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कमेटी की रिपोर्ट बतायेगी, कौन है गड़बड़ घोटाले का जिम्मेदार
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कमेटी की रिपोर्ट बताएंगी, कौन है गड़बड़ घोटाले का जिम्मेदार
- निगम प्रशासक की ओर से भी किया गया था कमेटी का गठन
- शिकायतकर्ताओं का काम ही ठेकेदारों को तंग करके पैसे ऐंठना है: ठेकेदार
अमर उजाला ब्यूरो
पंचकूला। चौक सौंदर्यीकरण निर्माण घोटाले की जांच के लिए निकाय मंत्री कविता जैन द्वारा गठित कमेटी की टीम से पहले ही निगम प्रशासक ने एक कमेटी का गठन कर दिया था। यह कमेटी पहले से जांच में जुटी है। कमेटी की रिपोर्ट आने तक प्रशासक राजेश जोगपाल ने अधीक्षण अभियंता नगर निगम को पत्र लिखकर निर्देश दिये थे कि रनिंग पेमेंट न की जाएगी। इस मामले में मैसर्ज शाकुंबरी इंजीनियरिंग वर्कर्स को राउंड अबाउट्स की पेमेंट न करने के लिए प्रशासक की ओर 28 दिसंबर 2018 को आदेश दे दिये गये थे। जैसे ही निगम प्रशासक को चौक निर्माण अनियमितता की जानकारी मिली इसके बाद लिखित आदेश अधीक्षण अभियंता नगर निगम पंचकूला को दिया गया। नगर निगम प्रशासक की ओर से एक कमेटी बनाई गई है। जोकि टेंडर से लेकर काम पूरा होने, मैटीरियल, अदा की गई पेमेंट और सभी पहलुओं पर जांच कर रही है। जब तक इस कमेटी की रिपोर्ट नहीं आ जाती तब दूसरी रनिंग बिल की अदायगी ना की जाए।
मैसर्ज शाकुंबरी इंजीनियरिंग वर्कर्स के संदीप शर्मा ने कहा है कि उन्हें नगर निगम द्वारा जो ठेका अलॉट किया गया था, उसी के हिसाब से काम किया है। संभावना है कि किसी वस्तु का रेट अधिक लग गया हो और किसी का कम लगा हो। यहां जरूर गलती हुई होगी, लेकिन टेंडर में जो रेट दिया गया है, टेंडर उसी में पूरा किया गया है। जांच कमेटियों से अनुरोध है कि वह पूरा पक्ष सुने बिना कोई रिपोर्ट ना दें। अन्यथा मजबूरन कोर्ट का दरवाजा खटखटाना पड़ेगा। क्योंकि अभी करीब 83 लाख रुपये की पेमेंट बकाया है। इन ब्लैकमेलर शिकायतकर्ताओं के कारण शहर का विकास रोकने की साजिश सफल नहीं होने दी जाएगी। इन शिकायतकर्ताओं का काम ही ठेकेदारों को तंग करके पैसे ऐंठना है और यदि पैसे ना मिले, तो उनकी शिकायत करके पेमेंट रुकवा देना है। अब उन्होंने काम कर दिया है तो 83 लाख रुपये की पेमेंट फंसवा दी है। दोनों कमेटियों की रिपोर्ट को किसी तीसरी एजेंसी से दिखवाया जाए, ताकि दूध का दूध और पानी का पानी हो सके।
जांच कमेटी के चेयरमैन विशाल सेठ ने कहा कि वह चौकों के निर्माण एवं मैटीरियल सहित सभी पहलुओं की जांच में जुटे हैं। पेमेंट कैसे हुई है और किसने की है, यह भी जांच का विषय है। जल्द ही निष्कर्ष निकालकर सभी के सामने रखेंगे। राजेश जोगपाल, प्रशासक नगर निगम ने कहा कि चौकों का निर्माण लोगों की जान का ख्याल रखते हुए रोड सेफ्टी प्रावधानों के अनुसार किया गया है। चौक बनकर तैयार हो चुके हैं और नगर निगम की कमेटी की ओर से जो भी रिपोर्ट दी जाएगी, यदि उनके स्तर पर कोई कार्रवाई बनती होगी तो वह खुद करेंगे और यदि सरकार के पास कार्रवाई के लिए प्रस्ताव भेजने की जरूरत होगी तो सरकार के पास भेजा जाएगा।
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- निगम प्रशासक की ओर से भी किया गया था कमेटी का गठन
- शिकायतकर्ताओं का काम ही ठेकेदारों को तंग करके पैसे ऐंठना है: ठेकेदार
अमर उजाला ब्यूरो
पंचकूला। चौक सौंदर्यीकरण निर्माण घोटाले की जांच के लिए निकाय मंत्री कविता जैन द्वारा गठित कमेटी की टीम से पहले ही निगम प्रशासक ने एक कमेटी का गठन कर दिया था। यह कमेटी पहले से जांच में जुटी है। कमेटी की रिपोर्ट आने तक प्रशासक राजेश जोगपाल ने अधीक्षण अभियंता नगर निगम को पत्र लिखकर निर्देश दिये थे कि रनिंग पेमेंट न की जाएगी। इस मामले में मैसर्ज शाकुंबरी इंजीनियरिंग वर्कर्स को राउंड अबाउट्स की पेमेंट न करने के लिए प्रशासक की ओर 28 दिसंबर 2018 को आदेश दे दिये गये थे। जैसे ही निगम प्रशासक को चौक निर्माण अनियमितता की जानकारी मिली इसके बाद लिखित आदेश अधीक्षण अभियंता नगर निगम पंचकूला को दिया गया। नगर निगम प्रशासक की ओर से एक कमेटी बनाई गई है। जोकि टेंडर से लेकर काम पूरा होने, मैटीरियल, अदा की गई पेमेंट और सभी पहलुओं पर जांच कर रही है। जब तक इस कमेटी की रिपोर्ट नहीं आ जाती तब दूसरी रनिंग बिल की अदायगी ना की जाए।
मैसर्ज शाकुंबरी इंजीनियरिंग वर्कर्स के संदीप शर्मा ने कहा है कि उन्हें नगर निगम द्वारा जो ठेका अलॉट किया गया था, उसी के हिसाब से काम किया है। संभावना है कि किसी वस्तु का रेट अधिक लग गया हो और किसी का कम लगा हो। यहां जरूर गलती हुई होगी, लेकिन टेंडर में जो रेट दिया गया है, टेंडर उसी में पूरा किया गया है। जांच कमेटियों से अनुरोध है कि वह पूरा पक्ष सुने बिना कोई रिपोर्ट ना दें। अन्यथा मजबूरन कोर्ट का दरवाजा खटखटाना पड़ेगा। क्योंकि अभी करीब 83 लाख रुपये की पेमेंट बकाया है। इन ब्लैकमेलर शिकायतकर्ताओं के कारण शहर का विकास रोकने की साजिश सफल नहीं होने दी जाएगी। इन शिकायतकर्ताओं का काम ही ठेकेदारों को तंग करके पैसे ऐंठना है और यदि पैसे ना मिले, तो उनकी शिकायत करके पेमेंट रुकवा देना है। अब उन्होंने काम कर दिया है तो 83 लाख रुपये की पेमेंट फंसवा दी है। दोनों कमेटियों की रिपोर्ट को किसी तीसरी एजेंसी से दिखवाया जाए, ताकि दूध का दूध और पानी का पानी हो सके।
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जांच कमेटी के चेयरमैन विशाल सेठ ने कहा कि वह चौकों के निर्माण एवं मैटीरियल सहित सभी पहलुओं की जांच में जुटे हैं। पेमेंट कैसे हुई है और किसने की है, यह भी जांच का विषय है। जल्द ही निष्कर्ष निकालकर सभी के सामने रखेंगे। राजेश जोगपाल, प्रशासक नगर निगम ने कहा कि चौकों का निर्माण लोगों की जान का ख्याल रखते हुए रोड सेफ्टी प्रावधानों के अनुसार किया गया है। चौक बनकर तैयार हो चुके हैं और नगर निगम की कमेटी की ओर से जो भी रिपोर्ट दी जाएगी, यदि उनके स्तर पर कोई कार्रवाई बनती होगी तो वह खुद करेंगे और यदि सरकार के पास कार्रवाई के लिए प्रस्ताव भेजने की जरूरत होगी तो सरकार के पास भेजा जाएगा।
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