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जीएसीएच 32 में चंडीगढ़ के स्टूडेंट को मिले विशेष कोटा
Updated Sun, 09 Sep 2018 01:52 AM IST
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जीएमसीएच-32 में दाखिले के लिए चंडीगढ़ के स्टूडेंट्स को मिले विशेष कोटा
सबहेड
शहर के कई अभिभावकों ने सांसद किरण खेर से मुलाकात कर विशेष नीति बनाने की मांग की
किरण खेर बोलीं, शहर के छात्रों के अधिकार के लिए डटकर खड़ी हूं
अमर उजाला ब्यूरो
चंडीगढ़। सेक्टर-32 स्थित मेडिकल कालेज में दाखिले के लिए स्टेट कोटे पर कोई स्पष्ट पैमाना नहीं होने से शहर के अभिभावकों ने शनिवार को सांसद किरण खेर से मुलाकात की। अभिभावकों ने सांसद को बताया कि यदि चंडीगढ़ के किसी स्टूडेंट को चंडीगढ़ के मेडिकल कालेज में दाखिला लेना हो तो उन्हें स्टेट कोटे के तहत कोई प्राथमिकता नहीं मिलती जबकि हरियाणा व पंजाब के स्टूडेंट्स अपने स्टेट में कोटा लेने के साथ-साथ चंडीगढ़ के मेडिकल कालेज में भी दाखिला ले सकते हैं।
अभिभावकों ने उदाहरण देकर बताया कि अगर मोहाली के एक स्टूडेंट ने चंडीगढ़ के एक स्कूल से बारहवीं की परीक्षा पास की है तो नीट क्वालिफाई करने के बाद उसे पंजाब के मेडिकल कालेज के साथ चंडीगढ़ के मेडिकल कालेज में भी दाखिला लेने में प्राथमिकता मिलती है। एक तो उसे रेजिडेंस की वजह से फायदा हुआ और दूसरा चंडीगढ़ से बारहवीं करने से। जबकि चंडीगढ़ के स्टूडेंट को एडमिशन के लिए बाहरी छात्रों के साथ प्रतिस्पर्धा करनी पड़ती है।
अभिभावकों की मांग है कि चंडीगढ़ के स्टूडेंट्स को मेडिकल कालेज के एडमिशन में खास प्राथमिकता दी जाए। इसके लिए चंडीगढ़ प्रशासन कोई ऐसी नीति बनाए, जिससे स्टूडेंट्स को फायदा मिले। इस मामले में सांसद किरण खेर ने बताया कि वे इस मुद्दे को चंडीगढ़ प्रशासन के सामने मजबूती से उठाएंगी। उन्होंने कहा कि वे चंडीगढ़ के स्टूडेंट्स के लिए हमेशा से खड़ी रही हूं। जब मेडिकल कालेज में एमबीबीएस की 100 सीटों को लेकर विवाद हुआ था, तब भी इस मुद्दे को प्राथमिकता से उठाया था और आखिर में मंत्रालय को 100 सीटें मंजूर करनी पड़ी थी। इस मौके पर राजीव गुप्ता, डा. अनिल अग्रवाल, डा. सुमित कालरा, किरणदीप सिंह सहित कई लोग मौजूद रहे।
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हाईकोर्ट में भी गया था मामला
इस मामले में कुछ शहरवासियों ने हाईकोर्ट में एक याचिका भी डाली थी। याचिकाकर्ता ने बताया था कि मेडिकल कालेज में स्टेट कोटे के तहत 85 प्रतिशत सीटें आरक्षित होती हैं। स्टेट कोटे के तहत सिर्फ उन्हीं आवेदकों को ही दाखिला दिया जाता है, जिन्होंने शहर के किसी भी स्कूल से बारहवीं की हो। दायर याचिका में याचिकाकर्ता ने बताया है कि उसने अपनी दसवीं तक की शिक्षा शहर के स्कूल से ही हासिल की है, लेकिन प्रशासन की स्टेट कोटे को लेकर बनाए गए अस्पष्ट नियमों के चलते कई बाहरी छात्र भी इस कोटे के तहत दाखिला ले रहे हैं, जिन्होंने बारहवीं शहर के किसी स्कूल से की है। उस दौरान इस पर हाईकोर्ट ने अपना फैसला सुनते हुए साफ कर दिया है जिन आवेदकों ने दाखिले के समय चंडीगढ़ से बाहर अपने रिहायशी राज्य का चयन किया था, वह इस दाखिला प्रक्रिया में अयोग्य माने जाएंगे। साथ ही चंडीगढ़ से बारहवीं पास करने वालों को स्टेट कोटे में शामिल किए जाने वाले नियम को पूरी तरह से गलत बताया था। हाईकोर्ट ने यह भी कहा था कि फिलहाल इस मामले में दखल नहीं दे रहे हैं, क्योंकि यह पॉलिसी मैटर है। ऐसे में प्रशासन अगले वर्ष से नियम को रद्द कर सकता है। कुल मिलाकर हाईकोर्ट ने गेंद प्रशासन के पाले पर फेंक दी थी यानी अब प्रशासन को ही इस बारे में कोई नीति बनानी होगी। अन्य सभी राज्यों ने स्टेट कोटे में दाखिले के लिए एक साफ नीति बनाई हुई है। इसके तहत बाहरी छात्रों को इस कोटे के तहत दाखिला नहीं मिल सकता है।
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जीएमसीएच-32 में दाखिले के लिए चंडीगढ़ के स्टूडेंट्स को मिले विशेष कोटा
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शहर के कई अभिभावकों ने सांसद किरण खेर से मुलाकात कर विशेष नीति बनाने की मांग की
किरण खेर बोलीं, शहर के छात्रों के अधिकार के लिए डटकर खड़ी हूं
अमर उजाला ब्यूरो
चंडीगढ़। सेक्टर-32 स्थित मेडिकल कालेज में दाखिले के लिए स्टेट कोटे पर कोई स्पष्ट पैमाना नहीं होने से शहर के अभिभावकों ने शनिवार को सांसद किरण खेर से मुलाकात की। अभिभावकों ने सांसद को बताया कि यदि चंडीगढ़ के किसी स्टूडेंट को चंडीगढ़ के मेडिकल कालेज में दाखिला लेना हो तो उन्हें स्टेट कोटे के तहत कोई प्राथमिकता नहीं मिलती जबकि हरियाणा व पंजाब के स्टूडेंट्स अपने स्टेट में कोटा लेने के साथ-साथ चंडीगढ़ के मेडिकल कालेज में भी दाखिला ले सकते हैं।
अभिभावकों ने उदाहरण देकर बताया कि अगर मोहाली के एक स्टूडेंट ने चंडीगढ़ के एक स्कूल से बारहवीं की परीक्षा पास की है तो नीट क्वालिफाई करने के बाद उसे पंजाब के मेडिकल कालेज के साथ चंडीगढ़ के मेडिकल कालेज में भी दाखिला लेने में प्राथमिकता मिलती है। एक तो उसे रेजिडेंस की वजह से फायदा हुआ और दूसरा चंडीगढ़ से बारहवीं करने से। जबकि चंडीगढ़ के स्टूडेंट को एडमिशन के लिए बाहरी छात्रों के साथ प्रतिस्पर्धा करनी पड़ती है।
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अभिभावकों की मांग है कि चंडीगढ़ के स्टूडेंट्स को मेडिकल कालेज के एडमिशन में खास प्राथमिकता दी जाए। इसके लिए चंडीगढ़ प्रशासन कोई ऐसी नीति बनाए, जिससे स्टूडेंट्स को फायदा मिले। इस मामले में सांसद किरण खेर ने बताया कि वे इस मुद्दे को चंडीगढ़ प्रशासन के सामने मजबूती से उठाएंगी। उन्होंने कहा कि वे चंडीगढ़ के स्टूडेंट्स के लिए हमेशा से खड़ी रही हूं। जब मेडिकल कालेज में एमबीबीएस की 100 सीटों को लेकर विवाद हुआ था, तब भी इस मुद्दे को प्राथमिकता से उठाया था और आखिर में मंत्रालय को 100 सीटें मंजूर करनी पड़ी थी। इस मौके पर राजीव गुप्ता, डा. अनिल अग्रवाल, डा. सुमित कालरा, किरणदीप सिंह सहित कई लोग मौजूद रहे।
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हाईकोर्ट में भी गया था मामला
इस मामले में कुछ शहरवासियों ने हाईकोर्ट में एक याचिका भी डाली थी। याचिकाकर्ता ने बताया था कि मेडिकल कालेज में स्टेट कोटे के तहत 85 प्रतिशत सीटें आरक्षित होती हैं। स्टेट कोटे के तहत सिर्फ उन्हीं आवेदकों को ही दाखिला दिया जाता है, जिन्होंने शहर के किसी भी स्कूल से बारहवीं की हो। दायर याचिका में याचिकाकर्ता ने बताया है कि उसने अपनी दसवीं तक की शिक्षा शहर के स्कूल से ही हासिल की है, लेकिन प्रशासन की स्टेट कोटे को लेकर बनाए गए अस्पष्ट नियमों के चलते कई बाहरी छात्र भी इस कोटे के तहत दाखिला ले रहे हैं, जिन्होंने बारहवीं शहर के किसी स्कूल से की है। उस दौरान इस पर हाईकोर्ट ने अपना फैसला सुनते हुए साफ कर दिया है जिन आवेदकों ने दाखिले के समय चंडीगढ़ से बाहर अपने रिहायशी राज्य का चयन किया था, वह इस दाखिला प्रक्रिया में अयोग्य माने जाएंगे। साथ ही चंडीगढ़ से बारहवीं पास करने वालों को स्टेट कोटे में शामिल किए जाने वाले नियम को पूरी तरह से गलत बताया था। हाईकोर्ट ने यह भी कहा था कि फिलहाल इस मामले में दखल नहीं दे रहे हैं, क्योंकि यह पॉलिसी मैटर है। ऐसे में प्रशासन अगले वर्ष से नियम को रद्द कर सकता है। कुल मिलाकर हाईकोर्ट ने गेंद प्रशासन के पाले पर फेंक दी थी यानी अब प्रशासन को ही इस बारे में कोई नीति बनानी होगी। अन्य सभी राज्यों ने स्टेट कोटे में दाखिले के लिए एक साफ नीति बनाई हुई है। इसके तहत बाहरी छात्रों को इस कोटे के तहत दाखिला नहीं मिल सकता है।