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मड थरैपी: गरमी से कीजिए बचाव
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चंडीगढ़। ग्रीष्मकाल में जठराग्नि मंद हो जाती है और पाचन शक्ति निर्बल। इससे शरीर को पोषक तत्व नहीं मिल पाते। ऐसे में यदि आहार विहार के पालन में बदपरहेजी की जाए तो बीमार पड़ते देर नहीं लगती। इन बातों को ग्रीष्मकाल में खास तौर पर याद रखना चाहिए। ये बातें सेक्टर 16 स्थित गांधी स्मारण भवन स्थित प्राकृतिक चिकित्सा विभाग के डायरेक्टर डॉ. देवराज त्यागी ने बताईं। गांधी स्मारक भवन में मड थेरेपी चल रही है।
डॉ. देवराज त्यागी ने बताया कि ग्रीष्मऋतु में जल्दी उठना, ताजी हवा लेने के लिए घूमने जाना, ठंडे जल से स्नान करना, शीतल वातावरण में रहना तथा चबा-चबा कर भोजन करना चाहिए। ग्रीष्मऋतु में मिट्टी के बहुत फायदे हैं। मिट्टी शरीर के लिए अति गुणकारी वस्तु है। मिट्टी से शरीर के अनेक विकार दूर होते हैं। मिट्टी अपने अंदर सारी गंदगी सोख लेती है। विश्व के सारे प्राकृतिक चिकित्सक मिट्टी का प्रयोग अनेक तरह से करते हैं। सबसे शुद्ध रोग नाशक मिट्टी दो-तीन फीट गहरे गड्ढे से निकली हुई होती है। इस मिट्टी को 12 घंटे पहले भिगो देना चाहिए।
मिट्टी का प्रयोग शरीर पर लेप तथा मिट्टी की पट्टी के तौर पर किया जाता है। मिट्टी की पट्टी तथा लेप से कई तरह की बीमारियां दूर होती हैं। कब्ज की बीमारी में मिट्टी की पट्टी खाली पेट पेडू पर लगभग तीस मिनट रखनी चाहिए। इससे कब्ज दूर होता है। पाचन शक्ति ठीक होने लगती है। सिर दर्द, आंखों के रोग व कमजोरी, खुजली, फोड़े फुंसी, एक्जिमा, रक्तचाप व अनिद्रा में बहुत लाभ मिलता है। मिट्टी लेप से शरीर की सारी गर्मी निकल जाती है तथा शरीर का संतुलन ठीक हो जाता है। मिट्टी लेप से त्वचा के रोम कूप खुल जाते हैं जिसमें शरीर को अच्छी वायु मिलती है।
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सूर्य की तेज किरणें कष्टदायक, ताजी और मौसमी फल का सेवन करें
उन्होंने कहा कि गर्मी के मौसम में सूर्य की तेज किरणों के कारण कष्टदायक, गर्म तथा रुखी हवाएं चलती हैं। इससे जमीन गर्म हो जाती है तथा हमारा शरीर गर्मी सहन नहीं कर पाता और बीमार हो जाता है। इन दिनों में हमें ताजे मौसमी फल व हरी सब्जियां खानी चाहिए। भोजन के साथ कच्चे सलाद के रूप में ककड़ी, हरा धनिया, टमाटर, पत्ता गोभी, प्याज, पुदीना, तरबूज, खरबूजा, परवल, तुरई, छिलके वाली मूंग दाल आदि खाना चाहिए। इन सब में जल की मात्रा अधिक होती है। दोपहर में नींबू पानी पीना चाहिए। आम पाना बनाकर पीना चाहिए। ये चीजें लू से बचाती हैं। दिनभर में 8-10 गिलास पानी पीना चाहिए, लेकिन एक वक्त में एक गिलास पानी ही पीना चाहिए। पानी फ्रिज का न होकर घड़े का होना चाहिए।
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डॉ. देवराज त्यागी ने बताया कि ग्रीष्मऋतु में जल्दी उठना, ताजी हवा लेने के लिए घूमने जाना, ठंडे जल से स्नान करना, शीतल वातावरण में रहना तथा चबा-चबा कर भोजन करना चाहिए। ग्रीष्मऋतु में मिट्टी के बहुत फायदे हैं। मिट्टी शरीर के लिए अति गुणकारी वस्तु है। मिट्टी से शरीर के अनेक विकार दूर होते हैं। मिट्टी अपने अंदर सारी गंदगी सोख लेती है। विश्व के सारे प्राकृतिक चिकित्सक मिट्टी का प्रयोग अनेक तरह से करते हैं। सबसे शुद्ध रोग नाशक मिट्टी दो-तीन फीट गहरे गड्ढे से निकली हुई होती है। इस मिट्टी को 12 घंटे पहले भिगो देना चाहिए।
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मिट्टी का प्रयोग शरीर पर लेप तथा मिट्टी की पट्टी के तौर पर किया जाता है। मिट्टी की पट्टी तथा लेप से कई तरह की बीमारियां दूर होती हैं। कब्ज की बीमारी में मिट्टी की पट्टी खाली पेट पेडू पर लगभग तीस मिनट रखनी चाहिए। इससे कब्ज दूर होता है। पाचन शक्ति ठीक होने लगती है। सिर दर्द, आंखों के रोग व कमजोरी, खुजली, फोड़े फुंसी, एक्जिमा, रक्तचाप व अनिद्रा में बहुत लाभ मिलता है। मिट्टी लेप से शरीर की सारी गर्मी निकल जाती है तथा शरीर का संतुलन ठीक हो जाता है। मिट्टी लेप से त्वचा के रोम कूप खुल जाते हैं जिसमें शरीर को अच्छी वायु मिलती है।
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सूर्य की तेज किरणें कष्टदायक, ताजी और मौसमी फल का सेवन करें
उन्होंने कहा कि गर्मी के मौसम में सूर्य की तेज किरणों के कारण कष्टदायक, गर्म तथा रुखी हवाएं चलती हैं। इससे जमीन गर्म हो जाती है तथा हमारा शरीर गर्मी सहन नहीं कर पाता और बीमार हो जाता है। इन दिनों में हमें ताजे मौसमी फल व हरी सब्जियां खानी चाहिए। भोजन के साथ कच्चे सलाद के रूप में ककड़ी, हरा धनिया, टमाटर, पत्ता गोभी, प्याज, पुदीना, तरबूज, खरबूजा, परवल, तुरई, छिलके वाली मूंग दाल आदि खाना चाहिए। इन सब में जल की मात्रा अधिक होती है। दोपहर में नींबू पानी पीना चाहिए। आम पाना बनाकर पीना चाहिए। ये चीजें लू से बचाती हैं। दिनभर में 8-10 गिलास पानी पीना चाहिए, लेकिन एक वक्त में एक गिलास पानी ही पीना चाहिए। पानी फ्रिज का न होकर घड़े का होना चाहिए।