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शहर के गौरवशाली एतिहासिक धरोहरों और औरंगजेब के मंदिरों पर ढाए गए कहर को देखने से वंचित रह जाते हैं सैलानी

Mon, 04 Mar 2019 01:15 AM IST
Panchkula bureau Panchkula bureau
Updated Mon, 04 Mar 2019 01:15 AM IST
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शहर के गौरवशाली एतिहासिक धरोहरों और औरंगजेब के मंदिरों पर ढाए गए कहर को देखने से वंचित रह जाते हैं सैलानी
गंदगी और अव्यवस्थाओं की शिकार हुआ एतिहासिक धरोहर
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- गंदगी आदि को देखकर पिंजौर गार्डन से ही वापिस लौट जाते हैं पर्यटक
- म्यूजियम में है 9वीं से 11वीं शताब्दी के बीच बने भीमा देवी मंदिर के अवशेष

अमर उजाला ब्यूरो
पिंजौर। शहर की ऐतिहासिक धरोहर भीमा देवी मंदिर के अवशेषों को सहेज कर रखने वाले भीमा देवी म्यूजियम के दोनों प्रवेश द्वार पर गंदगी फैली हुई। जिस वजह से उचित सफाई व्यवस्था न होने के चलते देश-विदेश से पहुंचने वाले पर्यटक केवल यादविंद्रा गार्डन की खूबसूरती को निहार कर वापस चले जाते हैं जिस कारण वे पिंजौर शहर के पांडव कालीन इतिहास और औरंगजेब की ओर से हिंदू मंदिरों पर ढाए गए कहर के जीते जागते उदाहरण को देखने से वंचित रह जाते हैं।

भीमा देवी संग्रहालय के प्रवेश द्वार पर फैली है गंदगी
भीमा देवी संग्रहालय तक पहुंचने का रास्ता पिंजौर गार्डन परिसर से जाता है। जैसे ही गार्डन परिसर से गुजरते हुए भीमा देवी संग्रहालय तक पहुंचते हैं तो रास्ते के दोनों ओर गंदगी, बड़ी-बड़ी झाड़ियां और टूटे हुए लाइट के पोल पर्यटकों का स्वागत करते हैं। अक्सर पर्यटक गंदगी आदि को देखकर पिंजौर गार्डन से ही वापिस लौट जाते हैं। स्थानीय लोगों ने मांग की है कि म्यूजियम के प्रवेश द्वार पर सफाई करवाई जाए ताकि शहर में आने वाले पर्यटक पिंजौर शहर के गौरवशाली इतिहास को जान सकें।
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क्या है भीमा देवी मंदिर और भीमा देवी संग्रहालय
पुरातत्व विभाग को पिंजौर गार्डन की सीमा से सटी भीमादेवी कालोनी के समीप 9वीं से 11वीं शताब्दी के बीच बने भीमा देवी मंदिर के अवशेष प्राप्त हुए। भीमा देवी मंदिर को मूर्तिकला के कारण उत्तर भारत के खुजराहो के उपनाम से भी संबोधित किया जाता है। पुरातत्व विभाग की ओर से खुदाई करने के दौरान भीमा देवी मंदिर के जो अवशेष मिले जो कि पंचायतना शैली में थे। इस शैली का मतलब है कि पांच मंदिरों का समूह जिसमें चार प्रमुख मंदिर चार प्रमुख दिशाओं में निर्मित होते हैं और केंद्र स्थल में मूल मंदिर स्थापित होता है। गुर्जर प्रतिहार समयकाल के इस मंदिर को औरंगजेब ने ध्वस्त कर दिया था। इसके कुछ अवशेषों को सहेज कर रखने के लिए पुरातत्व विभाग ने भीमा देवी संग्रहालय का निर्माण करवाया। इसके अलावा मंदिर के कुछ अवशेष आज भी खुले में रखे हुए हैं।
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म्यूजियम के परिसर में जो गंदगी फैली हुई है वह क्षेत्र पिंजौर गार्डन के अधिकार क्षेत्र में आता है। इस संबंध में उन्होंने कई बार गार्डन प्रबंधन को लिखा गया है। भीमादेवी म्यूजियम और मंदिर परिसर में पूरी सफाई है और मंदिर अवशेषों की पूरी सुरक्षा है। म्यूजियम में कुल 11 कर्मचारी हैं यदि विभाग कुछ और कर्मचारी बढ़ा दे तो इस परिसर की सुरक्षा और साफ-सफाई को बढ़ाया जा सकता है। - वेदपाल, भीमा देवी म्यूजियम इंचार्ज।


म्यूजियम की दीवार के साथ पिंजौर शहर का नाला गुजरता है। उस नाले में शहर की ओर से गंदगी, लिफाफे आदि बहकर आ जाते हैं। उन्होंने बताया कि वे समय-समय पर उस नाले की सफाई करवाते हैं। उन्होंने बताया कि इस नाले की देखभाल का जिम्मा नगर निगम जोन पिंजौर का है। - नीरज गुप्ता, प्रबंधक, पिंजौर गार्डन।
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