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छह डाक्टरों ने दिया इस्तीफा, नहीं जमा कराए डाक्यूमेंट
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छह डॉक्टरों का इस्तीफा बना अस्पताल प्रबंधन के गले की फांस
- डॉक्टरों के रिजाइन के बाद नई भर्ती के लिए नहीं निकल पाए विज्ञापन
- प्राईवेट प्रेक्टिस के लिए डॉक्टर छोड़ रहे हैं नौकरी
- हरियाणा के अन्य जिलों में छोड़ी है नौकरी
अमर उजाला ब्यूरो
पंचकूला। ‘एक अनार, सौ बीमार’ की ये कहावत जिले के जनरल अस्पताल से इस्तीफा दे रहे डॉक्टरों पर सटीक बैठती दिखाई दे रही है। कारण साफ है क्योंकि सेक्टर -छह स्थित जनरल अस्पताल से छह डॉक्टरों ने अलग-अलग तारीखों पर इस्तीफा तो दे दिया है लेकिन इस्तीफे के बाद जरूरी दस्तावेज इन डॉक्टरों की ओर से जमा नहीं कराने पर पूरा मामला अस्पताल प्रबंधन के लिए परेशानी का सबब बन चुका है। क्योंकि एक ओर तो नए डॉक्टरों की भर्ती नहीं हो पाई है। वहीं दूसरी ओर डॉक्टरों की कमी के कारण अस्पताल में आने वाले मरीजों को सबसे ज्यादा परेशानी उठानी पड़ रही है। इसके लिए हरियाणा हेल्थ सर्विसेज की ओर से पंचकूला के सीएमओ को लेटर लिखा गया है कि जल्द ही डॉक्टरों के सभी डॉक्यूमेंट जमा कराए जाएं।
एक डॉक्टर का त्याग पत्र स्वीकार करने के लिए ये दस्तावेज होना जरूरी
जनरल अस्पताल के सीएमओ योगेश शर्मा ने बताया कि हरियाणा स्वास्थ्य विभाग की ओर से सीएमओ को लेटर जारी कर यह मांग की गई है कि सभी डॉक्टर इस्तीफा देने की प्रक्रिया की आवश्यक शर्त का पालन करें। इसके लिए डॉक्टरों को चिकित्सा अधिकारी की ओर से मूल रूप से दिया गया त्याग पत्र देना होता है। वहीं एक मास का नोटिस देना होता है, जिसमें यह बताना जरूरी है कि डॉक्टर उस अवधि में ड्यूटी पर तैनात था या नहीं। यदि एक मास का नोटिस नहीं दिया गया तो एक महीने का वेतन सभी भत्तों सहित सरकारी खजाने में जमा करने की मूल चालान की एक कॉपी देनी होती है और चिकित्सा अधिकारी की ओर से प्रस्तुत की गई मूल चार्ज रिपोर्ट भी देनी होती है। इसके अलावा चिकित्सा अधिकारी के पक्ष में प्रमाण पत्र नहीं देना होगा। चिकित्सा अधिकारी के विरुद्ध लंबित नियम सात और आठ की कार्यवाही के बारे में सूचना देनी होता है। लेकिन अभी तक इन छह डॉक्टरों की ओर से औपचारिकताएं पूरी नहीं की गई है। इसलिए इनका रिजाइन अभी तक पूरी प्रक्रिया के साथ मंजूर नहीं किया गया है।
इन डॉक्टरों ने नहीं जमा कराए पूरे डॉक्यूमेंट
जनरल अस्पताल में काम करने वाले आर्थो विभाग के डॉक्टर पंकज अग्रवाल ने तीन मई 2015 को रिजाइन किया था। वहीं डॉ. भावना ने 11 अक्तूबर 2010 को रिजाइन किया था। इसके अलावा डॉ. प्रदीप गुप्ता ने 13 नवंबर 2015 को, डॉ. विकास आहूजा ने 7 सितंबर 2016 को और डॉ. सलिल गोयल ने 16 जून 2017 को इस्तीफा दिया था। इसके बाद इन डॉक्टरों की ओर से पूरे डॉक्यूमेंट जमा नहीं कराए गए हैं। इस कारण यह अभी तक पूरी तरह से रिलीव नहीं हो पाए हैं। इस कारण अभी तक नई डॉक्टरों की भर्ती नहीं हो पाई है। जनरल अस्पताल के सीएमओ योगेश शर्मा ने बताया कि डॉक्टरों की ओर से रिजाइन किया गया है लेकिन कुछ औपचारिकताएं बची है। जल्द ही सभी डॉक्टरों से पूरे डॉक्यूमेंट जमा करवाए जाएंगे।
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जो भी डॉक्टर जनरल अस्पताल से इस्तीफा देकर गए हैं। अगर वह अपने इस्तीफा की प्रक्रिया पूरी कर नहीं गए होंगे तो उन्हें नोटिस देकर पूरे डॉक्यूमेंट जमा करवाए जाएंगे। अगर वे नहीं जमा करेंगे तो उन पर सख्त कार्रवाई की जाएगी। - योगेश शर्मा, सीएमओ, जनरल अस्पताल, सेक्टर -6।
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- डॉक्टरों के रिजाइन के बाद नई भर्ती के लिए नहीं निकल पाए विज्ञापन
- प्राईवेट प्रेक्टिस के लिए डॉक्टर छोड़ रहे हैं नौकरी
- हरियाणा के अन्य जिलों में छोड़ी है नौकरी
अमर उजाला ब्यूरो
पंचकूला। ‘एक अनार, सौ बीमार’ की ये कहावत जिले के जनरल अस्पताल से इस्तीफा दे रहे डॉक्टरों पर सटीक बैठती दिखाई दे रही है। कारण साफ है क्योंकि सेक्टर -छह स्थित जनरल अस्पताल से छह डॉक्टरों ने अलग-अलग तारीखों पर इस्तीफा तो दे दिया है लेकिन इस्तीफे के बाद जरूरी दस्तावेज इन डॉक्टरों की ओर से जमा नहीं कराने पर पूरा मामला अस्पताल प्रबंधन के लिए परेशानी का सबब बन चुका है। क्योंकि एक ओर तो नए डॉक्टरों की भर्ती नहीं हो पाई है। वहीं दूसरी ओर डॉक्टरों की कमी के कारण अस्पताल में आने वाले मरीजों को सबसे ज्यादा परेशानी उठानी पड़ रही है। इसके लिए हरियाणा हेल्थ सर्विसेज की ओर से पंचकूला के सीएमओ को लेटर लिखा गया है कि जल्द ही डॉक्टरों के सभी डॉक्यूमेंट जमा कराए जाएं।
एक डॉक्टर का त्याग पत्र स्वीकार करने के लिए ये दस्तावेज होना जरूरी
जनरल अस्पताल के सीएमओ योगेश शर्मा ने बताया कि हरियाणा स्वास्थ्य विभाग की ओर से सीएमओ को लेटर जारी कर यह मांग की गई है कि सभी डॉक्टर इस्तीफा देने की प्रक्रिया की आवश्यक शर्त का पालन करें। इसके लिए डॉक्टरों को चिकित्सा अधिकारी की ओर से मूल रूप से दिया गया त्याग पत्र देना होता है। वहीं एक मास का नोटिस देना होता है, जिसमें यह बताना जरूरी है कि डॉक्टर उस अवधि में ड्यूटी पर तैनात था या नहीं। यदि एक मास का नोटिस नहीं दिया गया तो एक महीने का वेतन सभी भत्तों सहित सरकारी खजाने में जमा करने की मूल चालान की एक कॉपी देनी होती है और चिकित्सा अधिकारी की ओर से प्रस्तुत की गई मूल चार्ज रिपोर्ट भी देनी होती है। इसके अलावा चिकित्सा अधिकारी के पक्ष में प्रमाण पत्र नहीं देना होगा। चिकित्सा अधिकारी के विरुद्ध लंबित नियम सात और आठ की कार्यवाही के बारे में सूचना देनी होता है। लेकिन अभी तक इन छह डॉक्टरों की ओर से औपचारिकताएं पूरी नहीं की गई है। इसलिए इनका रिजाइन अभी तक पूरी प्रक्रिया के साथ मंजूर नहीं किया गया है।
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इन डॉक्टरों ने नहीं जमा कराए पूरे डॉक्यूमेंट
जनरल अस्पताल में काम करने वाले आर्थो विभाग के डॉक्टर पंकज अग्रवाल ने तीन मई 2015 को रिजाइन किया था। वहीं डॉ. भावना ने 11 अक्तूबर 2010 को रिजाइन किया था। इसके अलावा डॉ. प्रदीप गुप्ता ने 13 नवंबर 2015 को, डॉ. विकास आहूजा ने 7 सितंबर 2016 को और डॉ. सलिल गोयल ने 16 जून 2017 को इस्तीफा दिया था। इसके बाद इन डॉक्टरों की ओर से पूरे डॉक्यूमेंट जमा नहीं कराए गए हैं। इस कारण यह अभी तक पूरी तरह से रिलीव नहीं हो पाए हैं। इस कारण अभी तक नई डॉक्टरों की भर्ती नहीं हो पाई है। जनरल अस्पताल के सीएमओ योगेश शर्मा ने बताया कि डॉक्टरों की ओर से रिजाइन किया गया है लेकिन कुछ औपचारिकताएं बची है। जल्द ही सभी डॉक्टरों से पूरे डॉक्यूमेंट जमा करवाए जाएंगे।
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जो भी डॉक्टर जनरल अस्पताल से इस्तीफा देकर गए हैं। अगर वह अपने इस्तीफा की प्रक्रिया पूरी कर नहीं गए होंगे तो उन्हें नोटिस देकर पूरे डॉक्यूमेंट जमा करवाए जाएंगे। अगर वे नहीं जमा करेंगे तो उन पर सख्त कार्रवाई की जाएगी। - योगेश शर्मा, सीएमओ, जनरल अस्पताल, सेक्टर -6।