्तुत इस प्रस्ताव पर पक्ष और विपक्ष के सभी विधायकों से अपनी राय रखने को कहा। इस पर सभी विधायकों ने सर्वसम्मति के साथ इस प्रस्ताव को पारित कर दिया। अब वर्ष 2030 तक लोकसभा और विधानसभा चुनावों में सीटों के आरक्षण की व्यवस्था बनी रहेगी।
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हरियाणा में ये सीटें रहेंगी आरक्षित
- हरियाणा में कुल दस लोकसभा सीटों में से दो सीटें अंबाला और सिरसा संसदीय क्षेत्र आक्षित रहेगा।
- प्रदेश में कुल 90 विधानसभा सीटों में से 17 हलके अनुसूचित जाति के उम्मीदवारों लिए आरक्षित रहेंगे। जिनमें अंबाला में मुलाना, यमुनानगर में साढौरा, कुरुक्षेत्र में शाहाबाद, कैथल में गुहला, करनाल में नीलोखेड़ी, पानीपत में इसराना , सोनीपत में खरखौदा, जींद में नरवाना, सिरसा में कालांवाली, फतेहाबाद में रतिया, हिसार में उकलाना, भिवानी में भवानी खेड़ा, झज्जर में झज्जर सीट, रोहतक में कलानौर, रेवाड़ी में बावल, गुडगाँव (गुरुग्राम) में पटौदी और पलवल में होडल शामिल हैं। हरियाणा के मौजूदा कुल 22 जिलों में पांच जिलों महेंद्रगढ़, फरीदाबाद, पंचकूला, नूहं और चरखी दादरी में कोई भी विधानसभा सीट आरक्षित नहीं है।
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हरियाणा में भी विधानसभा व लोकसभा चुनावों के दौरान सीटों के आरक्षण संबंधी व्यवस्था कायम रहे, इसलिए इस संशोधन विधेयक को हरियाणा विधानसभा में भी पारित करवाना जरूरी था। विधानसभा सत्र के दौरान इसी संदर्भ में हरियाणा के मुख्यमंत्री मनोहर लाल ने हरियाणा विधानसभा में एक प्रस्ताव पेश किया। जिसमें संविधान (एक सौ छब्बीसवां संशोधन) विधेयक, 2019 के अनुसमर्थन को पारित करने का आग्रह किया गया।
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विधानसभा स्पीकर ज्ञानचंद गुप्ता ने सीएम द्वारा प्रस्तुत इस प्रस्ताव पर पक्ष और विपक्ष के सभी विधायकों से अपनी राय रखने को कहा। इस पर सभी विधायकों ने सर्वसम्मति के साथ इस प्रस्ताव को पारित कर दिया। अब वर्ष 2030 तक लोकसभा और विधानसभा चुनावों में सीटों के आरक्षण की व्यवस्था बनी रहेगी।
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हरियाणा में ये सीटें रहेंगी आरक्षित
- हरियाणा में कुल दस लोकसभा सीटों में से दो सीटें अंबाला और सिरसा संसदीय क्षेत्र आक्षित रहेगा।
- प्रदेश में कुल 90 विधानसभा सीटों में से 17 हलके अनुसूचित जाति के उम्मीदवारों लिए आरक्षित रहेंगे। जिनमें अंबाला में मुलाना, यमुनानगर में साढौरा, कुरुक्षेत्र में शाहाबाद, कैथल में गुहला, करनाल में नीलोखेड़ी, पानीपत में इसराना , सोनीपत में खरखौदा, जींद में नरवाना, सिरसा में कालांवाली, फतेहाबाद में रतिया, हिसार में उकलाना, भिवानी में भवानी खेड़ा, झज्जर में झज्जर सीट, रोहतक में कलानौर, रेवाड़ी में बावल, गुडगाँव (गुरुग्राम) में पटौदी और पलवल में होडल शामिल हैं। हरियाणा के मौजूदा कुल 22 जिलों में पांच जिलों महेंद्रगढ़, फरीदाबाद, पंचकूला, नूहं और चरखी दादरी में कोई भी विधानसभा सीट आरक्षित नहीं है।