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रिपोर्ट नहीं दिखाने पर महिला के परिजनों ने अस्पताल में किया हंगामा
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पंचकूला। सेक्टर-21 अलकेमिस्ट अस्पताल में महिला मरीज के परिजनों ने रिपोर्ट नहीं दिखाने पर जमकर हंगामा किया। सूचना पर पहुंची पुलिस ने मामले की जांच की। जांच के बाद डॉक्टरों ने कहा कि अगर वह चाहें तो अपना मरीज दूसरे अस्पताल ले जाकर भर्ती करा सकते हैं। हालांकि इस मामले की पुलिस को लिखित शिकायत नहीं मिली है।
पंजाब के राजपुरा से बुधवार को एक महिला शालू सिंगला सेक्टर-20 में अपनी बहन के पास आई थी। मंगलवार रात अचानक शालू (47) सिंगला को सांस रुकने की समस्या हुई थी। इसके बाद उन्हें सेक्टर-21 के अलकेमिस्ट प्राइवेट अस्पताल में एडमिट करवाया था। महिला के रिश्तेदार राजेश कुमार गुप्ता ने बताया कि मरीज शालू सिंगला को सांस लेने में समस्या हुई थी। इसके बाद उसे पंपिंग किया गया और वेंटिलेटर पर रखा गया। दस मिनट बाद डॉक्टर ने महिला की हालत पर सुधार होने की बात कही थी। डॉक्टरों ने कहा कि महिला को आईसीयू में शिफ्ट करना पड़ेगा। उसके बाद राजेश कुमार से तीस हजार रुपये की फीस जमा करवाने को कहा। इसमें पहले दस हजार एडमिट करते वक्त जमा करवा लिए थे। वीरवार दोपहर को तीस हजार रुपये दोबारा जमा कारवाने को कहा। इस पर परिजनों की ओर से डॉक्टरों की ओर से रिपोर्ट मांगी गई। इसके बाद उन्होंने आनाकानी शुरू कर दी थी। इसलिए परिजनों ने जमकर हंगामा किया। उन्होंने पुलिस कंट्रोल रूम को फोन किया था।
परिजनों ने आरोप लगाया कि डॉक्टरों ने मरीज को वेंटिलेटर पर रखा हुआ है। अस्पताल प्रबंधन की ओर से उन्हें यह जानकारी नहीं दी गई कि महिला जिंदा या मृत है। इस बारे में परिजनों ने जब उनसे जानकारी मांगी तो उन्होंने जानकारी देने से मना कर दिया। जब डॉक्टरों की ओर से मरीज का स्टेटस नहीं बनाया गया तो उन्होंने अस्पताल में हंगामा शुरू कर दिया। परिजनों की ओर से सौ नंबर पर कॉल कर पुलिस बुलानी पड़ी। इसके बाद अस्पताल में पुलिस ने पहुंच कर हंगामा शांत करवाया और परिजनों के साथ जाकर डॉक्टरों से बात की। जब पुलिस पहुंची तो डॉक्टरों ने बताया कि मरीज की धड़कने चल रही हैं। रात को परिजनों को डॉक्टरों ने बोल दिया है कि वह अपने मरीज को ले जा सकते है।
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प्राइवेट अस्पताल में रिपोर्ट परिजनों ने करवाई चेक
महिला के रिश्तेदार राजेश कुमार ने बताया कि जब अस्पताल के डॉक्टरों ने मरीज के जिंदा या मरने की बात नहीं बताई तो हमने मरीज की रिपोर्ट मांगी। इसके बाद दूसरे प्राइवेट अस्पताल में वही रिपोर्ट दिखाई। वहां डॉक्टर ने बताया कि इसमें न्यूरो के डॉक्टर की ओर से भी इलाज किया जाना चाहिए। जिसके बाद परिजनों ने अस्पताल पर आरोप लगाया कि उन्हें सेक्टर-21 के अस्पताल में कहा गया था कि उनके पास न्यूरो सर्जन है, जिन्हें बुलाया गया है, लेकिन वीरवार को भी न्यूरो सर्जन नहीं आए। इसके बाद 100 नंबर पर फोन किया गया और पुलिस के आने के बाद ही डॉक्टरों ने मरीज का स्टेटस बताया।
अलकेमिस्ट अस्पताल में हंगामा होने की सूचना के बाद पुलिस पहुंची। पुलिस ने मामले की पूरी जांच की है। मरीज के परिजनों की ओर से अगर लिखित शिकायत दी जाएगी तो डॉक्टरों पर केस दर्ज किया जाएगा। परिजनों से अस्पताल में तैनात डॉक्टरों ने बात की है। मरीज के बारे में परिजनों को कुछ नहीं बताने की बात सामने आई थी। इस पर अस्पताल प्रबंधन ने बात करवाई है।
- मुकेश कुमार, चौकी इंचार्ज, सेक्टर -21
अस्पताल प्रबंधन कर रहा इंकार
सेक्टर-21 अलकेमिस्ट अस्पताल प्रबंधन इस मामले की जानकारी होने से इंकार कर रहा है। वहीं, इस मामले को लेकर प्रबंधन के कई नंबरों पर फोन किया गया लेकिन किसी ने जवाब नहीं दिया।
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पंजाब के राजपुरा से बुधवार को एक महिला शालू सिंगला सेक्टर-20 में अपनी बहन के पास आई थी। मंगलवार रात अचानक शालू (47) सिंगला को सांस रुकने की समस्या हुई थी। इसके बाद उन्हें सेक्टर-21 के अलकेमिस्ट प्राइवेट अस्पताल में एडमिट करवाया था। महिला के रिश्तेदार राजेश कुमार गुप्ता ने बताया कि मरीज शालू सिंगला को सांस लेने में समस्या हुई थी। इसके बाद उसे पंपिंग किया गया और वेंटिलेटर पर रखा गया। दस मिनट बाद डॉक्टर ने महिला की हालत पर सुधार होने की बात कही थी। डॉक्टरों ने कहा कि महिला को आईसीयू में शिफ्ट करना पड़ेगा। उसके बाद राजेश कुमार से तीस हजार रुपये की फीस जमा करवाने को कहा। इसमें पहले दस हजार एडमिट करते वक्त जमा करवा लिए थे। वीरवार दोपहर को तीस हजार रुपये दोबारा जमा कारवाने को कहा। इस पर परिजनों की ओर से डॉक्टरों की ओर से रिपोर्ट मांगी गई। इसके बाद उन्होंने आनाकानी शुरू कर दी थी। इसलिए परिजनों ने जमकर हंगामा किया। उन्होंने पुलिस कंट्रोल रूम को फोन किया था।
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परिजनों ने आरोप लगाया कि डॉक्टरों ने मरीज को वेंटिलेटर पर रखा हुआ है। अस्पताल प्रबंधन की ओर से उन्हें यह जानकारी नहीं दी गई कि महिला जिंदा या मृत है। इस बारे में परिजनों ने जब उनसे जानकारी मांगी तो उन्होंने जानकारी देने से मना कर दिया। जब डॉक्टरों की ओर से मरीज का स्टेटस नहीं बनाया गया तो उन्होंने अस्पताल में हंगामा शुरू कर दिया। परिजनों की ओर से सौ नंबर पर कॉल कर पुलिस बुलानी पड़ी। इसके बाद अस्पताल में पुलिस ने पहुंच कर हंगामा शांत करवाया और परिजनों के साथ जाकर डॉक्टरों से बात की। जब पुलिस पहुंची तो डॉक्टरों ने बताया कि मरीज की धड़कने चल रही हैं। रात को परिजनों को डॉक्टरों ने बोल दिया है कि वह अपने मरीज को ले जा सकते है।
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प्राइवेट अस्पताल में रिपोर्ट परिजनों ने करवाई चेक
महिला के रिश्तेदार राजेश कुमार ने बताया कि जब अस्पताल के डॉक्टरों ने मरीज के जिंदा या मरने की बात नहीं बताई तो हमने मरीज की रिपोर्ट मांगी। इसके बाद दूसरे प्राइवेट अस्पताल में वही रिपोर्ट दिखाई। वहां डॉक्टर ने बताया कि इसमें न्यूरो के डॉक्टर की ओर से भी इलाज किया जाना चाहिए। जिसके बाद परिजनों ने अस्पताल पर आरोप लगाया कि उन्हें सेक्टर-21 के अस्पताल में कहा गया था कि उनके पास न्यूरो सर्जन है, जिन्हें बुलाया गया है, लेकिन वीरवार को भी न्यूरो सर्जन नहीं आए। इसके बाद 100 नंबर पर फोन किया गया और पुलिस के आने के बाद ही डॉक्टरों ने मरीज का स्टेटस बताया।
अलकेमिस्ट अस्पताल में हंगामा होने की सूचना के बाद पुलिस पहुंची। पुलिस ने मामले की पूरी जांच की है। मरीज के परिजनों की ओर से अगर लिखित शिकायत दी जाएगी तो डॉक्टरों पर केस दर्ज किया जाएगा। परिजनों से अस्पताल में तैनात डॉक्टरों ने बात की है। मरीज के बारे में परिजनों को कुछ नहीं बताने की बात सामने आई थी। इस पर अस्पताल प्रबंधन ने बात करवाई है।
- मुकेश कुमार, चौकी इंचार्ज, सेक्टर -21
अस्पताल प्रबंधन कर रहा इंकार
सेक्टर-21 अलकेमिस्ट अस्पताल प्रबंधन इस मामले की जानकारी होने से इंकार कर रहा है। वहीं, इस मामले को लेकर प्रबंधन के कई नंबरों पर फोन किया गया लेकिन किसी ने जवाब नहीं दिया।