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वेदपाठ अद्ययन को 25 छात्रों का हुआ उपनयन संस्कार
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वेदपाठ अध्ययन को 25 छात्रों का हुआ उपनयन संस्कार
- माता मनता देवी संस्कृत गुरुकुल में हुआ भव्य समारोह का आयोजन
- जनेऊ संस्कार को देखकर अभिभूत हुए शहर के सैकड़ों लोग
अमर उजाला ब्यूरो
पंचकूला। माता मनसा देवी संस्कृत गुरुकुलम में रविवार को भव्य उपनयन संस्कार समारोह का आयोजन किया गया, जिसमें गुरुकुल में वेदपाठ का अध्ययन करने वाले 25 छात्रों का यज्ञोपवीत (जनेऊ) संस्कार किया गया। गुरुकुल के संचालक आचार्य स्वामी प्रसाद मिश्र ने बताया कि विगत 12 वर्षों से यह संस्कार प्रतिवर्ष किया जाता है। प्राचीन काल से ही ये गुरुकुल परंपरा चली आ रही है। भगवान राम और कृष्ण भी गुरुकुल में अध्ययन करते थे। उन्होंने अपने संबोधन में प्राचीन संस्कृति का स्मरण कराते हुए मातृ देवो भव, पितृ देवो भव, आचार्य देवो भव के साथ-साथ वसुधैव कुटुंबकम की भावना जागृत की। उन्होंने बताया कि वैदिक संस्कृत में 16 संस्कारों का वर्णन मिलता है। जिसमें से उपनयन 10वां संस्कार है।
उपनयन का अर्थ गुरु के समीप जाना है
उपनयन का अर्थ गुरु के समीप जाना और भौतिक एवं अध्यात्मिक ज्ञान लेकर अपने जीवन को यथार्थ बनाना। उपनयन संस्कार के बाद वेद पाठियों को गायत्री मंत्र की दीक्षा दी गई और चारों वेदों के अध्ययन में प्रवेश कराया गया। कार्यक्रम के मुख्यातिथि श्री माता मनसा देवी श्राइन बोर्ड के मुख्य कार्यकारी अधिकारी एसपी अरोड़ा ने वेद पाठियों को माता-पिता तथा गुरुजनों के आज्ञा पालन करने की बात कही और कहा कि ऐसे संस्कारों की जनमानस को आवश्यकता है। जिससे संस्कार युक्त समाज हो।
संस्कृत को बढ़ाने का किया आह्वान
कार्यक्रम के विशिष्ट अतिथि मुकुुल बंसल ने संस्कार को भारत की आत्मा घोषित करते हुए संस्कृत भाषा को बढ़ावा देने के लिए जनमानस से आह्वान किया। कार्यक्रम के अध्यक्ष दिनेश सिंगला ने संस्कार युक्त समाज हो, इसके लिए संस्कृत भाषा का ज्ञान आवश्यक हैं और गुरुकुलों की स्थापना के लिए सरकार और समाज को मिलकर प्रयास करना चाहिए, जिससे भारत पुन: संस्कृतमय हो।
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मुख्य वक्ता ने यज्ञोपवीत का महत्व बताया
कार्यक्रम के मुख्य वक्ता पंजाब विश्वविद्यालय के संस्कृत प्रो. विक्रम कुमार विवेकी ने जनेऊ का महत्व बताया। कार्यक्रम माता मनसा देवी श्राइन बोर्ड की सचिव शारदा देवी तथा ईश्वर जिंदल, अखिलेश्वर सिंह, जनकराज गुप्ता, अमित सिंगला, ओएन शर्मा एवं, मुकेश गुप्ता, सुरेश तिवारी, ब्राह्मण सभा के प्रधान एमपी शर्मा उपस्थित रहे।
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- माता मनता देवी संस्कृत गुरुकुल में हुआ भव्य समारोह का आयोजन
- जनेऊ संस्कार को देखकर अभिभूत हुए शहर के सैकड़ों लोग
अमर उजाला ब्यूरो
पंचकूला। माता मनसा देवी संस्कृत गुरुकुलम में रविवार को भव्य उपनयन संस्कार समारोह का आयोजन किया गया, जिसमें गुरुकुल में वेदपाठ का अध्ययन करने वाले 25 छात्रों का यज्ञोपवीत (जनेऊ) संस्कार किया गया। गुरुकुल के संचालक आचार्य स्वामी प्रसाद मिश्र ने बताया कि विगत 12 वर्षों से यह संस्कार प्रतिवर्ष किया जाता है। प्राचीन काल से ही ये गुरुकुल परंपरा चली आ रही है। भगवान राम और कृष्ण भी गुरुकुल में अध्ययन करते थे। उन्होंने अपने संबोधन में प्राचीन संस्कृति का स्मरण कराते हुए मातृ देवो भव, पितृ देवो भव, आचार्य देवो भव के साथ-साथ वसुधैव कुटुंबकम की भावना जागृत की। उन्होंने बताया कि वैदिक संस्कृत में 16 संस्कारों का वर्णन मिलता है। जिसमें से उपनयन 10वां संस्कार है।
उपनयन का अर्थ गुरु के समीप जाना है
उपनयन का अर्थ गुरु के समीप जाना और भौतिक एवं अध्यात्मिक ज्ञान लेकर अपने जीवन को यथार्थ बनाना। उपनयन संस्कार के बाद वेद पाठियों को गायत्री मंत्र की दीक्षा दी गई और चारों वेदों के अध्ययन में प्रवेश कराया गया। कार्यक्रम के मुख्यातिथि श्री माता मनसा देवी श्राइन बोर्ड के मुख्य कार्यकारी अधिकारी एसपी अरोड़ा ने वेद पाठियों को माता-पिता तथा गुरुजनों के आज्ञा पालन करने की बात कही और कहा कि ऐसे संस्कारों की जनमानस को आवश्यकता है। जिससे संस्कार युक्त समाज हो।
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संस्कृत को बढ़ाने का किया आह्वान
कार्यक्रम के विशिष्ट अतिथि मुकुुल बंसल ने संस्कार को भारत की आत्मा घोषित करते हुए संस्कृत भाषा को बढ़ावा देने के लिए जनमानस से आह्वान किया। कार्यक्रम के अध्यक्ष दिनेश सिंगला ने संस्कार युक्त समाज हो, इसके लिए संस्कृत भाषा का ज्ञान आवश्यक हैं और गुरुकुलों की स्थापना के लिए सरकार और समाज को मिलकर प्रयास करना चाहिए, जिससे भारत पुन: संस्कृतमय हो।
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मुख्य वक्ता ने यज्ञोपवीत का महत्व बताया
कार्यक्रम के मुख्य वक्ता पंजाब विश्वविद्यालय के संस्कृत प्रो. विक्रम कुमार विवेकी ने जनेऊ का महत्व बताया। कार्यक्रम माता मनसा देवी श्राइन बोर्ड की सचिव शारदा देवी तथा ईश्वर जिंदल, अखिलेश्वर सिंह, जनकराज गुप्ता, अमित सिंगला, ओएन शर्मा एवं, मुकेश गुप्ता, सुरेश तिवारी, ब्राह्मण सभा के प्रधान एमपी शर्मा उपस्थित रहे।